साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Friday, September 08, 2017

"सत्यमेव जयते" (चर्चा अंक 2721)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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काला रंग और हंसमुख चेहरा 

याने कि मास्साब की नजर में 

...हमारे स्कूल में एक कुट्टिय्या स्वामी मास्साब थेउनका नाम यूँ तो आर के शास्त्री था मगर जिस बेरहमी से वो बच्चों की कुटाई किया करते थेउसके चलते न जाने कब कौन उनका नामकरण कुट्टिय्या स्वामी कर गयाबैच दर बैच उन्हें अनऑफिसियली आपसी बातचीत में इसी नाम से संबोधित करता रहाशायद उनको पता भी न रहा हो.

बात बात पर बांस की बेंत से छात्रों को तब तक कूटतेजब तक कि बन्दा न टूट जाये या बेंत न टूट जायेहालांकि हम पढ़ाई में इतने बड़े गणेश भी न थे कि रोज कूटे जायें... 

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हमसाया 

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी 
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विधवा विलाप की तरह ... 

मत बोलना सच 
सच बोलना 
गुनाह है... 
vandana gupta  
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हत्यारा 

यह समय 
अनुकूल है 
हत्या के लिए 
अनुकूल है
 हत्यारों के लिए भी... 
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छम्मकछल्लो 

ठाणे की एक अदालत का सराहनीय फ़ैसला  आया है,
महिला  को "छम्मकछल्लो " कहना जुर्म ठहराया है।
शब्द ,इशारे या किसी गतिविधि से महिला का अपमान होने पर
केस दर्ज़ होता है -
भारतीय दंड संहिता की धारा 509
केस   दर्ज़  हुआ  :  09 -01 -2009
आरोप - पड़ोसी पुरुष ने "छम्मकछल्लो" कहकर पड़ोसन को अपमानित किया
फ़ैसला - आरोप सही , शब्द अपमानजनक
सज़ा - अदालत उठने तक साधारण क़ैद
जुर्माना -एक  भारतीय  रुपया
केस की अवधि - साढ़े आठ साल से अधिक 
पुलिस - केस दर्ज़ नहीं किया... 
Ravindra Singh Yadav - 
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अँधेरे का समर्थन करना 

याने खुद अँधेरे में गुम होना 

गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई। लगा, घर में मौत हो गई है। कोई अपनेवाला नहीं रहा। दुःख तो बहुत हो रहा है किन्तु ताज्जुब बिलकुल ही नहीं हुआ। यह तो होना ही था। खुद गौरी ने ही अपनी यह मौत तय की थी। अपनी ही बनाई हुई सलीब पर चढ़ीं वह। गौरी जैसा दूसरा कोई नहीं हो पाएगा। उनसे बेहतर या उनसे बदतर ही होगा। लेकिन उनकी मौत से उनकी परम्परा के लेखन का सिलसिला रुकेगा नहीं... 
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स्व शरद बिल्लोरे को समर्पित :  

कविता 

वो था तो न था
नहीं है तो तैर कर 
आ जाता है आँखों में 
टप्प से टपक जाता है 
आँसुओं के साथ 
फिर गुम हो जाता है वाष्पित होकर 
विराट में 
आता ज़रूर है 
गाहे बगाहे 
भाई था न ... 
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7 comments:

  1. कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना। जमाना बदल रहा है। आप को क्या है कहना जरा लोगों से पूछ भी लेना । आज की प्रस्तुति में 'उलूक' को भी जगह देने के लिये आभार।

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  2. हर बार की तरह उम्दा चर्चा...मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी!

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  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  4. चर्चामंच की प्रस्तुति सुरुचिपूर्ण एवं वैचारिक मंथन को आमंत्रित करती है। बधाई आदरणीय शास्त्री जी। आभार सादर। मेरी रचना छम्मकछल्लो को स्थान देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

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  5. अच्छे चयन हैं , चर्चामंच का नया गेट अप सुन्दर है --

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