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Saturday, June 09, 2018

"छन्द हो गये क्ल्ष्टि" (चर्चा अंक-2996)

मित्रों! 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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बच्चों की मुस्कान  

(राधा तिवारी "राधेगोपाल " ) 


ईश्वर को मैंने देखा है बच्चों की मुस्कान में l  
 देखा है सुख सागर में और देखा उसे उड़ान में... 
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गंगा  

(राधातिवारी "राधेगोपाल") 

गंगा जी के नीर को, रखो हमेशा साफ l
 माँ गंगा हरदम करें, पाप सभी के माफ... 
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कासे कहूं हिया की बात! 

बिरहन बिलखे बेरी बेरी 
बिखन चिर संताप 
बुझी बाती आस की 
आँखिन अंधियारी छात
कासे कहूँ हिया की बात !

पलक अपलकउलझे अलक
दहक दहक दिन रात . 

सबद नीर नयन बह निकले
भये तरल दोउ गात ... 
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शीर्षकहीन 

प्यार पर Rewa tibrewal 
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दशरथ मांझी की राह चला   

एक और मांझी 

उंटेन मैन ‘दशरथ मांझी’ की तरह अपनी दयनीय स्थिति के बावजूद दृढ़ इच्छा शक्ति रखने वाला एक और मांझी जो कि मध्यप्रदेश के जिला होशंगाबाद का निवासी है, जो एक पिछड़े इलाके सोहागपुर जैसे एक छोटे से स्कूल का हिंदी माध्यम का औसत दर्जे के छात्र रहा है, बावजूद इसके जिसने भोपाल आकर 8 वर्ष की कठोर साधना के बाद वर्ष 2016 में 
MBBS की प्रवेश परीक्षा NEET पास करके 
भोपाल स्थित चिरायु मेडिकल काॅलेज एंड हॉस्पिटल में दाखिला लेकर ही दम लिया है... 
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मौसम... 

एक समन्दर लिखनाकुछ किनारे लिखना।। 
मै अपने लिख दूँगी  तुम, तुम्हारे लिखना।। 
लिखना कैसी है वो बूंदें जो बारिश में बरसती है 
और कैसा है वो पानी जिनको आंखें तरसती है 
कि हो सकता है बन जाये फिर से वही मौसम 
मैं भी लिख दूँगी खामोशी तुम दर्द अपने सारे लिखना... 
Parul Kanani 
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औरतें जी का जंजाल -  

कांधला से कैराना 

कांधला से कैराना और पानीपत ,एक ऐसी बस यात्रा 
जिसे भुला पाना शायद भारत के सबसे बड़े घुमक्कड़ 
व् यात्रा वृतांत लिखने वाले राहुल सांकृत्यायन जी के लिए भी 
संभव नहीं होता यदि वे इधर की कभी एक बार भी यात्रा करते... 
! कौशल ! पर Shalini Kaushik  
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सुनो... 

सुनो...  
खड़ी हूँ मैं बाहें फैलाए 
तुम्हे अपने आगोश में 
समाने की ज़िद लिए... 
प्यार पर Rewa tibrewal  
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सफ़ेद मछली 

छोटे से एक्वेरियम में बंद
बेचैनी से चक्कर काटती
उस सफ़ेद मछली को  
देखती रहती हूँ मैं अपलक !
कितनी छोटी सी थी
जब मैं लाई थी उसे
अब बूढ़ी हो चली है... 
Sudhinama पर sadhana vaid  
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राजनीति में  

सीनाजोरी तो गहना है 

इन दिनों, राजस्थान के पूर्व मुख्य मन्त्री अशोक गेहलोत का एक वीडियो फेस बुक और वाट्स एप पर छाया हुआ है जिसमें गेहलोत कहते हुए नजर आ रहे हैं कि बिजली प्राप्त करने के लिए बनाए बाँधों का पानी सिंचाई के काम नहीं आएगा क्योंकि उसमें से ‘पॉवर’ तो रहेगा ही नहीं। गेहलोत की खूब हँसी उड़ाई जा रही है और गेहलोत के बहाने उनकी पार्टी और पार्टी नेताओं की खिल्ली उड़ाई जा रही है। यह सब देखकर मुझे शुरु में ताज्जुब हुआ। क्योंकि हमारे यहाँ कहावत है कि कहनेवाला भले ही मूर्ख हो 
लेकिन सुननेवाला तो समझदार होता है... 
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5 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. उम्दा सूत्रों का संकलन आज का चर्चामंच ! मेरी रचना को आज की चर्चा में शामिल करने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  3. बहुत बढ़िया संकलन!!!

    ReplyDelete
  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति में मेरी पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

    ReplyDelete

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"तालाबों की पंक" (चर्चा अंक-3011)

मित्रों!  रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...