जैसा की आप सब ने अवलोकन किया होगा मै हर सप्ताह एक नए ब्लॉगर को को यहाँ मंच देता हूँ तो इस कड़ी में एक नए भाई आये हैं दीपांशु जी की मेरी पहली लिखाई से चर्चा शुरू करूँगा उसके बाद फतवा जारी कर रहा हूँ की सब चर्चा मंच में अपने पन्ने अतीत के पढ़ने क लिए इस मंच पे आये क्योकि यहाँ एक नयी शिक्षा मुफ्त है सेकुलर या "शेखू"लर की और इसके द्वारा आप जानेंगे की कैसे जनता एक बार फिर गिलाफ में गुस गयी और क्यों नहीं देखी मुसलमानों की हेकड़ी ?? क्यों दवे जी ने कहा की मेरा बाप चोर है. और क्यों सुब्रमण्यम स्वामी जी की कुछ यादें क़यामत ला रही है इस शून्यता के माहौल में ?? और यही आप जानेंगे की कैसे कही रघुबीरजी की कथा एक सिरफिरे ने,
| सूचना:- इस सामूहिक ब्लॉग पर पोस्ट लगाने से पूर्व यह देख लें कि एडिट बॉक्स में आपके समय पर किसी अन्य चर्चाकार की महत्वपूर्ण चर्चा तो शैड्यूल नही है! आपके साथी चर्चाकार की पोस्टकम से कम 12 घण्टे तो चर्चा मंच के शीर्ष पटल पर चमकनी ही चाहिए! |
| सोमवार- श्रीमती सरिता भाटिया, मंगलवार-श्रीमती राजेश कुमारी, बुधवार- शशि पुरवार जी, बृहस्पतिवार-श्री दिलबाग विर्क, शुक्रवार-श्री दिनेश गुप्ता "रविकर", शनिवार-श्रीमती वन्दना गुप्ता, रविवार- श्री अरुण शर्मा अनन्त, श्रीमती सरिता भाटिया चर्चा मंच की सोमवार की चर्चाकार होंगी! शशि पुरवार जी चर्चा मंच की बुधवार की चर्चाकार होंगी! चर्चा मंच परिवार आपका स्वागत और अभिनन्दन करता है। मैं (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') स्थानापन्न चर्चाकार के रूप में चर्चा मंच की सेवा करता ही रहूँगा। |
ओपन बुक्स ऑन-लाइन को सुझाव
ओ.बी.ओ. के संचालक मण्डल से निवेदन है कि उस मर्यादा को हटा दें, जिसमें आपने प्रतिबन्ध लगाया हुआ है कि ओबीओ में अप्रकाशित रचना ही प्रकाशित होगी! मेरा तर्क यह है कि 1- जो व्यक्ति अपना ब्लॉग चलाता है वह तो सर्वप्रथम अपनी रचना को अपने ब्लॉग पर ही लगाना चाहेगा। 2- यदि वह ओ.बी.ओ.पर अपनी रचना सबसे पहले लगा दे और उसके बाद अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर दे तो इससे ओ.बी.ओ.पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला है । मेरी समझ में अब तक यह विज्ञान और तर्क नही समा सका है। अगर मेरी बात से संचालक मण्डल को ठेस लगी हो तो क्षमा चाहता हूँ। मगर इतना निवेदन जरूर है कि मेरे सुझावों पर विचार जरूर किया जाये...धन्यवाद! |
| चर्चाकार मित्रों! मेरा एक सुझाव है कि “चर्चा मंच” के मार्डरेटर आदरणीय डॉ,रूपचन्द्र शास्त्री‘मयंक’ जी अब एक भी दिन चर्चा नहीं कर रहे हैं। वे केवल अब स्थानापन्न चर्चा ही करेंगे, तो क्यों न उनको यह सहमति दी जाए कि वे किसी भी चर्चाकार की चर्चा के अन्त में अपनी पसंद के दो लिंक दिया करें। अतः हम लोग अन्त में“मयंक का कोना”शीर्षक भर कर छोड़ दिया करें। मेरा सुझाव अच्छा लगे तो आप भी करके देखिए न! "दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर" गुरूजी से आग्रह- |
Sunday, January 15, 2012
चर्चा मंच ७५९ :मेरी पहली लिखाई
जैसा की आप सब ने अवलोकन किया होगा मै हर सप्ताह एक नए ब्लॉगर को को यहाँ मंच देता हूँ तो इस कड़ी में एक नए भाई आये हैं दीपांशु जी की मेरी पहली लिखाई से चर्चा शुरू करूँगा उसके बाद फतवा जारी कर रहा हूँ की सब चर्चा मंच में अपने पन्ने अतीत के पढ़ने क लिए इस मंच पे आये क्योकि यहाँ एक नयी शिक्षा मुफ्त है सेकुलर या "शेखू"लर की और इसके द्वारा आप जानेंगे की कैसे जनता एक बार फिर गिलाफ में गुस गयी और क्यों नहीं देखी मुसलमानों की हेकड़ी ?? क्यों दवे जी ने कहा की मेरा बाप चोर है. और क्यों सुब्रमण्यम स्वामी जी की कुछ यादें क़यामत ला रही है इस शून्यता के माहौल में ?? और यही आप जानेंगे की कैसे कही रघुबीरजी की कथा एक सिरफिरे ने,
पर....... चर्चा है कहां????????
ReplyDeleteनया अंदाज!
ReplyDeleteबहुत कम पर अच्छी लिंक्स|मकरसंक्रांति पर हार्दिक शुभकामनाएं |
ReplyDeleteआशा
बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं...
पावन पर्व 'मकर संक्रांति ' की शुभकामनायें..
ReplyDeleteचर्चा छोटी है ..पर असरदार है.
kalamdaan.blogspot.com
waow....प्रशंसा करने के लिए आभार.....
ReplyDeleteमुझे तो पता ही नहीं का मेरी त्रुटी युक्त रचनाओं की भी कोई प्रशंसा कर सकता है...
:)
महीन चर्चा ☺☺
ReplyDeleteबढिया लिंक्स।
ReplyDeleteक्या कहूं
ReplyDeleteमुझे लगता है कि मंच पर साप्ताहित अवकाश शुरू होना चाहिए। संडे से बेहतर भला क्या होगा।
कभी-कभी संक्षिप्त चर्चा भी अच्छी लगती है!
ReplyDeleteमगर जो भी लिंक आज की चर्चा में हैं अच्छे हैं।
बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं...
:):)
ReplyDelete(:(:
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Welcome.