चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, May 15, 2012

"मैं ख्यालों की एक बूंद" (चर्चा मंच-880)


राजेश कुमारी की आप सभी को नमस्कार!
आप सब का दिन मंगलमय हो!
देखिये आप ही के बगीचे के फूल तोड़ कर लाई हूँ-
 
posted by डॉ॰ मोनिका शर्मा at परवाज़...शब्दों के पंख
सच माँ सरल नहीं है तुझसा हो जाना समेटना स्वयं को एक नियत परिधि में यूँ और दहलीज़ के भीतरी संसार में खो जाना सात्विक सोच लिए कर्म की क्यारी में नित नए संस्कार बोते हुए सींचना परम्पराओं को बनकर धुर...
posted by Blog ki khabren at Blog News
डा. टी. एस. दराल जी की पोस्ट, बीमारी और इलाज के बारे में प्रामाणिक जानकारी देते हुए. ज़रा संभल के --- स्वास्थ्य के मामले में चमत्कार नहीं होते . शायद हमारा देश ही एक ऐसा देश होगा जहाँ रोगों का इलाज करने के...
 
posted by Blog ki khabren at Blog News
देखिए डा. अरविंद मिश्रा जी की एक अच्छी पोस्ट. शुक्रिया ब्लॉग जगत.....पहले की तुलना में अब ब्लॉग जगत उतना स्पंदित और जीवंत नहीं रहा ....हमने शायद समय के पहले ही इसका भरपूर उपयोग दुरूपयोग कर लिया है ....लोग ...
https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6500475970615720002-2606815136303998368?l=ashaj45.blogspot.com
posted by आशा जोगळेकर at स्व प्न रं जि ता - 1 hour ago
सफर से पूरा थक कर कल रात घर पे आकर लेटा जो बिस्तर पर दबे पांव कमरे में दाखिल हुई थीं तुम माँ । मेरी आँखों से चश्मा हटा कर किताब रख मेज पर ओढना ओढा कर बालों में हाथ फेर निहारती रही थीं तुम माँ। उस स्पर्श...
https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7292513918260012791-8405747173950689258?l=neemnimbouri.blogspot.com
posted by रविकर फैजाबादी at नीम-निम्बौरी
मंहगाई से त्रस्त जन, असफल सब तद्-बीज । गुणवत्ता उत्कृष्टता, मांगें मंदी चीज । मांगें मंदी चीज, इधर दुनिया में मंदी । अर्थव्यवस्था बैठ, होय छटनी सह बंदी । रविकर कैसा न्याय, एक को मंदी खाई । निन्यान्नबे हलका...
 
posted by kanu..... at parwaz परवाज़....
अकेलेपन का ज़हर सबसे जबरजस्त ज़हर होता है और इसके नशे से ज्यादा गज़ब का नशा भी और कोई नहीं होता ...लड़की हमेशा से इस ज़हर से बचना चाहती थी जब भी अकेली होती थी उसे लगता था खो जाएगी कही खुद में....
posted by शिखा कौशिक at भारतीय नारी
*मेरी बहन बहन ...तेरी बहन प्रेमिका !!!* [google se sabhar ] * * *लड़का लड़की ने मिलकर सोचा * *''प्रेम ही सब कुछ है ''* *हम दोनों एक दूजे के * *बिना मर जायेंगे !* *माता -पिता बहन-भाई * *ये सब क्या.
 
posted by AlbelaKhatri.com at Albelakhatri.com
सूरत: बीती रात सुरती रसियाओं के लिए ठहाके और मस्ती लेकर आई और चौपाटी स्थित तारामोती हाल में हँसी के फूल
https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2911361780403920194-6146952543103325066?l=zealzen.blogspot.com
posted by ZEAL at ZEAL 
कुछ बातें सिलसिलेवार--- १- भगवा वस्त्रों के साथ मुल्ली-टोपी और पोप की टोपी, कैप और हैट और पगड़ी जंचती नहीं। २- सत्यवादियों और स्पष्टवादियों को राजनीति और कूटनीति की बैसाखी की ज़रुरत नहीं होती। ३- आरक्षण एक...
 
posted by संगीता स्वरुप ( गीत ) at बिखरे मोती
माँ का आँचल आज भी लहराता सुखद यादें । ****************** मीठी निबौरी माँ की फटकार गुणी औषध । ************** माँ का लगाया काजल का दिठौना याद है मुझे ***************** राह तकते ...
दिल से ........ हमेशा सुनती आई हूँ के बेटियों को लोग नहीं चाहते ,उन्हें कोख में ही मार देने के प्रयास किये जाते है पर इस मामले में मैं खुशकिस्मतों हूँ ,मुझ से बड़े मेरे दो भाई थे और मेरी मम्मी की इच्छा...
 
posted by उपासना सियाग at nayee udaan 
प्यार और वक्त का बहुत गहरा रिश्ता होता है . अगर किसी से प्यार हो तो इज़हार करने में वक्त ना लगाओ , इस वक्त का क्या , यह कल रहे ना रहे .... पर ये प्यार कभी मरता भी नहीं कभी . किसी का भी प्यार वक्त का... 
 
posted by अख़तर क़िदवाई at हरफ़े अख़तर - 16 hours ago
जाम बकफ हो नग़मासारा हो - मौसम का कुछ हक़ तो अदा हो अब सहरा हो अब दरिया हो -प्यास हो अमृत हो तुम क्या हो ? दर्द की लाख दवाएं देखीं बेदर्दी की कोई दवा हो अपनी मेहनत पूरी करना आगे भाग में ...
 
*हकीकत है ये -- कोई कहानी नहीं....* *(नायिका ---सौम्या... नायक ---- प्रथमेश.. ----समीर -----निहालिका..... फिर से एक कोशिश कि है कहानी लिखने कि..कैसी है बताइये जरूर...:-)...)* एक सुन्दर सी पर थोड़ी चुप स...
 
posted by Sawai Singh Rajpurohit at AAJ KA AGRA 
*माँ के बारे में जितना भी कहा जाए कम है! माँ हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और माँ और पिताजी दोनों ही हमारे लिए भगवान का रूप हैं! उन्हीं की वजह से हम इस दुनिया में कदम रखें हैं और**जब भी मैं तन्ह...
 
posted by रश्मि प्रभा... at मेरी भावनायें... 
*मैं ख्यालों की एक बूंद * *सूरज की बाहों में कैद * *आकाश तक जाती हूँ * *बादलों के सीने में छुपकर * *धरती की रगों तक बहती हूँ * *कभी फूल, कभी वृक्ष में सौन्दर्य * *कभी गेहूं - कभी धान में समाकर * *गरीबों की...
https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1268366363589230515-8804750746637031994?l=teekheekalamse.blogspot.com
posted by Naveen Mani Tripathi at तीखी कलम से
भ्रष्टाचार के निमित्त कुछ छंद गाँधी तेरे देश में विडम्बना का हाल ये है ,भ्रष्टता परंपरा की रीत बन जाएगी |. आधी अर्थ शक्ति तो विदेशियों के हाथ में है ,उग्रता तो ज...
https://blogger.googleusercontent.com/tracker/896228216551456906-2700701788240404056?l=cbmghafil.blogspot.com
posted by चन्द्र भूषण मिश्र ग़ाफ़िल’ at ग़ाफ़िल की अमानत -
1- नारी संग से क्यों डरे, नारी सुख कर धाम। नारी बिन रघुपतिहुँ कर, होत अधूरा नाम।। होत अधूरा नाम, कहन मां नाहिं सुहायी, नारी नर-मन-कलुस पलक मह दूर भगाई, खिला पुष्प बिन ना सुहाइ जइसै फुलवारी, ग़ाफ़िल मन बगिया...
https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6648373794289848095-1563569135711678717?l=p-nama.blogspot.com
posted by sangita at panchnama 
* माँ तुझे सलाम * *१ ). शरद सी शुभ चंद्रिका शुभ्र ज्योत्त्सना ममतामयी::::::::::::* *निरभ्र व्योम सी शांत ,हे माँ सदा ही पूजानीय :::::::::::* *पुष्प के पराग...
 
जीवहत्या क्यों ?( हाइकु ) -कस्तूरी होती अपने ही भीतर ढूंढें बाहर । जीवन देना जब वश में नहीं जीवहत्या क्यों ? मेहनत को मानते कर्मशील अन्य भाग्य को । अहमियत हार-जीत की नहीं को...
जब से पत्थर इतने रंगीले हो गए  - आईनों के चेहरे पीले हो गए जब से पत्थर इतने रंगीले हो गए . *आईना [image: image] * *टूटकर बिखर जाता है * *जब भी खुद को * *आईने के सामने पाता है *
posted by डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) at उच्चारण
*चित्र बोलते हैं!* *(१)* *(२)* *(३)* *(४)
posted by सतीश सक्सेना at मेरे गीत ! 
 *ब्लॉग जगत में, कई बार हम लोग, रचनाओं में निज दर्द उड़ेल देते हैं , जो बात अक्सर बोल नहीं पाते वह उनकी कलम , लिख देती है ! ऐसी रचनाओं पर टिप्पणी देते समय समझ नहीं आता कि क्या सलाह दी जाए , पति पत्नी के...
posted by Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार atशस्वरं 
आज एक नज़्म प्रस्तुत है कुछ बड़ी है*…* कृपया, धैर्य से पढ़लें! इसमें आपके भी मन के भाव संभव हैं *गुज़रे वक़्त के ख़त* *(यादों का क़ासिद = यादों का डाकिया)*** *इक रात को यादों के क़ासिद ने कुंडा दिल का ख...
posted by महेन्द्र श्रीवास्तव at रोजनामचा...
*गांव गया था गांव से भागा * गांव गया था गांव से भागा रामराज का हाल देखकर पंचायत की चाल देखकर आंगन में दीवाल देखकर सिर पर आती डाल देखकर नदी का पानी लाल देखकर और आंख में बाल देखकर गांव गया था गांव से भागा। ...
और अंत में आपको एक छोटी सी आज के सच को दर्पण दिखाती हुई अपनी एक लघु कथा सुनाती हूँ (जो एक वास्तविकता है पर कहानी के रूप में पेश कर रही हूँ )
https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2084151036771854001-749820917737963947?l=hindikavitayenaapkevichaar.blogspot.com
posted by Rajesh Kumari at HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR -
*साहब मेरी बेटी कहाँ है
हरिया ने हाथ जोड़कर स्थानीय थाने में बैठे दरोगा से गिड़ गिडाते हुए पूछा अब होश आया तुझे दो दिन हो गये तेरी बेटी को नहर से निकाला था,हाँ आत्महत्या से पहले तेरे पास भी तो आई थी...
और इसी के साथ विदा लेती हूँ फिर मिलूंगी अगले मंगल वार को इसी जगह और नए सूत्रों के साथ शुभ विदा

31 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति |
    आभार ||

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  2. लिंक्स बहुत अच्छे हैं।

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  3. बढ़िया विस्तृत चर्चा है राजेश जी...कुछ लिंक्स देखे हैं...............
    बाकी अब देखती हूँ..

    आपका शुक्रिया.

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  4. बहुत सुन्दर लिंक्स के साथ सार्थक चर्चा प्रस्तुति
    आभार!

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  5. Thanks mam ,for providing great links...

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  6. Nice .

    आभार ||

    Please see

    दशक का ब्लॉगर, एक और गड़बड़झाला
    http://blogkikhabren.blogspot.in/2012/05/blog-post_14.html

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  7. बड़ी विस्तृत और रोचक चर्चा।

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  8. बहुत बढ़िया ...श्रमसाध्य चर्चा..... शामिल करने का आभार

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  9. सुन्दर प्रस्तुति | आभार ||

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  10. सुन्दर चर्चा! सुन्दर प्रस्तुति!

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  11. "माँ की गोद में सर रखने जैसा सुकून और कहीं नहीं... सवाई " पोस्ट को स्थान देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया और आभार...

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  12. सुन्दर प्रस्तुति |

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  13. rajesh kumariji,bahut hi khoobsurat tarike se sajaya hai aapne yah charcha manch,badhaai

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  14. sabhi links dekhe..
    bahut hi behtarin links..
    behtarin charcha manch:-)

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  15. बहुत सुंदर प्रस्तुति .... आभार

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  16. बहुत सुंदर चर्चा
    शायद आपकी पहली चर्चा है,
    आपको बहुत बहुत बधाई

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  17. उत्साह वर्धन के लिए आप सभी का हार्दिक आभार

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  18. सुन्दर चर्चा.

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  19. बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  20. अच्छे लिंकों के साथ बहुत सुन्दर चर्चा!
    आभार!

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  21. acchi chuninda links aanan aa gaya..sadar badhayee...

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  22. सुंदर लिंक्स चयन ...!!
    शुभकामनायें..!

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  23. भरपूर रंगों के साथ चर्चा, अच्छी रही ....
    अच्छे लिनक्स , अभी पढ़ रहा हूँ ! आभार आपका !

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  24. बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स संयोजित किये हैं आपने ..आभार ।

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  25. बहुत अच्छी लगी चर्चा .......धन्यवाद

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  26. badhiya link sanyojan....sundar
    http://jadibutishop.blogspot.com

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  27. राजेश कुमारी जी ने मंगलवारीय चर्चा को सार्थकता से प्रस्तुत किया
    आभार

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  28. बहुत सुंदर सार्थक चर्चा प्रस्तुति के लिए बधाई,.....

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,

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  29. देर से आने के लिये माफी चाहती हूँ । इस सुंदर चर्चा में मेरी रचना शामिल करने का बहुत आभार ।

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