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Thursday, November 29, 2018

चर्चा - 3170

15 comments:

  1. शुभ प्रभात भाई दिलबाग जी
    आभार...
    सादर...

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  2. ज़मीं भी उसकी,ज़मी की नेमतें उसकी
    ये सब उसी का है,घर भी,ये घर के बंदे भी

    खुदा से कहिये,कभी वो भी अपने घर आयें!

    १०.
    तमाम सफ़हे किताबों के फड़फडा़ने लगे
    हवा धकेल के दरवाजा़ आ गई घर में!

    कभी हवा की तरह तुम भी आया जाया करो!!
    बहुत खूब कही हैं त्रिपदी उसने ,
    कहो उसे कभी द्रौपदी भी कहे।
    veerujan.blogspot.com
    editplatter05.blogspot.com

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  3. veerujan.blogspot.com
    editplatter05.blogspot.com
    खूब कही है ग़ज़ल बाग़ दिल -ए -वर्क ने ,
    बात ये दीगर दिल की दुनिया में रख्खा क्या है ?

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  4. veerujan.blogspot.com
    editplatter05.blogspot.com
    बहुत खूब !बिन पानी सब सून ,मोती मानुस चून
    खूब कही है ग़ज़ल बाग़ दिल -ए -वर्क ने ,
    बात ये दीगर दिल की दुनिया में रख्खा क्या है ?

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  5. veerujan.blogspot.com
    editplatter05.blogspot.com
    बहुत खूब !बिन पानी सब सून ,मोती मानुस चून
    खूब कही है ग़ज़ल बाग़ दिल -ए -वर्क ने ,
    बात ये दीगर दिल की दुनिया में रख्खा क्या है ?

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  6. veerujan.blogspot.com
    editplatter05.blogspot.com
    बहुत खूब !बिन पानी सब सून ,मोती मानुस चून
    जो जैसा दीखता है
    वही हो तब समय भी
    ठहरना चाहता है
    उन्नत ललाट हो जाता है
    जन्म देने वालों का
    आव बिना सब फीका
    आव बिना क्या होगा ?
    आशा

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  7. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति । मेरी रचना को भी स्थान देने हेतु आभारी हूँ ।

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  8. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आभार आभार आदरणीय दिलबाग विर्क जी।

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  9. उम्दा चर्चा आज की |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |


    |

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  10. सुंदर रचनाओं की चर्चा के बीच मेरी रचना कौ भी स्थान देने के लिए हृदयतल से अति आभार आपका आदरणीय।
    सादर।

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  11. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  12. एक से बढ़कर एक सुंदर सूत्रों का परिचय देता चर्चा मंच..मुझे भी शामिल करने के लिए आभार !

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  13. बहुत ही अच्छी चर्चामंच की प्रस्तुति 👌

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  14. आपकी सारी रचनाये बहुत ही सुन्दर है ।

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