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Monday, June 04, 2018

"मत सीख यहाँ पर सिखलाओ" (चर्चा अंक-2991)

सुधि पाठकों!
सोमवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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कविता  

"मत सीख यहाँ पर सिखलाओ"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

कई मित्र टिप्पणियाँ अक्सर, 
सब रचनाओं पर देते हैं।
सुन्दर-बढ़िया लिख करके
निज जान छुड़ा भर लेते हैं।।



कुछ तो बिना पढ़े ही

केवल कॉपी-पेस्ट किया करते हैं।
खुश करने को बदले में ही, 
वो प्रतिदान दिया करते हैं।।

रचना के बारे में भी तो, 
कुछ ना कुछ लिख दिया करो।
आँख मूँद करएक तरह की
नहीं टिप्पणी किया करो... 
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गज़ल   

" इमारत "  

( राधा तिवारी " राधेगोपाल ") 

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गरीब मेधावी छात्रो को  

उच्च शिक्षा से वंचित करने की साजिश  

शरारती बचपन पर sunil kumar  
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लग्न-राशि फल -  

3 और 4 जून 2018 

संगीता पुरी 
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बहरुपी कलयुग 

कोई दुनिया भर के श्रृंगार तले 
आइने को धोका देता है 
सब रंगो में रंग कर भी 
जाने किस रंग को रोता है 
कोई विधवा सा सब कुछ खो कर 
बिन रंगों के जीता है... 
अनकहे बोल पर anchal pandey  
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रूहानी प्यार ----   

कविता -- 

Image result for रूहानी प्यार के चित्र
हुए  रूहानी प्यार केकर्ज़दार  हम - --
 रखेगें इसे दिल मेंसजा  संवार हम   !!
  बदल जायेंगे जब - सुहाने ये मन के मौसम ,   ़

तनहाइयों में साँझ की घुटने लगेगा दम -   
खुद को बहलायेंगें-इसको निहार हम... 
क्षितिज पर Renu  
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चन्द माहिया : 

क़िस्त 45 

1: 
सब ग़म के भँवर में हैं 
कौन किसे पूछे 
सब अपने सफ़र में हैं  
;2:  
अपना ही भला देखा 
देखी कब मैने 
अपनी लक्षमन रेखा... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक  
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बस प्यार एक सौगात यहाँ 

ये जीवन इक बहती धारा,  
नित सीख नया दे जाती है।  
फिर जीने खातिर चुन चुके,  
कुछ खुशियाँ भी ले आती है... 
मनोरमा पर श्यामल सुमन  
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अमीर व्यक्ति से भी अमीर 

किसी समय दुनिया के सबसे धनवान व्यक्ति बिल गेट्स से किसी न पूछा - 'क्या इस धरती पर आपसे भी अमीर कोई है ? बिल गेट्स ने जवाब दिया - हां, एक व्यक्ति इस दुनिया में मुझसे भी अमीर है. कौन ---!!!!! बिल गेट्स ने बताया - एक समय में जब मेरी प्रसिद्धि और अमीरी के दिन नहीं थे, न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर था.. वहां सुबह सुबह अखबार देख कर, मैंने एक अखबार खरीदना चाहा,पर मेरे पास खुदरा पैसे नहीं थे.. सो, मैंने अखबार लेने का विचार त्याग कर उसे वापस रख दिया.. अखबार बेचने वाले काले लड़के ने मुझे देखा, तो मैंने खुदरा पैसे/सिक्के न होने की बात कही.. लड़के ने अखबार देते हुए कहा - यह मैं आपको मुफ्त में देता हूँ.....  
Digvijay Agrawal  at  
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था हमसे किसी बात पे ख़फ़ा बहुत 

था हमसे किसी बात पे ख़फ़ा बहुत 
जब मिला तो, लिपट के रोया बहुत 

अपने किस्से सुनाए, कामियाबी के 
फिर मेरी हालत पे उदास हुआ बहुत... 
Mukesh Srivastava  at  

हमारी मत मानो 

सीता जी के जन्म को लेकर बड़ा विवाद है भाई, कोई उन्हें जनकसुता कहता है तो कोई कोई उसे रावण की पुत्री तक सिद्ध करते हैं कोई उसे ऋषियों के रक्त से उत्पन्न बताते हैं अब हमारे उप मुख्यमंत्री उन्हें टेस्ट ट्यूब बेबी बता रहे हैं। अरे भाई इतना क्यों नहीं समझते जो सत्ता में पहुँच जाते हैं लोग उनकी उबासियों पर भी तर्क वितर्क करते हैं। सो आप तो चुप ही रहिये ये काम तो हमारे जैसे अज्ञानियों को सौंप दीजिए... 
मेरी दुनिया पर Vimal Shukla 

6 comments:

  1. शुभ प्रभात सखी
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. सुन्दर ढंग से प्रस्तुत की गयी पठनीय चर्चा।
    आपका आभार राधा बहन जी।

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  4. आदरणीय राधा जी - हार्दिक आभार मेरे रचना को चर्चा मंच की शोभा बनाने के लिए | सभी लिंकों को का अवलोकन भी लिया मैंने |बहुत ज्ञान वर्धन हुआ |आपके सहयोग के लिए पुनः कोटिश आभार | सादर ====

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति
    लाजवाब संकलन
    सभी रचनाएँ उत्क्रष्टता को प्राप्त है
    सभी को खूब बधाई
    मेरी रचना को भी स्थान देने के लिए आभार
    सादर नमन शुभ रात्रि 🙇

    ReplyDelete

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"तालाबों की पंक" (चर्चा अंक-3011)

मित्रों!  रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...