आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है
एक छन्दमय आयोजन चल रहा है ओपन बुक्स ऑनलाइन पर. शुक्रवार इस आयोजन का अंतिम दिन है चित्र देखिए, छंद लिखिए और भाग लीजिए प्रतियोगिता में. आज की चर्चा
गद्य रचनाएं
पद्य रचनाएं
- वर्तमान अतीत बन गए - गजल कह रहे हैं डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी.
- हौंसले जब जवान होते हैं - गजल कह रही हैं रजनी मल्होत्रा जी.
- रिश्वतखोरी बनी हुई है अमरबेल -- देखिए ब्लॉग बेसुरम पर.
- पत्थर और आदमी में फर्क नजर नहीं आता परमजीत सिंह बाली जी को.
- महेश्वरी कनेरी जी कहना है अब भी एक चिंगारी दबा रखी है मैंने...
- बया की सुंदर तस्वीरों के साथ पढ़िए अनुपमा त्रिपाठी जी की कविता लो फिर आई है चिड़िया...
- आत्म मंथन हो रहा है अनुपमा पाठक जी के ब्लॉग अनुशील पर.
- सुनहरी धुप, बाल सुखाती सुन्दरी -- क्या मंजर होगा पढ़िए राजेन्द्र तेला निरंतर जी की कविता उनकी खूबसूरती में.
- चाँद और कवि में गहरा रिश्ता है , दीपक चौबे जी को भी कुछ कह रहा हैं चाँद.
- त्रिवेणी ब्लॉग पर है हरदीप संधू जी जापानी विधा चोका में लिखी गई रचना तेरी ख्बाहिश.
- अल्का सैनी जी का मानना है अस्तिवहीन हो गया है आम आदमी.
- नवगीत की पाठशाला पर है परमेश्वर फुंकवाल का गीत किरणों की अगाध नदी.
- वर्ज्य नारी स्वर ब्लॉग पर है कविता - मैं लिखना चाहती हूँ समीक्षा.
- तस्वीरों और शब्दों का अनूठा सांमजस्य ब्लॉग हिंदी हाइगा पर.
बाल रचनाएं
आज की चर्चा में गद्य और पद्य का मणिकांचन संयोग बहुत बढ़िया रहा!
ReplyDeleteदिलबाग जी आभार मेरी रचना को चर्चा मंच पर लेने के लिए ...!!
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लिंक्स हैं आज ...!!
अच्छी चर्चा है। कई लिंक मिल गए, आभार।
ReplyDeleteसुन्दर और पठनीय सूत्र
ReplyDeleteNice .
ReplyDeleteअमेरिका और यूरोप में क्या
होता है औरत के साथ घर से बाहर , कार्यस्थल पर ही , देखिए :
कार्यस्थल
पर बेलगाम यौन शोषण
http://auratkihaqiqat.blogspot.com/2011/03/women-in-society-word-gift-for.html
न्यूयार्क। कार्यस्थल पर महिला कर्मियों का यौन शोषण रोकने के लिए चाहे
कितने ही कानून बन जाएं लेकिन इस पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है।
अमर उजाला 12 अगस्त, 2010
बहुत सुंदर पाठनीय सूत्र.....
ReplyDeletewelcome to new post...वाह रे मंहगाई
आदरणीय दिलबाग "विर्क" जी , चर्चा मंच पर ओ बी ओ "चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता की चर्चा करने हेतु आभार, इस त्रिदिवसीय प्रतियोगिता का आज दूसरा दिन है कल यानी तीसरे दिन रात्रि १२.०० बजते इस कार्यक्रम का समापन कर दिया जायेगा, तत्पश्चात प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार विजेताओं को क्रमश: रु १००१, ५०१, व् २५१ का नगद पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा प्रदान किया जायेगा |
ReplyDeleteएक बार चर्चा मंच को पुनः आभार |
Sundar Prastuti !
ReplyDeleteसुसज्जित चर्चा...पठनीय लिंक्स,आभार!
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लिंक्स से सजी चर्चा प्रस्तुति के लिए आभार!
ReplyDeleteअंग पीतवसन, बांसुरी कर,
ReplyDeleteकंठ माला और मुकुट सर,
कान्हा को गोद धर,
बैठकर दुपहिये पर,
जा रहे वसु-देबकी,
नन्द-जसोदा के घर !
छुट्टियां ख़त्म हुई बांसुरी वाल की,
मिलकर बोलो, जय नन्द लाल की !
बहुत ही अच्छे लिंक्स का चयन किया है आपने ।
ReplyDeleteसुन्दर व रोचक चर्चा।
ReplyDeleteबहुत बढ़िया चर्चा दिलबाग जी ...हार्दिक बधाई ..:)
ReplyDeleteमेरी पोस्ट की चर्चा करने व ढेर सारे बढ़िया लिंक्स देने के लिए आभार दिलबाग विर्क जी...
ReplyDeleteसुन्दर चर्चा!
ReplyDeletebloggers ke liye charchaa manch
ReplyDeletekisi gaanv ke chaupaal se kam nahee hai,
har din binaa yahaan aaye kaam nahee chaltaa
बहुत अच्छे लिक्स है.. मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार...
ReplyDeletebahut achchhe links se saji hai aaj ki charcha .badhai
ReplyDeleteबढिया चर्चा।
ReplyDeleteअच्छे लिंक्स।
उम्दा सूत्रों का बेहतरीन समायोजन । आभार ।
ReplyDeleteपरीक्षाओं के चलते अन्तर्जाल की दुनिया से कट गया था.. यहाँ वापस आया तो देखा.. बेहतरीन सामग्री पड़ी है.. यात्राओं को विशेष रूप से पढ़ा.. यात्रायें भविष्य दिखाती है.. क्या पता हम भी सफर पे निकल पड़े.. :)
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