चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Monday, September 07, 2015

"देश ने इतना नकारात्मक और विनाशकारी विपक्ष पहली बार देखा है" (चर्चा अंक 2091)

जय मां हाटेश्वरी...
अफसोस मेरे भारत का पार्थ अभी तक सोता है
आज चंद्र की शीतलता आक्रांत हुई है।
किरणें रवि की भी अब शांत हुई है
मौन हवाएं भी मृत्यु को आमंत्रण देती
पाषाणी दीवारे भी अब नहीं नियंत्रण करती
शब्दकार भी आज अर्थ में खोता है
अफसोस मेरे भारत का पार्थ अभी तक सोता है
हम भूल गये सांगा के अस्सी घावों को
भुला दिया हमने अपने पौरुष भावों को
दिनकर की हुंकार विलुप्त हुई अम्बर में
सीता लज्जित आज खड़ी है स्वयंवर में
राम-कृष्ण की कर्मभूमि में क्रन्दन होता है
    अफसोस मेरे भारत का पार्थ अभी तक सोता है
बौनी हो गई परम्परायें आज धरा की
लुप्त हो गयीं मर्यादाएं आज धरा की
मौन हो गयी जहां प्रेम की भी शहनाई
बेवशता को देख वेदना भी मुस्काई
रोटी को मोहताज वही जिसने खेतों को जोता है
अफसोस मेरे भारत का पार्थ अभी तक सोता है
अब सत्ता के द्वारे दस्तक नहीं बजेगी
कदम-कदम पर अब क्रांति की तेग चलेगी
निर्धन के आंसू अगर अंगार बन गये
महलों की खुशियां भी उसके साथ जलेगी
देख दशा त्रिपुरारी का नृत्य तांडव होता हैअफसोस मेरे भारत का पार्थ अभी तक सोता है
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अब देखिये...आज की चर्चा के लिये...मेरी पसंद के कुछ लिंक...
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यूं   न  कीजे   निबाह    यारों  से
दोस्ती   में     दरार      आ  जाए
शाह की  तो नीयत  नहीं  दिखती
अर्श   से      रोज़गार     आ  जाए
हाथ  सर  पर  रखा  करें  मुहसिन
मुश्किलों    में    उतार   आ   जाए
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प्रदेश पूरी तरह बिहार नहीं है। यहाँ की सामाजिक ज़मीन दो नहीं साढ़े तीन खेमों में बँटी है। यों भी देश में भविष्य की राजनीति अनिवार्य रूप से जाति केंद्रित
नहीं है। राजनीतिक संरचनाएं जातीय क्षत्रपों के इर्द-गिर्द स्थापित हुईं हैं और उनके पाला बदलते ही स्थितियाँ और सिद्धांत बदल जाते हैं। कैसे मान लें कि भविष्य
में पाले बदले नहीं जाएंगे? ये चुनाव-केंद्रित पार्टियाँ हैं और सत्ता के शेयर पर जीवित रहती हैं। पहले बिहार में जीतने तो दीजिए। 
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और खिड़की की तरफ इशारा कर कहा ,''मम्मी वह देखो '' खिड़की की तरफ देखते ही मेरे पाँव तले जमीन ही खिसक गई ,वहाँ ,सफेद कपड़ों में और सफेद पगड़ी पहने एक हट्टा
कट्टा आदमी लटक रहा था ,उस समय गाड़ी इतनी तेज़ गति से चल रही थी कि अगर वह गिर जाता तो मालूम नही उसका क्या हाल होता । भगवान् का लाख लाख शुक्र है कि मैने
तब अपने कानो में बालियाँ याँ कोई अन्य जेवर नही पहन रखे थे ,नही तो वह आदमी मेरे कानो से बालियाँ खीच कर ले जाता और मुझे चोट लगती वह अलग ,मेरे देखते ही देखते
वह वहां से गायब हो गया । मेने तब पूरे डिब्बे का चक्कर लगाया और सबको अपनी आपबीती सुनाई ,जिस किसी की भी खिडकी खुली थी वह बंद करवाई ताकि किसी के साथ कोई हादसा
न होने पाए । उसके बाद मैने पूरा डिब्बा छान मारा लेकिन मुझे कहीं भी टी टी दिखाई नही दिया ,परन्तु उसके बाद उस डिब्बे में बैठे सभी यात्री सतर्क हो गए । इस
घटना से मुझे जिंदगी भर के लिए एक सबक मिल गया ,उसके बाद मै सफर के दौरान कभी भी किसी तरह का कोई भी जेवर नही पहनती ।

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गीता है ज्ञान, शिष्य है अर्जुन
कृष्ण बना शिक्षक महान
करते वन्दन कृष्ण व राधा को
राधाकृष्ण है भारत की शान |
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शोध करने करवाने का
ईनाम मंगवा रहा है
यू जी सी के ठेंगे से
ठेंगा मिला रहा है
सातवें वेतन आयोग
के आने के दिन
गिनता जा रहा है
पैंसठ की सत्तर हो
जाये अवकाश की उम्र
गणेश जी को पाव
लड्डू खिला रहा है
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मुझे उनका यह सन्देश जीवन सहजता से जिए जाने वाला भाव लगता है । जो ना केवल हमारी बल्कि हमसे जुड़े अन्य लोगों की ज़िन्दगी पर भी सदैव सकारात्मक असर ही डालता
है । देश दुनिया का भी इस सोच में भला ही है ।  आज जबकि हिंसा और असहिष्णुता हर  ओर दिखती है कर्म का  सिद्धांत संभवतः हर समस्या का हल है । इन्हीं आम जीवन
से जुड़े विचारों की वजह कृष्ण ईश्वरीय रूप में भी आम इंसानों से जुड़े से दीखते हैं । मनुष्यों  ही नहीं संसार के समस्त  प्राणियों के लिए उनका एकात्मभाव देखते
ही बनता है।
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   हे कृष्ण, आज कलयुग के लोग कहते है कि आपका व्दापर युग आज से बहुत बेहतर था. तब के लोगों की सोच बहुत अच्छी थी! फिर आपने ये कैसी मिसाल कायम की प्रभु?
आज कलयुग में भी ऐसी कई माताएं है, जो अपने सौतेले बच्चों को अपने स्वयं के बच्चों से भी ज्यादा प्यार करती है. लेकिन आप ही का अनुसरण करते हुए सौतेले बच्चे
कभी न कभी यह सवाल माँ से ज़रुर करते है कि "तुने मोहे जानो परायों जायो..."
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स्वप्न-उड़ानों हेतु तुम्हे प्रस्तुत करना था मुक्त गगन,
उड़ ना पायें पञ्छी, इस पर दाँव लगाने बैठे हैं ।
बहुधा बाधा बने राह की, अहं अधिक था, गति कम थी,
उस पर भी खुद को महती उपमान बनाने बैठे हैं ।
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• आपको गूगल प्‍ले स्‍टोर से
इंटरकॉम फॉर एंड्रॉयड
 एप्‍लीकेशन डाउनलोड करनी होगी।
• ध्‍यान दीजिये यह एप्‍लीकेशन दोनों फोन में होनी चाहिये।
• इसके बाद अापको बस दोनों मोबाइल को पेयर कीजिये। यह बहुत आसान है।
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नहीं जानना चाहा किसीने
भरत से अधिक
प्रीय थे जेसे   राम
फिर पल भर में ही
क्यों मांग लिया
 श्री राम को वनवास...
एक कहावत है-" सयाना कौआ कूड़े में चोंच मारता है। "
संक्षेप में, देश देख रहा है, 
और ये लोग समझ नहीं पा रहे है कि देश पक चुका है।....... 

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अनुशील पर अनुपमा पाठक 
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सावन बीत गया 

Akanksha पर Asha Saxena 
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ग़ज़लनुमा नज़्म "चमन का सिंगार करना चाहिए" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 


सोच में विस्तार करना चाहिए
ज़िन्दग़ी को प्यार करना चाहिए

हौसले से थाम कर पतवार को
सागरों को पार करना चाहिए... 
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धन्यवाद...

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