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Sunday, January 15, 2012

चर्चा मंच ७५९ :मेरी पहली लिखाई

चर्चा शुरू करने से पहले सबको मेरा प्रणाम!
       जैसा की आप सब ने अवलोकन किया होगा मै हर सप्ताह एक नए ब्लॉगर को को यहाँ मंच देता हूँ तो इस कड़ी में एक नए भाई आये हैं दीपांशु जी  की मेरी पहली लिखाई  से चर्चा शुरू करूँगा उसके बाद  फतवा जारी कर रहा हूँ की सब चर्चा मंच में अपने  पन्ने अतीत के पढ़ने क लिए इस मंच पे आये क्योकि यहाँ  एक नयी शिक्षा मुफ्त है   सेकुलर या "शेखू"लर   की और इसके द्वारा आप जानेंगे की कैसे  जनता एक बार फिर गिलाफ में गुस गयी  और क्यों नहीं  देखी मुसलमानों की हेकड़ी ??  क्यों  दवे जी ने कहा की मेरा बाप चोर है. और क्यों  सुब्रमण्यम स्‍वामी जी की कुछ यादें     क़यामत ला रही है इस शून्यता के माहौल में ?? और यही आप जानेंगे की कैसे कही  रघुबीरजी की कथा एक सिरफिरे  ने,

11 comments:

  1. बहुत कम पर अच्छी लिंक्स|मकरसंक्रांति पर हार्दिक शुभकामनाएं |
    आशा

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  2. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  3. पावन पर्व 'मकर संक्रांति ' की शुभकामनायें..
    चर्चा छोटी है ..पर असरदार है.
    kalamdaan.blogspot.com

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  4. waow....प्रशंसा करने के लिए आभार.....
    मुझे तो पता ही नहीं का मेरी त्रुटी युक्त रचनाओं की भी कोई प्रशंसा कर सकता है...
    :)

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  5. बढिया लिंक्‍स।

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  6. क्या कहूं
    मुझे लगता है कि मंच पर साप्ताहित अवकाश शुरू होना चाहिए। संडे से बेहतर भला क्या होगा।

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  7. कभी-कभी संक्षिप्त चर्चा भी अच्छी लगती है!
    मगर जो भी लिंक आज की चर्चा में हैं अच्छे हैं।

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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