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Wednesday, January 11, 2012

"अचरज में है हिन्दुस्तान!" (चर्चा मंच-755)

मित्रों!
     बुधवार की चर्चा का प्रारम्भ करता हूँ! भाई दिलबाग विर्क बता रहे हैं "यहाँ पर है Catch My Post पर प्रकाशित मेरी कविता पतन*मेरे ख्वाब मेरी ख्वाईशें एक किताब में बंद है! कर देती है दूर हर मुश्किल मेरी, बस एक मीठी सी मुस्कुराहट तेरी! ओ प्रीतम ! ले के आ जा, चेहरे पे मुस्कान। देहरी पे आस लगाये बैठी, आओ ना श्रीमान। चेहरे पे मुस्कान।। तुमसे प्रीत लगी जब साजन, तेरे संग मैं आई।  तुम हो मैं हूँ और हंसीं उन्मादी शाम आओ रच दे प्यार तमाम। अधरों को अधरों की आशा नयनों में स्वप्निल परिभाषा योवन न होए निष्काम। खादी-खाकी दोनों में ही, बसते हैं शैतान। अचरज में है हिन्दुस्तान! अचरज में है हिन्दुस्तान!! यह मेरी वसीयत है. मैं मोहम्मद बिन अब्दुल्लस्सलाम बिन हुमायद बिन अबू मानयर बिन हुमायद बिन नयिल अल फुह़शी गद्दाफ़ी, कसम खाकर कहता हूँ....! फोटोग्राफी का शौक तो हमें भी बहुत है । कई बार ऐसे ऐसे काम भी किये हैं जिन्हें याद कर आज भी हंसी भी आती है और हैरानी भी होती है...दीवाने तो दीवाने हैं --उन्हें जान की परवाह कहाँआज सोच में डूबी .. सोचती हूँ ..क्या हूँ मैं ...? जो मैं हूँ वो हूँ ....या ...? तुम्हारी सोच हूँ मैं ....? हाँ ... तुम्हारी सोच ही तो हूँ ......क्षितिज की तरह ...बहुत दूर हो गयी हूँ मैं ......! जाने क्या कड़वाहट है सियासत लफ्ज में एक दोस्त को दोस्त से दुश्मन बना देती है ये जो साथ बैठ कर चूसते थे गन्ने खेतों में उनमे ही आपस में कड़वे बोल बुलवा देती...! साठ के दशक में जब मैं स्कूल में पढ़ता था, तब हमारी हिन्दी की पुस्तक में थी वह कविता। आज मुझे उसकी पहली दो पंक्तियाँ ही याद हैं...मुझे उस कविता की तलाश हैखुशकिस्मत लोगों की हसीं मजलिस में शामिल नहीं हैं हम । न बढ़ाओ इस ओर अपनी कश्तियाँ साहिल नहीं हैं हम...अग़ज़ल तुम्हारा दोस्त दुखी है... उससे न पूछना, उसकी कातरता की वज़ह, दुख की गंध सूखी हुई आंख में पड़ी लाल लकीरों में होती है...क्योंकि पीड़ा की कोई भाषा नहीं होतीयदि आप ब्‍लॉगर हैं, अच्‍छा लिखते हैं, लीक से हटकर मुद्दे उठाते हैं, पढ़ते भी हैं और फिर भी आपकी पोस्‍ट पर टिप्णियों का अभाव रहता है तो मैं आपको हिट ब्‍लॉगर बनने के धांसू उपाय बतलाता हूँ! गहन गंभीर जटिल विचार बहते जाते सरिता जल से होते प्रवाह मान इतने रुकने का नाम नहीं लेते | है गहराई कितनी उनमें नापना भी चाहते... गहन विचार! खैर कोई बात नहीं...टोटे-टोटे टाट, जीत ले लगा पलीता-- मोह लगे माया ठगे, जगे कमीशन खोर | सत्ता शक्ती के सगे, चमचे लीचड़ चोर | निगोड़े ध्यान से पढ़ते.. तो चारागर बना लेते. जरा कमजोर रह जाते तो कम्पाउंडर बना लेते!  जुटा लिया है मैंने भविष्य से आँख मिलाने का साहस अतीत के डैनों के नीचे कब तक सुरक्षित रहूंगी मैं बाज हैं रहें वे गौरैया भी पँख पसारेगी ही .....! पराशर झील ट्रेकिंग- पण्डोह से लहर इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें। 6 दिसम्बर को सुबह नौ बजे हमारी बस मण्डी पहुंच गई। इसे यहां से साढे नौ बजे चलना था। इस दौरान एक...! 
      हर खुशी हो वहाँ तू जहाँ भी रहे पल्लवी और नेहा--------------एक गीत तुम्हारे लिये...! अब सच तुमको चाहने लगा हूँ! सुनने अटपटा है, लेकिन सच है ,हो सकता है इस लेख के बाद सेकुलरों की नज़रे मेरे ऊपर तीखी हो जाए, गालियाँ भी सुननी पड़े, या अरब कनेक्टेड लोग मेरे ऊपर फतवा जारी करें...भारत में इस्लाम, तलवार के धार पर फैलाई गयी कुरीति है, कोई धर्म नहींअभी तक तो मैं पढ़ते सुनते आया हूँ कि एक ठग ने कैसे किसी को सम्मोहित कर किसी इनसान से उसके हजारों लाखों रूपये हड़प लिए या फिर आधुनिक युग में...इंसानों जैसा दिमाग रख कर ठगी करने वाला शातिर वायरस भी होता है!  जाने कैसे..किसी अस्पृश्य के साथ खाए एक निवाले से कई जन्मों के लिए कोई कैसे पाप का भागीदार बन जाता है जो गंगा में एक डुबकी से धुल जाता है या फिर....! 
     मायावती का चुनाव निशान बदले आयोग...! आज ही मेरी नजर पड़ी है इस ब्लॉग पर जिसका नाम है "बेसुरम्"मेरी ज़िन्दगी की हसीं शाम कर दोअपनी एक ग़ज़ल मेरे नाम कर दो....! हास्य कवि और उनकी कविता! अक्सर हास्य कवियों पर यह आरोप लगते है कि वह लतीफों को पंक्तिबद्ध करके रचनाएँ लिखते है | मगर मेरा मानना है कि हास्य कवि दोहरी भूमिका निभाता है....! अपने न्यू इयर रिज़ोल्यूशन* के मुताबिक़ फ़िर से हाज़िर हूँ. अब भाई लिखना तो है ही... लिखने से क्या होता है ना मन के अंदर का बहुत कुछ बाहर आ जाता है... नही...न्यू इयर रिज़ोल्यूशन का वादा और तुम्हारा अक्स..!इस पर भी  क्या ? ईमानदारी की .....कीमत चुकानी पड़ेगी !!! झूठ से सच को मुहं की खानी पड़ेगी । इतनी धुंध छाई है झूठ की हर तरफ , सच्चाई को अपनी परछाई छुपानी पड़ेगी...! गूगल क्रोम ने बनाया हिंदी टाइपिंग को आसान! इंटरनेट ब्राउज करते हुए हिंदी टाइपिंग करने के बहुत से टूल मौजूद है कुछ वेबसाइट हैं तो कुछ ऑफलाइन टूल्स भी हैं जो आपको हिंदी टाइपिंग की सुविधा देते हैं इंटरनेट ब्राउज करते हुए हिंदी टाइपिंग करने के बहुत से टूल मौजूद है कुछ वेबसाइट हैं तो कुछ ऑफलाइन टूल्स भी हैं जो आपको हिंदी टाइपिंग की सुविधा देते हैं!

अन्त में देखिए-
 

27 comments:

  1. चलिए चर्चा से टिप्‍पणियों का खर्चा तो निकल ही आता है। बहुत सुंदर बदले में बहुत कुछ मिलता है।

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  2. बेशुमार सुंदर लिंक्स से भरी लाजवाब चर्चा ....ऐसी चर्चा में मुझे आश्रय दिया ....आभार ...!!

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  3. समुचित एग्रीगेटरों के अभाव में चर्चामंच बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है

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  4. सुन्दर और सटीक चर्चा |
    पर्याप्त लिंक्स |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  5. एक सार्थक चर्चा शास्त्री जी - सचमुच आपका . इस मंच के माध्यम से विभिन्न रचनाकारों को जोड़ने का प्रयास सफल रहा है
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

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  6. एग्रीगेटरों के अभाव में चर्चामंच बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

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  7. शब्दों की इमारत ,
    खूबसूरत इबारती दीवार.
    खिड़कियाँ,झरोखे हवादार,
    बड़ा सा स्वागत द्वार.
    सुंदर सुसज्जित कक्ष,
    बैठे कई ज्ञानी दक्ष,
    निगोड़े को किया स्वीकार,
    मनभावन स्वागत सत्कार.
    शहनाई बजी इस गली
    बस रूप की चर्चा चली.
    कहीं छल ना प्रपंच.
    धन्य !!! चर्चामंच.

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  8. बड़ी सुन्दर और पठनीय सूत्र।

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  9. मेरी पोस्‍ट को चर्चा मंच में शामिल करने का शुक्रिया. आपने खास तौर पर उसे हाईलाइट किया है. मैं अभिभूत हूं. चर्चा काफी अच्‍छी है.

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  10. वाह ...बहुत ही बढि़या लिंक्‍स का संयोजन किया है आपने ...आभार ।

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  11. सुंदर चर्चा,
    बहुत अच्छे लिक्स

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  12. लगभग सारी रचनाओं में जाने के बाद अंत में यहाँ टिप्पणी कर रहा हूँ । जब भी अच्छी रचनाएँ पढ़ने का मन होता है तो किसी एग्रीगेटर की नहीं बल्कि चर्चा मंच की याद आती है । बहुत बढ़िया लिंक्स का संयोजन । आभार ।

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  13. सुन्दर चर्चा

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  14. बहुत बढ़िया चर्चा हार्दिक बधाई स्वीकारे ...:)

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  15. बेहतरीन प्रस्तुति...
    लिंक देखते हैं बारी बारी..
    सादर.

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  16. नए रचनाकारों को जोड़ना चर्चा मंच का एक अच्छा प्रयास बहुत सुंदर प्रस्तुति,
    welcome to new post --काव्यान्जलि--यह कदंम का पेड़--

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  17. सुन्दर चर्चा.आभार.

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  18. शानदार जानदार हरेक लिंक मुबारक ज़नाब चर्चा -ए -मंच .

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  19. सुन्दर और सटीक चर्चा
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार

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  20. bahut badiya links ke sath charcha prastuti hetu aabhar!

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  21. बहुत ही खुबसूरत लिनक्स दिए है आपने....मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |

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  22. meri rachna 'jaane kaise' ko yahan sthaan dene ke liye hriday se aabhar.

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