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Friday, August 25, 2017

"पुनः नया अध्याय" (चर्चा अंक 2707)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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ज़ुर्अत क्यूँ नहीं करते 

हमें उनसे शिक़ायत थी, शिक़ायत है, रहेगी भी 
के वे मुझसे मेरी कोई शिक़ायत क्यूँ नहीं करते 
भले घुट घुट के ही जीना पड़े पर मैं न पूछूँगा 
के मुझको अब सताने की वो ज़ुर्अत क्यूँ नहीं करते...  
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छत्तीसगढ़ के तीरथ धाम*(दोहा)
--चंदखुरी श्री राम के, ममा गाँव तो आय ।छत्तीसगढ़ म जी तभे, भाँचा पाँव पराय ।।
कुस राजा कसडोल के, त्रेता जुग के बात ।रहिस राज लव के लवन, सूर्यवंस बिख्यात ।।
सिरपुर मा मंदिर हवय,ईंटे ईंट बनाय ।जग मा अबड़ प्रसिद्ध हे, लछिमन मंदिर ताय... 

छन्द खजाना 

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मैं नटनी थी , मैं ठगनी थी , फिर भी धोखा खा गई घर से चली थी हरि ठगन को , खुद को ठगा के आ गई .
सोचा तो था नैन मिलाके , हरि को अपना बना लूंगीया थोडा सा नाच और गा के , अपना उसे बना लूंगी ठगों का ठग हंस के यूं बोला - अच्छा तो ठगनी आ गई घर से चली थी हरि ठगन को , खुद को ठगा के आ गई...

प्रदीप नील वसिष्ठ 
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गुरु 
डॉक्टर  को
उसके  गुरु
सिखाया  करते  थे-
"मौत से घृणा करो"
वे  आज
विश्वास के क़ातिल /
मौत के
सौदाग़र हो गए
पैसे के भारी
तलबग़ार हो गए। 
Ravindra Singh Yadav  
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एम एस एक्‍सेल फुल कोर्स हिंदी मेें -  

MS Excel Full Course in Hindi 

यह बहुत ही सरल और तेज है, टेबल कार्य के लिये पहले से ही सैल बने होते हैं और आप इसमें कितना भी लम्‍बा चौडा हिसाब किताब एक ही पेज पर बना सकते हो, इसलिये प्रोफेशनल काम के लिये ज्‍यादातर लोग एक्‍सल का प्रयोग करते हैं, साथ ही एक बार कोई भी फार्मूला भरने पर वह सेव हो जाता है और बार बार आप उसका प्रयोग एक कैल्‍यूलेटर की तरह कर सकते हो, लेकिन यह कैल्‍यूलेटर आपके द्वारा बनाया गया होगा, यानी एक तरह से आप के दिये गये निर्देशन में काम करेगा, जिससे आपका काम और भी सरल हो जायेगा... 
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क्षणिकाएं 

Kailash Sharma 
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मैं तो मज़दूर हूँ हर रोज़ कमाने वाला !! 

तू जहां है, वहां   मैं  कहाँ आने वाला ,मैं तो मज़दूर हूँ हर रोज़ कमाने वाला !!बलूनों की तरह हवा में न उड़ाना मुझको..तेरा ख्याल हूँ , वापस नहीं   आनेवाला... 
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अब महिला के पक्ष में वोट बैंक आएगा 

एक प्रसंग जो कभी भूलता नहीं और बार-बार उदाहरण बनकर कलम की पकड़ में आ जाता है। मेरी मित्र #sushmakumawat ने कामकाजी महिलाओं की एक कार्यशाला की, उसमें मुझे आमंत्रित किया। कार्यशाला में 100 मुस्लिम महिलाएं थी। मुझे वहाँ कुछ बोलना था, मैं समझ नहीं पा रही थी कि मैं क्या विषय लूं जो इन्हें समझ आ जाये! फिर मैंने कहा कि आज हम केवल बातचीत करते हैं और आपके जो प्रश्न हो उनको हल करने का प्रयास करते हैं। दो प्रश्न आए – पहला – तलाक-तलाक-तलाक कब तक और दूसरा बुर्का कब तक... 
smt. Ajit Gupta 
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पत्र पिया के नाम 

तुम्ही कहते थे तोता - मैना
सहजा सखाया द्वय सुपर्णा
जब से मुँह थोड़ा मोड़ा तुमने
हो गयी मैं पतझड़, अपर्णा,
मेरे मन के हर एक कोने मे
तुम ही तुम हो अब भी छाये
मन से मेरे जो उठे सब भाव
खुशबू तेरी ही उससे आये,
सारा उल्लास तुम्ही हो मेरी
तुम्ही हो मेरे मन की प्यास... 
pragyan-vigyan पर Dr.J.P.Tiwari 
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पर्दा प्रथा, 

महिलाओं पर एक अत्याचार  

आदि मानव से लेकर आधुनिक समय तक मनुष्य समाज सदा पुरुष प्रधान ही रहा है। विश्व भर में महिलाएं समान अधिकार और शोषण के मामले में सदैव पीड़ित रही हैं। लेकिन जहाँ विकसित देशों में स्थिति में काफी सुधार आया है , वहीँ हमारे देश में अभी भी महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा उपेक्षित ही रही हैं। इसका एक ज्वलंत उदाहरण है पर्दा प्रथा... 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
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7 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. सुंदर सूत्र, शानदार चर्चा। मेरे ब्लॉग छन्द खजाना को आज की चर्चा में सम्मिलित करने हेतु आपका हृदय से आभार ....

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  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  4. चर्चा मंच में छंद खजाना के माध्यम से अपने दोहों को देख कर अभिभूत हूँ। स्थान देने के लिए महानुभाव द्वय श्रद्धेय गुरुदेव निगम जी और प्रणम्य मयंक जी का हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ।(चोवा राम "बादल")

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  5. आज की सुन्दर चर्चा में 'उलूक' के सूत्र को स्थान देने के लिये आभार आदरणीय।

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  6. बहुत रोचक चर्चा...मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार...

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  7. रूपचन्द्र जी मेरे उत्तरप्रदेश की रुवतियों के बारे में आलेख को जगह देने के लिए बहुत धन्यवाद

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