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Tuesday, June 12, 2018

"मौसम में बदलाव" (चर्चा अंक-2999)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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दोहे  

"भारी वाहन"  

(राधा तिवारी "राधेगोपाल ') 

Image result for भारी वाहन
जबसे सड़कों का हुआ, भारत में विस्तार l
 दाएं बाएं देखकर, करो सड़क को पार ll

 भारी वाहन से सदा , रहना हरदम दूर l   

होती इनसे रोड पर, दुर्घटना भरपूर... 
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कितने और बसंत 

बांकी है हिस्से में,  
अभी कितने और बसंत....
हो जब तक इस धरा पर तुम, 

यौवन है, बदली सी है,  
सावन है अनन्त, 
ना ही मेरा होना है अन्त,  
आएंगे हिस्से में मेरे, 
अनगिनत कितने ही ऐसे बसंत... 
purushottam kumar sinha  
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ग्रीष्म की छुट्टियाँ बीती सुनहरी  

[ बाल-कविता] 

ग्रीष्म की छुट्टियाँ बीती सुनहरी

अब दृष्टि स्कूल पर ठहरी

हर्ष-विषाद है अंतस नगरी
अश्क बहाता दृग की गगरी .
तपा बदन जो चारों पहर था
बहा पवन पर स्वेद भरा था
अस्त-व्यस्त हो घूम रहा था
थी तपन-भरी वो दोपहरी... 
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आदमी और कहानी 

Bhavana Lalwani 
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हीरे सा प्रतिमान 

उमर सलोनी चुलबुली, सपन चढ़े परवान  
आलोकित शीशा लगे, हीरे सा प्रतिमान... 
shashi purwar  
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मुक्त ग़ज़ल : 255 - 

वो मेरा है....... 

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माँ हो ऐसी ~ 

माँ क्या होती है यह हम सभी जानते हैं। लेकिन जब तक वह हमारे साथ होती है हमें उसके होने का एहसास नहीं होता, उसके होने की क्द्र नहीं होती और फिर जब वह हमसे दूर चली जाती है तब हमें पता चलता है कि सही मायनो में माँ क्या होती है। माँ से ही तो मायका होता है, वह न हो तो कितना ही स्वादिष्ट खाना क्यूँ हो 
मगर जाएका कहाँ होता है... 
Pallavi saxena 
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प्यारी सी बच्ची 

प्यार पर Rewa tibrewal  
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किताबों की दुनिया - 181 


नीरज पर नीरज गोस्वामी  
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साथ गर मेरा तुम्हे स्वीकार हो ... 

जीत मेरी हो न तेरी हार हो
जो सही है बस वही हरबार हो

रात ने बादल के कानों में कहा
हट जरा सा चाँद का दीदार हो... 
Digamber Naswa  
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ग़ज़ल 

नयन से’ तीर चलाये  उसे अदा कहिये  
विपत्ति से जो’ बचाए तो’ बावफा कहिये |  
कहूँ सचाई’ तो’ कहते अभी नया कहिये ... 
कालीपद "प्रसाद" 

7 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. विस्तृत चर्चा आज की ...
    आभार मेरी ग़ज़ल को जगह देने के लिए ...

    ReplyDelete
  3. सुन्दर चर्चा। आभार आदरणीय 'उलूक' के खोल को आज की चर्चा में स्थान देने के लिये।

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  4. उम्दा चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए भी बहुत बहुत धन्यवाद,आदरणीय शास्त्री जी।

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत ही सुन्दर चर्चा

      Delete

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"सारे नम्बरदार" (चर्चा अंक-3009)

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