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Monday, June 25, 2018

"उपहार" (चर्चा अंक-3012)

सुधि पाठकों!
सोमवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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उपहार  

( राधा तिवारी " राधेगोपाल ") 

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दोहे  

"बढ़ा जगत में ताप"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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मेरी बेटी.... 

मंजू मिश्रा 

मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal  
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हुण मैं अनहद नाद पजाया.. 

अपने दिल का हाल सुनाया 

Anhad Naad by Sona Mohapatra

सोना महापात्रा एक ऐसी आवाज़ की मालकिन हैं
 जो सुरीलेपन के साथ साथ भरपूर उर्जा से भरी है।
 उनकी आवाज़ से मेरी पहली दोस्ती 
उनके गैर फिल्मी एलबम सोना के गीत अभी ना ही आना
 सजना मोहे थोड़ा मरने दे, इंतजार करने दे से हुई थी
 और उसके बाद तो ये बंधन फिर छूटा ही नहीं ।

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तराशे हुए बाजुओं का सच 

कमउम्र में ही दुनिया को अलविदा कह गईं मशहूर शायरा परवीन शाकिर का एक शेर याद आ रहा है .... तूने अखबार में उड़ानों का इश्‍तिहार देकर मेरे तराशे हुए बाजुओं का सच बेपरदा कर दिया। परवीन मेरी पसंदीदा शायरों में से एक रही हैं, उन्‍होंने इन चंद लफ्ज़ों में बहुत कुछ कह दिया... 

Alaknanda Singh 
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हर अदा कमसिन 

हो तुम बेहद हसीन  
तुम्हारी हर अदा कमसिन... 
Akanksha पर Asha Saxena  
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पीहर 

Swaying Hearts पर 
Rajshree Sharma  
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Laxmirangam:  

राष्ट्रहित -  खोटा सिक्का.

 राष्ट्रहित अनुष्का शर्मा ने 
एहरान को डाँट लगाई 
कि वह कार से सड़क पर
 कचरा फेंक रहा था. 
भले ही लोग यह सोचें
 कि उसने सफाई वालंटीयर होन... 
M. Rangraj Iyengar  at  
आपका ब्लॉग 
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सरकारी स्कूल  

( राधा तिवारी " राधेगोपाल " ) 

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हिंदी प्रेम 

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी 
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तेरा साथ होने भर से 

मैं जानता हूँ कि अक्सर ऐसा नहीं होता  
फिर भी मुझे ऐसा लगता है कि  
तेरा साथ होने भर से  
जिंदगी आसान हो जायेगी... 
प्रवेश कुमार सिंह  
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क्या बिटिया की लाज अलग है? 

एक भाव मुमकिन गीतों में कहने का अंदाज़ अलग है  
कल कैसा था क्या कल होगा इन बातों से आज अलग है... 
मनोरमा पर श्यामल सुमन  
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संघी गिरोह  

देश की अर्थ व्यवस्था को कर रहा नष्ट 

Randhir Singh Suman  
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चन्द माहिया :  

क़िस्त 47 

:1:  
सब साफ़ दिखे  
मन से धूल हटा पहले  
इस मन के दरपन से  
:2:  
अब इश्क़ नुमाई क्या  
दिल से तुम्हे चाहा  
हर रोज़ गवाही क्या... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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मुझसे बातें करती जाती है 

लिखो यहां वहां पर विजय गौड़  
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बीजांकुर.... 

कुसुम कोठारी 

विविधा.....पर yashoda Agrawal 

5 comments:

  1. शुभ प्रभात सखी
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. सार्थक चर्चा।
    आभार राधा जी।

    ReplyDelete
  3. बढ़िया चर्चा प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  5. कई दिनों बाद आना हुआ ब्लॉग पर अच्छी चर्चा प्रस्तुति राधा जी।

    ReplyDelete

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"सुहानी न फिर चाँदनी रात होती" (चर्चा अंक-3134)

सुधि पाठकों! बुधवार   की चर्चा में  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। राधा तिवारी (राधे गोपाल) -- दोहे   "शरदपूर्णिमा रात...