Monday, August 26, 2019

"ढाल दो साँचे में लोहा है गरम" (चर्चा अंक- 3439)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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धुंध 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा 
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नँद नन्दन कित गये 

जयन्ती प्रसाद शर्मा  
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वो कृष्ण है 

जो जीवन जीना सिखाये  
हर रंग में रंग जाना सिखाये  
वो कृष्ण है  
जो मान दे सभी को  
सबके दिलों में समा जाये  
वो कृष्ण है... 
आत्ममुग्धा 
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नया जूता .... 

ओंकार 

मेरी धरोहर पर संजय भास्‍कर  
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शब्दों की माला 

मैं चाहूँ तुझे ही, ये कैसे बताऊँ  
जो पढ़ के ना समझे तो कैसे जताऊँ  
देखूँ तुझे तो मैं, ख़ुद ही को भूलूँ  
यूँ चेहरे से नज़रें मैं कैसे हटाऊँ ... 
Amit Mishra 'मौन'  
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अखिल भुवन में जिनका वन्दन 

अरुण अधर पर वंशी रखकर  
जो प्रेम राग को गाते हैं  
वो मधुसूदन वो यदुनंदन  
जग को अनुराग सिखाते हैं... 
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बात मित्रों की ! 

जब पलटती हूँ  
अतीत के पन्नों को  
कुछ लम्हे, कुछ बातें,  
जेहन में बसी हैं आज भी ,  
कुछ तस्वीरें चस्पा हैं मित्रों की... 
hindigen पर रेखा श्रीवास्तव 
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Main raat kaise guzarun. 

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छंद-सोरठा 

सोरठा हर पूजन के बाद, जलता है पावन हवन।  
खुशबू से आबाद,खुशी बाँटता है पवन... 
ऋता शेखर 'मधु'  
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6 comments:

  1. सुप्रभात ! विविधरंगी पोस्ट्स से सजा चर्चा मंच..सभी रचनाकारों को बधाई !

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  2. आभार आदरणीय आज की चर्चा में बहुत कुछ के बीच कुछ 'उलूक' का भी देने के लिये। सुन्दर प्रस्तुति।

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  3. सुंदर चर्चा। मेरी रचना को शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  4. बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति सर
    मुझे स्थान देने के लिए तहे दिल से आभार
    प्रणाम
    सादर

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  5. व्यवस्थित सार्थक सूत्रों से सजा चर्चा मंच|
    मंच पर हमारे सोरठे को स्थान देने के लिए आभार|
    सादर

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  6. वाह बेहतरीन रचनाओं का संगम।एक से बढ़कर एक प्रस्तुति।
    BhojpuriSong.in

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