समर्थक

Monday, January 09, 2012

कपड़े ऐसे पहनते, बाहर झांके अंग (सोमवारीय चर्चामंच-753)

दोस्तों! आज हमारे यहां बिजली ओर नेट दोनों समस्या कर रहे हैं इसलिए जल्दी-जल्दी में जो चर्चा बन पड़ी पेश है उसका
लिंक नं. 1- 
दिलबाग की कुण्डलियां बेसुरम ब्लॉग पर

कपड़े ऐसे पहनते, बाहर झांके अंग।
कैसे आज रिवाज हैं, कैसा है ये ढंग।।

_______________
2-
_______________
3-
_______________
4-
File:African elephant warning raised trunk.jpg
_______________
5-
मेरा फोटो
_______________
6-
शाश्वत शिल्प-ग़ज़ल
My Photo
_______________
7-
My Photo
_______________
8-
My Photo
_______________
9-
My Photo
_______________
10-
मेरा फोटो
_______________
11-
मेरा फोटो
_______________
12-

निरामिष 
अन्न / फल / फूल / कंद / मूल आदि पर आधारित आहार , और चल प्राणियों से प्राप्त आहारों में मूल फर्क क्या है?
निरामिष
_______________
13-
पुरवा बयार कभी अकेले नहीं आती है
यादों का पुलिंदा साथ उड़ा लाती है
My Photo
_______________
14-
_______________
21-
________________
और अन्त में
22-
जब भी ये कलियाँ फूल बनी
(यह श्रृंगारपरक गीत आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत है उम्मीद है आप सब इसका भरपूर आनन्द लेंगे और इस गीत के बावत हमें ज़ुरूर बताएंगे)
मेरा फोटो
________________
आज के लिए इतना ही, फिर मिलने तक नमस्कार!

24 comments:

  1. वाह भई ग़ाफ़िल जी बल्ले बल्ले

    ReplyDelete
  2. सुन्दर चर्चायों ...
    kalamdaan.blogspot.com

    ReplyDelete
  3. subah subah bahut sundar rang birangi charcha achche links ke saath padhne ko mili.meri rachna ko shaamil karne ke liye bahut aabhar.

    ReplyDelete
  4. सुन्दर चर्चा.....आभार!

    ReplyDelete
  5. चन्द्र भूषण जी नें शानदार सोम सजाया है।

    बहुत ही श्रेष्ठ है आज की चर्चा और कडियाँ।

    निरामिष के आलेख को चर्चा में स्थान देने के लिए आभार!!

    ReplyDelete
  6. बहुत ही बढि़या चर्चा आभार ।

    ReplyDelete
  7. बढिया चर्चा।
    बेहतर लिंक्‍स।

    ReplyDelete
  8. सुंदर चित्रमय प्रस्तुति
    कुंडलियाँ शामिल करने के लिए आभार

    ReplyDelete
  9. बहुरंगी लिंक्स से सजी चर्चा से सजी रचना |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    बधाई |
    आशा

    ReplyDelete
  10. Prichayaatamk Photo ke saath itne saare sundar link mile ..abhibhut hun Charcha se .. bahut sundar charcha..

    ReplyDelete
  11. सुंदर, सुसज्जित चर्चा।
    आाभार।

    ReplyDelete
  12. blog jagat se jude sabhi vyaktiyon ko berozgaari vs rozgaari aur us par berozgaari ki supremacy batane ke liye....

    abhaar :)

    naaz

    ReplyDelete
  13. अच्छे लिंक्स से सजी चर्चा.

    ReplyDelete
  14. badiya shringar karati charcha prastuti hetu aabhar!

    ReplyDelete
  15. वाह बहुत सुन्दर चर्चा।

    ReplyDelete
  16. चर्चा मंच पर पहली बार आया हूँ सरे लिंक बेमिसाल हैं ...........

    ReplyDelete
  17. चर्चा मंच पर पहली बार आया हूँ सारे लिंक बेमिसाल हैं ...........

    ReplyDelete
  18. सुन्दर चर्चा, सुन्दर सूत्र।

    ReplyDelete
  19. बेहतरीन चर्चा । आभार गाफिल जी ।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin