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Tuesday, August 22, 2017

"सभ्यता पर ज़ुल्म ढाती है सुरा" (चर्चा अंक 2704)

मित्रों!
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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अमरीका में रहना विज्ञान 

और भारत में रहना कला 

आज जुगलबंदी का विषय ’हवा’ था. हवा जब आक्सीजन सिलेंडर से हवा हो जाती है तब गोरखपुर जैसी हृदय विदारक घटना घटित होती है जिसमें ६२ बच्चे अपनी जान से हाथ धो बैठेते हैं और कारण पता चलता है कि सिलेंडर सप्लाई करने वाली कम्पनी को पेमेंट नहीं किया गया था अतः सिलेंडर भरे नहीं गये. ऐसे में जब पेमेंट के आभाव में सिलेंडर से हवा गायब हो सकती है तो हमें ही लिखने के कौन से पैसे मिले जा रहे हैं..  
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आसपास कुछ ईश्वरीय होने का अहसास 

सूक्ष्म मध्यम महत दिव्य अलौकिक 
या और भी कई प्रकार के आभास कराते 
अपने ही आसपास के कार्यकलाप... 
उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी  
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हर घर में पल रहा है इक साथी नवाब का-- 

ग़ज़ल 

मजमून ही न पढ़ पाए दिल की किताब का 
क्या फ़ायदा मिला उसे फिर आफ़ताब का... 
मधुर गुंजन पर ऋता शेखर 'मधु' 
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अब क्यों नहीं बजते 

ये फ़िल्मी गाने ? 

कुछ दशक पहले के फ़िल्मी गीतों में मनोरंजन के साथ कोई न कोई सामाजिक सन्देश भी हुआ करता था । उन गीतों के जरिए देश और समाज की बुराइयों पर और बुरे लोगों पर तीखे प्रहार भी किए जाते थे । जैसे - *दो जासूस करे महसूस कि दुनिया बड़ी खराब है , कौन है सच्चा ,कौन है झूठा , हर चेहरे पे नकाब है । ---
 *क्या मिलिए ऐसे लोगों से , जिनकी फितरत छुपी रहे , 
नकली चेहरा सामने आए , असली सूरत छिपी रहे... 
मेरे दिल की बात पर Swarajya karun 
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प्रीत की भाँवरें 

मुझ सी हठी न मिली होगी कोई 
तभी तो तुमने भी चुनी उलट राह ... 
एक प्रयास पर vandana gupta 
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रिश्ते 

देखे भीड़ में हमने बिखरते रिश्ते 
जीवन की भाग दौड़ में सिसकते रिश्ते... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
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जो अपने दिल में इन्कलाब लिए बैठा है ... 

वो रौशनी का हर हिसाब लिए बैठा है 
जो घर में अपने आफताब लिए बैठा है... 
स्वप्न मेरे ...पर Digamber Naswa 
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किताबों की दुनिया - 139 

नीरज पर नीरज गोस्वामी 
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3 comments:

  1. शुभ प्रभात..
    आभार और फिर आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. विस्तृत चर्चा आज की ...
    आभार मेरी रचना को शामिल करने का ...

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति । 'उलूक' के 'आसपास के ईश्वर' को जगह देने के लिये आभार।

    ReplyDelete

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