चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Monday, August 02, 2010

दोस्ती के रंग --------दोस्तों के संग……चर्चा मंच-233 पर चर्चाकारा वन्दना के संग

दोस्तों,
आज तो दोस्ती के रंगों में सजी पोस्टों से रु-ब-रु हो जाइये  और कुछ अलग - अलग रंग ज़माने के भी देखिये ……………उम्मीद है ये रंग आपको पसंद आयेंगे और दिल मे आपके उतर जायेंगे……………
 
दोस्ती के जज़्बे को जिस तरह आशीष जी ने बाँधा है वो काबिल-ए-तारीफ़ है….…आपको दोस्ती की दुनिया मे ले जायेगी और दोस्ती के जज़्बे को समझने को प्रेरित करेगी कि दोस्ती से बढकर कोई जज़्बा नही होता………………

_ __HAPPY FRIENDSHIP DAY_ आप सभी लोगों को मेरा नमस्कार आज एक ऐसा दिवस है जो जिसका इंतजार सभी दोस्तों को रहता जिसे आंग्ल भाषा मे कहा जाता है- freindship day. लेकिन आज के ...तकनीक



हबीब साहब ने कितना सुन्दर संदेश दोस्ती के नाम किया है जिससे शांति ,सद्भाव और समरसता का उदय होता है……………उन्होने दोस्ती को एक खुला आकाश बताया है सच ये रिश्ता खुले आकाश सा कितना विस्तृत होता है जितनी चाहे उडान भरो ………सांसों से बँधी अटल विश्वास की डोर है दोस्ती …………उनके दोस्ती के जज़्बे को नमन्……………"सामजिक समरसता और सांप्रदायिक सद्भावना" का आधार - 'मित्रता'
1 घण्टे पूर्व एहसासात... अनकहे लफ्ज़.... पर S.M.HABIB
सुधि मित्रों, सादर नमन, स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा का उद्घोष कर जन जन में उत्साह भर देने वाले अमर स्वतंत्रता संग्राम योद्धा लोकमान्य ...समाज


सुशीला जी ने कितनी संजीदगी से हाल-ए-दिल बयां कर दिया…………एक मे दूजे के अस्तित्व को समेट दिया और द्वैत का भेद मिटा दिया…………
2 घण्टे पूर्व सुशीला पुरी... पर सुशीला पुरी
वह पूछता है- 'तुम इतना क्यूँ याद आती हो ' और सिवाय इसके कि यही सवाल मै उससे करूँ कुछ नहीं बचता है कहने को । ...समाज


निखिल जी ने हालात का जैसा दर्दिला चित्रण किया है उससे इंसान सोचने को मजबूर हो जाता है कि किन हालात मे इंसान हर पल मर - मर के जी रहा है…………
अब यक़ीं आया उन्हें इस बात में जल गया सारा शहर उस रात में बोरियां भर-भर के ले आये ज़हर बांटता था अमरिका ख़ैरात में. जब कभी रोना हुआ चुपचाप से, हो गए आकर खड़े, ...कला


आशुतोष मिश्र जी एक ऐसे वाकये का दिल दहलाने वाला चित्रण कर रहे हैं जिससे आज के समाज ,मीडिया और प्रशासन का चेहरा जनता के सामने आता है…………एक आम कमजोर और बेबस इंसान की कहीं भी सुनवाई नही है……
एक समय ऐसा भी था जब समुचे मध्य प्रदेश में एक ही समय पर अखबारों के माध्यम से लोगों को खबरें मिल जाया करतीं थीं । लेकिन आज ऐसा नहीं होता । हर जिले की खबर के लिए ...समाचार


विमला जी एक बार फिर यादों की चादर को हटा रही हैं और एक वादे की गहराई नाप रही हैं…………
4 घण्टे पूर्व कहानी-कविता... पर Vimla Bhandari
बेटी की सगाई परपगलाया मनबर्फ की चादर हटाखिल आये यादों के सुमनसुधारस पगीमन की फांकोंसे टपकने लगाशहतूती रसअमृत घोलतीवाणी का मिठासबोलने लगा था यूंकहो-दोगी ...समाज


अरुणा राय जी किसी परिचय की मोहताज नहीं…………ह्र्दय की बेकली का कैसा भावभीना चित्रण किया है जहाँ शब्द गौण हो जाते हैं सिर्फ़ महसूस ही किया जाता है …………और दूसरी नज़्म मे मौन को मुखरित कर दिया सिर्फ़ उसका प्रवाह मोड कर्……………
27 मिनट पूर्व रचनाकार... पर Raviratlami
१)यह बेकली ही हृदय की छाया है   कैसे बता सकती हूँ कि क्या होता है हृदय हालाँकि उसे दिखला देना चाहती हूँ सामने वाले को पर शब्द इसमें जरा सहायक नहीं ...कला


अनामिका जी के शाश्वत प्रश्न का उत्तर दीजिये अगर किसी के पास हो तो……………
धीमी धीमी साँसे चल रही हैं मैंने कहाअब मुझे उस शय्या पर लिटा दोजहाँ मैं चिरकाल की नींद सो सकूँ मुझे जाना है अब विदा होना है . लेकिन ये मन इन अंतिम घड़ियों में ...समाज


अनिल जी शिवलिंग पर बेलपत्र चढाने का तरीका बता रहे हैं …………अरे सावन का सोमवार जो है आप भी तो जाते होंगे जल चढाने तो क्यूँ ना ये विधि विधान भी जाना जाये……………


अवधिया जी का कटाक्ष तो देखिये कुत्ता भी डर जाता है आज के …………से
(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) नेता बोला अपने कुत्ते से, ऐ श्वान बता- क्या तू मुझसे बढ़ कर पूँछ हिलाता है? मैं दुम-हीन भले ही हूँ पर, मेरा टेढ़ा मन दुम कहलाता है। कान ...समाज


अजय झा जी के दर्द की इम्तिहाँ तो देखिये जब इंसान अपने ही  घर मे मेहमान बन जाये……………


posted by अजय कुमार झा at रद्दी की टोकरी - 4 minutes ago
** *बस्तियां खाली करवाने को ,* *वो अक्सर उनमें ,* *आग लगा देते हैं ॥* * * *उतनी तो दुश्मनी नहीं कि ,* *कत्ल कर दें मेरा , इसलिए ,* *रोज़ , ज़हर ,बस ,* *ज़रा ज़रा देते हैं ॥* * * *मैंने कब कहा कि , गुनाह को...
रचना जी नारी के मौन विद्रोह को अपनी रचना मे उजागर कर रही हैं…………
posted by रचना at नारी का कविता ब्लॉग - 2 hours ago
क्यूँ नहीं कोई समझा मेरी पीड़ाजब मैने आँख पर पट्टी बाँध कर किया था विवाह एक अंधे से । पति प्रेम कह कर मेरे विद्रोह को समाज ने इतिहास मे दर्ज किया । और सच कहूँ आज भी इस बात का मुझे मलाल हैं कि ,मेरी आँखों की ...


संगीता जी ने कितनी संजीदगी से दोस्ती के जज़्बे को बयाँ किया है कि ये जज़्बा सिर्फ़ एक दिन का मोहताज नही होता…………
posted by संगीता स्वरुप ( गीत ) at गीत.......मेरी अनुभूतियाँ - 11 hours ago
कल अचानक ही इस नेट की दुनिया ने मेरे ज्ञान चक्षु खोल दिए और मुझे पहली बार ही पता चला कि -- साल भर में एक दिन दोस्ती का भी होता है शायद बाकी दिन लोग दुश्मनी निबाहते हैं । ये पश्चिमी सभ्यता भारतीय ...


रश्मि के एक दिन की दास्ताँ अगर उनकी ही जुबानी सुनेंगे तो अलग ही आनन्द आयेगा…………
posted by rashmi ravija at अपनी, उनकी, सबकी बातें - 12 hours ago
घड़ी पर नज़र डाली, छः बजकर बीस मिनट, और मैने मोबाइल हाथों में लिया,मेसेज टाइप करने को कि I m ready और तभी घंटी बज उठी. सहेली का मिस्ड कॉल था. मोबाइल वहीँ रखा, क्यूंकि तेज बारिश हो रही थी. घर की चाबी उठाय...


महिला किरदारों के अलग अलग रंग अगर देखने हों तो यहाँ आइये और ज़िन्दगी से रु-ब-रु हो जाइये…………
Avatarby vishal222 Followers : 2 Follow Message Block सिनेमा » gustakh.blogspot.com - ( यह आलेख दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 10 जुलाई को प्रकाशित हो चुका है)मंजीत ठाकुर"ये एक मज़लूम लड़की है जो इत्तेफ़ाक़न मेरी पनाह में आ गई है" फिल्म पाकीज़ा में यह डायलॉग बोलते


ज़रा यहाँ भी नज़र घुमाइये एक अलग जी जीवन दर्शन मिलेगा……………
Avatarby milandwin Followers : 5 Follow Message Block जीवन शैली » priyankachitranshi.blogspot.com - कौन नहीं ऊबता रुकी ठहरी जिंदगी से. ...बदलाव वो चाहती थी, लाख कोशिशो के बाद भी किस्मत नहीं बदली उसकी .....हाँ किस्मत ....अमूमन तो ऊपर वाला स्टेटस के हिसाब से ही देता है. उसकी खुदाई पर शक ना हो


ज़िन्दगी के हर दौर मे हिम्मत नही छोड्नी चाहिये वक्त कैसा भी आये इसे बयाँ किया है प्रकाशवरुण ने……………
Avatarby prakashvarun Followers : 1 Follow Message Block जीवन शैली » varunprakash0007.blogspot.com - हर रात सोचता हूँ, एक नई सुबह आये, सुबह तो हर रोज़ आती है,पर बैरंग चली आती है फिर सोचा,कि ये रात बदल जाए, पर,ख्वाव वदलकर, सुनसान चली आती है....... अब तो ये दिन-रात, भी अपने न रहे, जैसे,आँखों http://hi.indli.com/templates/arthemia/images/btn_next.gif


यहाँ  तो हर हिन्दुस्तानी के दिल की बात कह दी है……………ज़रा गौर फ़रमाइये………
Avatarby ultaseeda Followers : 2 Follow Message Block समाचार » apnasamaj.blogspot.com - मणिशंकर अय्यर ने कॉमनवेल्थ खेलों के पिट जाने की दुआ की है. मैं कहता हूँ आमीन... मणि इन खेलों के फ्लॉप होने की बात दिल से कह रहे हैं या इसके पीछे कोई राजनितिक स्टंट है, ये समझना तो मुश्किल है.


अब आखिर मे दोस्ती का दिन मनाने का कारण भी तो जान लें क्यूँकि दोस्ती जैसा नायाब रिश्ता बहुत ही किस्मत वालों को मिलता है…………

Avatarby virat Followers : 4 Follow Message Block जीवन शैली » balduniya.blogspot.com - आज 1अगस्त को फ्रेण्डशिप-डेहै। चलिए, आज इसके बारे में बताती हूँ। पूरी दुनिया में अगस्त माह का प्रथम रविवार फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाया जाता है. इसके इतिहास में जाएँ तो अमेरिकी

                                                                                                                               

 चलिये अब अगले सोमवार फिर मुलाकात होगी………तब तक आप अपने 
विचारों से अवगत कराइये ताकि सुधार किया जा सके और चर्चा मंच को 
आपके अनुरूप ढाला जा सके………और अब अंत में…………

सभी दोस्तों को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें ।

24 comments:

  1. आज के अंक के लिये चर्चाकारा वंदना जी को बधाइयाँ। बेहतरीन संग्रह - एक मंच पर प्रस्तुती का अपना ही एक अनोखा अंदाज । अच्छा लगा ,सभी ने कहीं न कहीं मर्म को पहचानने की कोशिशें जारी रखीं हैं । इस अंक में आपने मुझे भी शामिल किया , आपको धन्यवाद । चर्चा मंच का हर अंक सार्थक सिद्ध हो , मेरी शुभकामनाएँ आप सभी स्वीकार करें । आभार । - आशुतोष मिश्र ,रायपुर

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  2. अद्भुत! लाजवाब!! बेहतरीन चर्चा।

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  3. सोंमवार का चर्चा मंच बहुत सुन्दर ढंग से सजाया है!
    --
    बहुत-बहुत बधाई!

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  4. बेहतरीन चर्चा! आभार...

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  5. चर्चा मंच पर मेरी पोस्ट को लाने का हार्दिक आभार !

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  6. सभी लोगों को मेरा नमस्कार. मै अशीष मिश्रा ना तो कोई कवि हूँ, ना कोई लेखक हूँ. लेकिन जब किसी बात का प्रभाव मुझ पर पड़ता है तो मै उसे टूटे-फूटे शब्दो मे एक आकार देने की कोशिश करता हूँ. आप लोगों ने मेरी इस रचना को सम्मान दिया, उसे चर्चा मंच का एक हिस्सा बनाया उसके लिये मै आप सभी लोगों का आभारी हूँ. आप लोग इस रचना को जरुर पढीयेगा. मै दोस्ती के संबंध मे सिर्फ इतना हि कहुँगा कि ’इस रिश्ते का कोई मोल नही है, ये रिश्ता तो सभी रिश्तों मे बेजोड़ है.’

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  7. बेहतरीन चर्चा! आभार...

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  8. ये दोस्ती के रंग खूब खिले ...सुन्दर और बढ़िया चर्चा ....अच्छे लिंक्स मिले ...आभार

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  9. बेहद उम्दा ब्लॉग चर्चा ..........आपका आभार !

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  10. दोस्ती के रंगों से सराबोर ये चर्चा तो बेहतरीन रही...
    आभार्!

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  11. बहुत ही बढ़िया और लाजवाब चर्चा रहा!
    मित्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

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  12. सुन्दर और बढ़िया चर्चा....अच्छे लिंक्स मिले...मेरी पोस्ट भी शामिल करने का शुक्रिया...

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  13. Happy Friendship to all.........:)

    charcha to asusual achchhi hoti hi hai............

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  14. बेहतरीन चर्चा वंदना जी !

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  15. सुन्दर चर्चा

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  16. ह्रदय को छूती हुई रचनाओं का ऐसा संग्रह.... अद्भुत... अनमोल... वंदना जी, बधाई और ऐसे उत्कृष्ट संग्रह में मुझ अकिंचन को शामिल करने हेतु आभार.

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  17. बेहतरीन और लाजवाब चर्चा

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  18. इन रंगों को देख लग रहा है दोस्ती के रंग बहुत मनभावन हैं. अच्छे लिंक्स मिले. बेहतरीन चर्चा.

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  19. बेहतरीन चर्चा..................

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  20. वंदना जी सभी Blog का कोलाज बहुत लाजवाब है. Thanx.

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  21. सुंदर चर्चा.

    रामराम.

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  22. Shukriya Vandana ji ....Meri RAchna ko charcha mein shamil karne ke liye

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