Followers

Sunday, August 05, 2018

"धोखा अपने साथ न कर" (चर्चा अंक-3054)

मित्रों! 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

--

ग़ज़ल-  

धोखा अपने साथ न कर 

--

कुल्लड़ में चाय .... 

बात ईसा पूर्व की है...लगभग 2700 वर्ष...। चीन के सम्राट के हाथ मे गर्म पानी का प्याला था और मचलती हवाओ ने कुछ पत्तो को अपने संग लाया और उसे सम्राट के प्याले में डुबो दिया। पर सूखे पत्ते की गुस्ताखियां देख जब तक सम्राट अपने चेहरे का रंग बदलता गर्म पानी ने अपना रंगत बदल दिया और वाष्प ने अपने संग विशेष खुसबू से सम्राट को आनंदित कर दिया। एक चुस्की पीते ही वह समझ गया कि वह भविष्य के लिए एक और पेय पहचान लिया है और फिर चीन से पूरी दुनिया में फैल गया... 
THE LEGENDARY GAMERS 
--

अंग्रेज़ी में कहते हैं 

फ़िल्म का नाम है, 'अंग्रेज़ी में कहते हैं।'
 हीरो हैं संजय मिश्र। फ़िल्म में इनका नाम है यशवंत बत्रा।हीरोइन एकावली खन्ना। इनके किरदार का नाम है किरण।
संजय की ख़ासियत है कि अपने किरदार को इतनी संजीदगी से निभाते हैं, 

पता नहीं चलता कि फ़िल्म देख रहे हैं या हक़ीक़त... 
abhishek shukla  
--

कल रात ख्वाब में 

कल रात ख्वाब में
मैं तुम्हारे घर के कितने पास
पहुँच गयी थी !
तुम्हारी नींद ना टूटे इसलिये
मैंने दूर से ही तुम्हारे घर के
बंद दरवाज़े को
अपनी नज़रों से सहलाया था
और चुपके से
अपनी भीगी पलकों की नोक से
उस पर अपना नाम उकेर दिया था !
सुबह को जब तुमने दरवाजा खोला होगा
तो उसे पढ़ तो लिया था ना ... 
Sudhinama पर sadhana vaid  
--

नया शिक्षा सत्र :  

सतर्कता एवं सुरक्षा  

वर्तमान समय बच्चों , अभिभावकों , शिक्षकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। वैसे तो अब शिक्षा सत्र के बदल जाने से कुछ परिवर्तन आ ही गया है लेकिन फिर भी एक लम्बी छुट्टी के बाद बच्चों को स्कूल आने पर कुछ नया उत्साह रहता है। यद्यपि सत्र अप्रैल से शुरू होने लगा है लेकिन जुलाई का महीना भी प्रवेश की दृष्टि से , नए स्कूल की दृष्टि से और नए माहौल में नए बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है... 
मेरा सरोकार पर रेखा श्रीवास्तव  
--

मै ही ब्रह्मा ,  

मै ही नारायण क्योंकि ... 

AAWAZ पर SACCHAI 
--

हरि ॐ ---  

मन तरपत हरि दर्शन को आज ,  

मोरे तुम बिन बिग्रे सब काज --  

शकील बदायूनी 

आज है इनका जन्मदिन 
sunil kumar 
--

सोहर, चैती और होली गाकर  

हमें झुमाने वाले  

पं. छन्नूलाल मिश्र 

Alaknanda Singh 
--

मन का मौसम  

SADA  सदा 
--

प्रेम का यही पुश्तैनी ठिकाना है  

fatehsagar 

कभी आप उदयपुर में राजीव गांधी पार्क के सामने फतेहसागर को निहारने के लिये खड़े हुए हैं? मुझे तो वह दृश्य दीवाना बनाता है। चारों तरफ अरावली पर्वतमाला की श्रंखला और मध्य में लहलहाता फतेहसागर! फतेहसागर के किनारे जहाँ पानी कम है वहाँ कुछ पेड़ भी अपनी जड़े जमाएं मजबूती से खड़े हैं और इन पेड़ों पर पक्षी बसेरा बनाकर रहते हैं। मैं इस दृश्य को आँखों से पीने लगती हूँ, निगाहें चारों तरफ घूम जाती हैं, कभी पहाड़ की कोई चोटी जिस पर बना मन्दिर अपनी ओर ध्यान खींच लेता है तो कभी... 
--

हरिजन एक्ट के बहाने  

मन की भड़ास.. 

चौथाखंभा पर Arun Sathi  
--

परदेस 

प्यार पर 
Rewa tibrewal 
--

दो गीत-  

कच्चे घर में हम और  

अज़नबी की तरह 

जयकृष्ण राय तुषार 
--

हाँ मैं लिखता हूँ... 

the missed beat पर 
jafar  
--

किरदार...... 

श्यामल सुमन 

yashoda Agrawal 
--

मेरे घर का पता - - 

Shantanu Sanyal 
--

वो तारे 

गगन के पाश में,
गहराते रात के अंक-पाश में,
अंजाने से किस प्यास में,
एकाकी हैं वो तारे... 
purushottam kumar sinha  
--

8 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. सुन्दर चर्चा

    ReplyDelete
  3. सुन्दर सूत्रो से सजी आज की रविवारीय चर्चा में 'उलूक' के ख्वाब को भी जगह देने के लिये आभार आदरणीय।

    ReplyDelete
  4. सुंदर चर्चा से सजा मंच
    आदरणीय श्री मेरी पोस्ट को जगह देने के लीये आपका मै ह्रदय से आभारी हु

    ReplyDelete
  5. मित्रता दिवस की सभी मित्रों व पाठकों को हार्दिक बधाई ! आज के सुन्दर सूत्रों के साथ मेरी रचना को भी चर्चामंच पर स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

    ReplyDelete
  6. Very nice post...
    Mere new blog ki new post par aapka swagat hai.

    ReplyDelete
  7. शुक्रिया सर, आपने मेरी पोस्ट को चर्चा मंच पर स्थान दिया। आभार। सुंदर चर्चा।

    ReplyDelete
  8. वाह बहुत ही बढ़िया लिंक संयोजन एवम प्रस्तुति

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"सब के सब चुप हैं" (चर्चा अंक-3126)

मित्रों!  मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...