Followers

Tuesday, May 21, 2019

"देश और देशभक्ति" (चर्चा अंक- 3342)

मित्रों!
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
--
--
--

तलाश 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा  
--

कहो जेठ तुम कब आये 

अशांत घड़ी थी  
व्यस्त बड़ी थी  
बोझिल पल हर वक्त पड़ी थी  
फुर्सत के क्षण ने कुछ गाये  
कहो जेठ तुम कब आये.... 
BHARTI DAS पर 
Vinbharti blog 

इत्र सा महकता नाम तेरा 

इत्र सा महकता नाम तेरा,  
सुरभित समीर कर जाता है  
कितनी है कशिश मोहब्बत में,  
मन बेखुद सा हो जाता है  
दिल में एक टीस सी जगती है  
जब नाम तुम्हारा आता है... 
Sudha Singh  
--
--

वह नहीं गया ,रह गया था 

जाने वाले ने तो कहा था  
नहीं रुक पायेगा  
उसे अब जाना ही होगा  
अब अगर रुक गया  
जा नहीं पाऊँगा कभी  
शाम भी हो रही है  
जाना ही होगा उसे... 
nayee dunia  
--
--

कल्पनालोक 

ज्यों हुई दृष्ट मति हुई भ्रष्ट,  
सब भूले अपना काम अरे!  
देखा एक षोडशी बाला को  
लाखों का काम तमाम करे|  
कल्पनालोक में खड़े खड़े,  
पथिकों पर ऐसे वार करे... 
विमल कुमार शुक्ल 'विमल' 
--

Nail-Polish ! 

तिश्नगी पर आशीष नैथाऩी 
--

रिश्तों में ठगी गई हूँ मै... 

ना जाने किसने सिखाया था,  
याद नही किसने बताया था..  
कहाँ से मुझमे ये हुनर आ गया,  
रिश्तों को निभाने का..  
'आहुति' पर sushma verma  
--
--

बाल कविता  

"पेड़ लगाओ"  

( राधा तिवारी "राधेगोपाल ") 

हर प्राणी एक पेड़ लगाओ
धरती पर हरियाली लाओ ... 
--
--
--

सखी अकेले न तुमको रहने दूंगी ..... 

धूप के ताप में न जलने दूंगी
सखी अकेले न तुमको रहने दूंगी ...

तुम्हारे अश्रुधार रोक नहीं सकती
अश्रु न जमीं पर गिरने दूंगी
सखी अकेले न तुमको रहने दूंगी...

झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव  
--

6 comments:

  1. बहुत सुंदर मंच, विभिन्न विषयों का संगम।
    प्रणाम।

    ReplyDelete
  2. सुन्दर प्रस्तुति। आभार आदरणीय बेवकूफ 'उलूक' की बकबक को जगह देने के लिये।

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर संकलन

    ReplyDelete
  4. बदलते माहौल में कई बार छोटी-छोटी बातें भी बड़ी प्रेरक सी बन जाती हैं। मेरा ब्लॉग कुछ यादों को सहेजने का ही जतन है। अन्य चीजों को भी साझा करता हूं। समय मिलने पर नजर डालिएगा
    Hindi Aajkal

    ReplyDelete
  5. बेहतरीन रचनाओं के लिंक्स का सराहनीय संकलन । आभार ।

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर प्रस्तुति

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।