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Saturday, March 24, 2012

"परोपकार करते चलो...." (चर्चा मंच-828)

मित्रों!

नवसम्वतसर-२०६९ प्रारम्भ होने के साथ ही

नवरात्र की धूम मची हुई है।

आप सबको इस अवसर पर

हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ!

Bhagat-Singh-Sukhdev-Rajguru
जीवन धन्य दर्शन पाऊँ
दिव्य ज्योति निहारूँ एक हो जाऊँ
महिषासुर "मैं" रुपी अंतस में मर्दन करो...
रुनझुन की बातों का सिलसिला बस यूँ ही शुरू हो गया था...
बहुत कुछ था जो संजोना चाहती थी...
अपनी लाडली को, उसके बचपन की ढेरों मीठी यादों...
शहीद [The Thought ]
शत -शत नमन, अमर पुत्र ! .
नहीं है कुछ कहने को प्रशंशा में तेरें ,
नहीं हैं तेरे स्तर की, कोई उपाधि,
नहीं है कोई उपमा तेरे समक्ष
नहीं है कोई ज्योति ,...


सौ जगह से चाक ये दिल मेरा
हो गया जिस्म जल थल मेरा
हम उसके शहर को छोड़ चले लैला
मेरी न महमिल मेरा
जब उठा जनाजा कंधों पर
पशेमान खडा था कातिल मेरा
सही को सराहो बिराओ नहीं ।
विरुद-गीत भी व्यर्थ गाओ नहीं
किया इक तुरंती अगर टिप्पणी-
अनर्गल गलत भाव लाओ नहीं ।
मिटटी में दबा वह बीज
अंकुरित हो उभर चुका था अँधेरे से उजाले की ओर
अब हवा बताश धूप छाँव तूफ़ान बवंडर धूल मिटटी सहना नसीब बन गया है
कब तक माँ की कोख में ??
क्या आप सफल हैं???.
(निर्मल हास्य के लिए जनहित में जारी :)
सफलता - कहते हैं ऐसी चीज होती है
जिसे मिलती है तो नशा ऐसे सिर चढ़ता है कि
उतरने का नाम नहीं लेता.

फिर लाशों का तर्पण कौन करे ?
जी आपके स्नेह से अभिभूत हूँ
किन्ही कारणों से मैंने सभी साझा ब्लोग्स छोड़ दिए हैं
और सबसे खुद को अलग कर लिया है
ये मेरे निजी कारण हैं .......
Bhagat-Singh-Sukhdev-Rajguru
आज २३ मार्च उन वीरों के बलिदान होने का दिन हें
जिन्होंने अंग्रेजी सरकार की चूलें हिला दी थीं।
हम कुछ लोग नम आखों से उनको याद करते हें और उनकी क़ुरबानी ...

माटी से मिली देह है
माटी में मिल जाना है
क्या तेरा क्या मेरा ,
सब यही रह जाना है ।

नए वर्ष का पहला दिन, पहली पोस्ट और मैं कैद हो गई...
Hello ! मैं हूँ आप सबकी रुनझुन!
आज मैं खुद आपसे बातें करना चाहती हूँ,
क्योंकि अब तो मैं पूरे दस साल की हो गई हूँ
शहीद भगत सिंह

*देश भक्ति की पावन रज से, सुसज्जित भाल*
*रिपुहन्ता, सिंघस्वरूपा, भारत माँ का लाल |
*अमर्त्यवीर ,पाषाण हिय और स्कंध विशाल * *
धन का आना और मानवीय संवेदनाओं का जाना

जब भी देखा है , सोचा-समझा है,
यही पाया है कि
धन का आना और मानवीय संवेदनाओं का जाना
साथ-साथ ही होता है।
बहुत हैरान करती है ये बात ...
संवेदनाएं / हाइकु
रिश्ते हैं यहाँ अपेक्षाओं से भरे दम तोड़ते
भावुक मन संवेदना से भरा बरस गया ।...
एक गीत :
ना मैं जोगी ,ना मैं..ज्ञानी,
मैं कबिरा की सीधी बानी ।
वेद पुरान में क्या लिख्खा है ,मैं अनपढ हूं ,
मैं क्या जानू दिल से दिल की राह मिलेगी ...
भूली -बिसरी बातें
वक्त की कडाही में मैंने पकाई
स्नेह , अपनापन औ समर्पण भरी
मिठास से रिश्तों की रसमलाई
तुम नही आई पर ....
परोपकार करते चलो
रात अंधेरी गहराता तम
सांय सांय करती हवा सन्नाटे में सुनाई देती
भूले भटके आवाज़ कोइ अंधकार में उभरती
निंद्रारत लोगों में कुछ को चोंकाती विचलित कर जाती ...
नहीं गिला
अपने जब चिर विदा ले तो दे जाते है हमे असीम गम
साल बीतने को आया पर याद आते ही
आँखे होती आज भी नम
तुम्हे खोने का बोझ मन पर है बड़ा ही भारी ।
पंथी परदेसी
राह तुम्हारी दूर चले आये तुम पंथी भूले ,
हुए उदय कुछ पुण्य हमारे पद राज पा हम फूले !
स्नेह बिंदु कुछ इस मरुथल में आ तुमने बरसाये..
ग़ज़ल
एक तरही ग़ज़ल पेश ए ख़िदमत है
जिस का तरही मिसरा था *
"इब्ने मरियम हुआ करे कोई...
*ख़्वाब बन कर मिला करे कोई ....
"साढ़े तीन साल के बालक द्वारा तबला वादन"

जी हाँ, यह है ललित सिंह (लक्की)
 
अन्त में देखिए दो कार्टून!

26 comments:

  1. वाह रे छोटे तबला वादक ललित जी/ सुन्दर लिनक्स

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  2. आपके सफलतम प्रयास,साहित्य के प्रति निष्ठां,चर्चा मंच को सदा की तरह आज भी आलोकित करते हुए प्रतिष्ठित हैं सर ... बहुत -२ शुभकामनायें संकलन व नव वर्ष की /

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  3. कार्टून भी सम्‍मि‍लि‍त करने के लि‍ए आपका आभार

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  4. bahut rochak sootron ke saath meri rachna ko shamil karne ke liye hardik roop se aabhari hoon.

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  5. एक बार फिर गुरु जी की विशेष प्रस्तुति ।।

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  6. तबले की थप-थप हुई, तुमुल ताल तब्दील ।
    कीर्ति-पताका उड़ चली, गई सैकड़ों मील ।


    गई सैकड़ों मील, ढील नर सिंह न देना ।
    माटी कोमल गील, ढाल चाहे जस लेना ।

    रविकर का आशीष, पाय मंजिल सब अगले ।
    बने नागरिक श्रेष्ठ, ध्यान देता रह तब ले ।

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  7. bahut achchi prastuti nd sanklan thanks nd aabhar roopchandra jee.

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  8. शास्त्री जी बहुत बहुत धन्यवाद कि इतनी बढ़िया रचनाओं और गुणीजन के बीच आप ने मुझे स्थान दिया ,आभारी हूँ
    ललित जी तबला वादक तो बहुत ही मज़ेदार लगे और कार्टून्स भी बढ़िया हैं बाक़ी लिंक्स अब पढ़ूंगी !

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  9. बहुत बढ़िया चर्चा,....
    हर रंग लिए हुए...

    सादर.

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  10. सुन्दर लिक्स सुन्दर प्रस्तुति..मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार..

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  11. उन्मना से मेरी माँ की रचना 'पंथी परदेसी' का चयन करने के लिए धन्यवाद एवं आभार ! सभी लिंक्स बहुत अच्छे हैं !

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  12. गीत " ना मैं जोगी ,ना मैं ज्ञानी"......को इस मंच पर सम्मिलित करने का बहुत-बहुत धन्यवाद
    सादर
    आनन्द.पाठक

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  13. अंकल इस सुन्दर चर्चा में मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए आपको ढेर सारा थैंक्यू!!!!

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  14. बहुत रोचक चर्चा...

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  15. बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स का चयन किया है आपने ।

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  16. सुंदर संकलन...
    सादर आभार...

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  17. प्रसांगिक और सार्थक चर्चा विविधता लिए .नए आयाम लिए ,नए हस्ताक्षर लिए ,बधाई .

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  18. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति..
    नेट की प्रॉब्लम है..देखते हैं कितना पढ़ पाते है...
    आभार...

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  19. आपका मंच बहुत ही उपयोगी व रोचक लगा, साधुवाद

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  20. अच्छे और रोचक लिंक्स के साथ सजा चर्चा मंच बहुत अच्छा रहा |नव संवत्सर शुभ और मंगलमय हो |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार
    आशा

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  21. 'lams' se meri Gazal, pasheman khada tha qatil mera ko shamil karne k liye shukruya.
    bahut acchi charcha.

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  22. बहुत सुंदर लिनक्स दिए हें सब तक नहीं कुछ तक तो पहुंचा ही जा सकता है . शामिल करने के लिए आभार !

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  23. bahut sundar prayaas hai ,nav samvatsar ki aapko mangalkamnayen

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