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Sunday, May 12, 2019

"मातृ दिवस"(चर्चा अंक- 3333)

स्नेहिल अभिवादन   
रविवासरीय चर्चा में आप का हार्दिक स्वागत है|  
देखिये मेरी पसन्द की कुछ रचनाओं के लिंक |  
 अनीता सैनी  
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माँ 

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गद्य-पद्य "मातृ दिवस" 

जो बच्चों को जीवन के, 
कर्म सदा सिखलाती है। 
ममता जिसके भीतर होती, 
माता वही कहाती है
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माँ ने वाणी को उच्चारण का ढंग बतलाया है,
माता ने मुझको धरती पर चलना सिखलाया है,
खुद गीले बिस्तर में सोईमुझे सुलाया सूखे में,
माँ के उर में ममता का व्याकरण समाया है

 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 

roopchandashastri at 
उच्चारण 
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फूल और कांटा 
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विश्वमोहन at
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मशकूक 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा at 
 कविता "जीवन कलश" 
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" माँ " 

My Photo 

Kamini Sinha at 

 मेरी नज़र से 

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जीवन 

11 comments:

  1. सभी पाठकों को मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    बहुत सुन्दर और सार्थक चर्चा।
    आपका आभार अनीता सैनी जी।

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  2. सुन्दर पठनीय संकलन

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  3. बहुत सुंदर रचनाओं से सजा आज का यह अंक अत्यंत सराहनीय है प्रिय अनीता।
    मातृ-दिवस की सभी को शुभकामनाएँ।

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  4. सराहनीय और सुन्दर प्रस्तुति प्रिय अनीता । मुझे इस संकलन में सम्मिलित करने के लिए सस्नेह आभार ।

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  5. सुंदर लिंक्स. मेरी रचना को शामिल करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया अनीता जी 🙏

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  6. बहुत सुंदर अंक
    बेहतरीन रचनाएं

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  7. बहुत ही सुन्दर सार्थक सूत्रों का संकलन ! मेरी दोनों रचनाओं को आज के पटल पर स्थान देने के लिए आपका हृदय से धन्यवाद एवं आभार अनीता जी ! मातृृ दिवस की आपको व सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं !

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  8. बहुत सुंदर अंक
    बेहतरीन रचनाएं

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