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Monday, June 10, 2013

सबकी गुज़ारिश :चर्चामंच 1271

शुभम दोस्तो ..
मैं 
हाजिर हूँ 
सोमवारीय चर्चा में 
एक मधुर भजन की 
कुछ पंक्तिओं के साथ 

तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार
उदासी मन काहे को करे..
नैया तेरी राम हवाले,
लहर लहर हरि आप सम्हाले
हरि आप ही उठायें तेरा भार
उदासी मन काहे को करे ..  


किसे सहेजू 
साधना वैद

अमजद इस्लाम अमजद 
तीर्थयात्री 
Pilgrims, Sun temple, Knoark, India - Images by Sunil Deepak, 2008\
अफ्रीकी  लोक कथाएं  

दो कविताएँ 
एक मुक्तक 
एक कोना आकाश 
सुनिए मेरी भी 
पथ का राही 
जन्म मृत्यु  मोक्ष 
कालिपद प्रसाद
एक मुक्तक 
वन्य जीवन संरक्षण 
विकेश  बडोला 
निराकार हूँ 
चुल्लू भर पानी में डूब मरो 

सबको अपना स्नेह देते रहें 
इसी गुज़ारिश के साथ 
लेती हूँ आप सबसे विदा
हर फिकर को धुंएँ में उड़ाते रहें 
जिंदगी का साथ निभाते रहें  
बड़ों को नमस्कार !
छोटों को प्यार !
शुभविदा ..
आगे देखिए..."मयंक का कोना"
(1)

महाराष्ट्र का वह बुद्धिमान रोबोट हमारा मन मोह गया

BS Pabla

एक जीते जागते रोबोट को देख मंत्रमुग्ध से दोनों अपनी मारूति ईको में जा बैठे अपने अगले पड़ाव, पुणे की ओर जाने के लिए. जहां एक दिन रूक कर हम जाने वाले थे पैठण और लोनार....
ज़िंदगी के मेले पर बी एस पाबला 
(2)
ABP न्यूज : ये कैसा ब्रेकिंग न्यूज !

आज एक सवाल ABP न्यूज से करना चाहता हूं, जिसके महत्वपूर्ण न्यूज बुलेटिन की बुनियाद भी " सूत्र " पर जा टिकी है। मैं समझता हूं सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर कोई सामान्य खबर तो एक बार दी जा सकती है, लेकिन देश में जिस मुद्दे पर लगातार बहस चल रही हो, उस बड़ी खबर पर इतनी बड़ी लापरवाही कम से कम मेरी समझ से तो परे है....
TV स्टेशन ...पर महेन्द्र श्रीवास्तव

(3)
बीमार पडना नेमत है जी भर के बीमार पडिये !
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ताऊ डाट इन पर ताऊ रामपुरिया

(4)
सागर तट पर खड़ा किन्तु मैं प्यासा का प्यासा

साथियों .. सागर तट पर खड़ा किन्तु मैं प्यासा का प्यासा , लहराती है जलराशि अपार नित नयनो के आगे, मन में विचार अनगिनती उसको देख देख जागे, कैसी यह रही बिषमता जीवन जीवन बीच घनी, एक डाह ह्रदय की जला चुकी अधरों की अभिलाषा...
धुंधली यादें पर Nitish Srivastava

(5)
आज जिंदगी कुछ याद दिला गई है
My Photo
आज जिंदगी कुछ याद दिला गई है सपने जो देखे वह याद दिला गई है ....... 
वो हाथो में हाथ लिए चले थे कभी उन्ही पलों की वो याद दिला गई है .
..... सोचा था के उनको हम भूल चुके है न जाने क्यों वो फिर याद आ गई है ..........
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 

(6)
वृन्दावन यात्रा भाग 

माता के प्रिय भक्त और परम आस्था वाले व्यक्ति हैं जिनके अनुसार माँ वैष्णो देवी अपने भक्तों को चार वरदान देती है : धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष ....
ॐ ..प्रीतम साक्षात्कार ..ॐ पर सरिता भाटिया
(7)
मधु सिंह :मचलती ख्वाहिशों का क्या होगा
  फ़लक से तोड़ कर तारे सज़ा दूँ तेरी ज़ुल्फों में  बना धडकन बसा लूँ ख्वाहिसों में आज मैं अपने या झुलस जाऊ तपन में तेरी सांसों की सिमट आगोश में तेरे लिपट जाऊ मैं सीने से हर खुशबू से  तेरी  ही खुशबू निकलती है सवारूँ तेरी जुल्फों को बिठा आगोश में अपने चला जाउं कहीं मैं दूर धरती से, ले हाथ तेरा हाथ में अपने  सुना दूँ दिल की धडकन ,रख दिल अपना  ,दिल पर तेरे 
बता दे आज तू जानम,  मेरे इन मचलती ख्वाहिशों का क्या होगा                                                                                    मधु "मुस्कान "
(8)
“आज अपना पुराना गीत सुनने का मन है” 
मेरे पति 
ने
बारिश शुरू होने पर,
"बादल" शीर्षक से यह गीत लिखा था। इसे मैं अपनी आवाज में
प्रस्तुत कर रही हूँ-
श्रीमती अमर भारती


बड़ी हसरत दिलों में थी, गगन में छा गये बादल।
हमारे गाँव में भी आज, चल कर आ गये बादल।।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

16 comments:

  1. सरिता भाटिया!
    सोमवासरीय चहकती-महकती चर्चा का जवाब नहीं।
    आपके श्रम को सलाम!
    आभार...!

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  2. गुरु जी को प्रणाम
    गुरु जी आपके मयंक कोना के बिना मेरी चर्चा कहाँ पूरी होती है आप वाकई बहुत मेहनत करते हैं
    मेरी रचना को स्थान दिया शुक्रिया जी

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  3. बहुत सुंदर चर्चा..
    मैने रात करीब डेढ़ बजे अपना लेख ब्लाग पर पोस्ट किया था, लेकिन मयंक के कोना में उसे भी स्थान मिल गया। बहुत बहुत आभार

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  4. आदरणीया सरिता जी बहुत ही सुन्दर लिंक्स संकलन लाजवाब प्रतुतिकरण निःसंदेह आप चर्चा में पारंगत हो गई हैं हार्दिक बधाई स्वीकारें.

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  5. आदरणीय शास्त्री जी एवं आदरणीया सरिता जी बहुत सुन्दर गुज़ारिश और मयंक का कोना,मेरी रचना को शामिल करने पर हार्दिक आभार

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  6. बहुत सुंदर चर्चा सरिता जी ! मेरी रचना को इस खूबसूरत मंच पर स्थान दिया तहे दिल से आभारी हूँ ! बहुत-बहुत धन्यवाद !

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  7. बहुत बढ़िया चार्चा....
    शुक्रिया सरिता जी...शुक्रिया शास्त्री जी...

    सादर
    अनु

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  8. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति

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  9. उम्दा लिंक्स

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  10. प्रिय सरिता जी बहुत सुन्दर सूत्रों से सजाया चर्चा मंच आपको व् मयंक के कोने हेतु आदरणीय शास्त्री जी को हार्दिक बधाई

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  11. शुक्रिया दोस्तो आप अपने इलावा दूसरे लिंक्स पड़ने का समय देते हैं उसके लिए ह्रदय से आभारी हूँ

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  12. बहुत सुंदर लिंक्स से सजा है चर्चा मंच पर
    बहुत बढिया
    ब्लॉग जगत से दूर था जिसके लिये माफी चाहता हूं, मेरी पोस्ट को स्थान देने का शुख्रीया

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    Replies
    1. अरे हा मेर नाम अशोक खाचर है :)

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  13. बहुत सुंदर लिंक्‍स...मेरी कवि‍ता को स्‍थान देने का शुक्रि‍या..

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