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Sunday, April 14, 2013

जय माँ शारदा : चर्चा मंच 1214

"जय माता दी" अरुन की ओर से आप सबको सादर प्रणाम.  आइए चलते हैं आज की चर्चा की ओर
डॉ आशुतोष वाजपेयी
शक्ति भक्ति मुक्ति पथ की प्रदायिनी हो अम्ब
करुणा की मूर्ति नित्य ममता लुटाती हो
संकट में पड़े हुए भक्त की पुकार सुन
उसी क्षण वीणापाणि दौड़ी चली आती हो
धर्म के विनाश हेतु असुर बढे जो कोई
बन रणचण्डिका अनल बरसाती हो
हंस वाहिनी का रूप त्याग कर अम्ब तुम्ही
धारती हो शस्त्र सिंह वाहन बनाती हो
सुशील बाकलीवाल
सर्वधर्म समभाव. सबका मालिक एक.. मंदिर और उसमें स्थापित भगवान की मूर्ति हमारे लिए आस्था के केंद्र हैं। मंदिर हमारे धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं और हमारे भीतर आस्था जगाते हैं । किसी भी मंदिर को देखते ही हम श्रद्धा के साथ सिर झुकाकर भगवान के प्रति नतमस्तक हो जाते हैं।
Rekha Joshi
हे ईश
झुकाये अपने शीश
तुझको रहा पुकार
आज तेरा परिवार
............................
Praveen Malik
माँ की जोत जली है ,
हर तरफ हुयी रौशनी है !
सबके दिल में वास करेगी ,
माँ सबका बेडा पार करेगी !
पाप और दुष्कर्म हरेगी ,
जीवनपथ को निर्मल करेगी !
मन में शीतल उमंग भरेगी ,
नव - चेतना जाग्रत करेगी !
Purnima Sharma
भारत एक धर्मप्राण देश है और यहाँ का जनमानस धर्म पर अवलम्बित है | जीवन के सभी छोटे बड़े कार्य यहाँ धर्म के आधार पर व्यवस्थित होते हैं | धर्म की परिभाषा करते हुए कहा गया है “धारयतीति धर्मः” अर्थात् समाज या व्यक्ति को धारण करने वाले तत्व को धर्म कहा जाता है |
udaya veer singh
युगों से चली आ रही प्राचीन परम्पराओं के निर्वहन में वैसे समस्त ऋतुओं का व उनमें आने वाले पर्वों का अपना अलग महत्त्व है | इस तथ्यात्मक सत्य से इनकार नहीं किया जा सकता ,फिर भी ग्रीष्म ऋतु के आरंभिक चरण के सोपानों में आने वाले पीत पर्वों का अद्वितीय आलोक है |
Kumar Gaurav Ajeetendu
सहते जाने की हुई, सारी सीमा पार।
तुमको वतन पुकारता, लड़ो आर या पार॥
लड़ो आर या पार, नहीं अब कोई चारा,
हुआ हँसी का पात्र, जगत में भाईचारा।
चलो उठा लो शस्त्र, रहो मत दुखड़े कहते,
करवाओ एहसास, शत्रु को हम जो सहते॥
Kumar Gaurav Ajeetendu
मटकू गदहा आलसी, सोता था दिन-रात।
समझाते सब ही उसे, नहीं समझता बात॥
मिलता कोई काम तो, छुप जाता झट भाग।
खाता सबके खेत से, चुरा-चुरा कर साग॥
बीवी लाती थी कमा, पड़ा उड़ाता मौज।
बैठाये रखता सदा, लफंदरों की फौज॥
इक दिन का किस्सा सुनो, बीवी थी बाजार।
मटकू था घर में पड़ा, आदत से लाचार॥
Shalini Rastogi
कोटि कला कित सीखि सखी, इन नैनन ने नित वार करै की|
कौन अहेरि सिखाय दियो सखी, ऐसन युक्ति सिकार करै की|
बैनन सीख रहे नव जानत, मूक कला तकरार करै की|
बान कमान अनंग छुटै जब, जाय लगे हिय मार करै की|
AjitGupta
प्रकृति अपने यौवन पर है, बगीचों में जहाँ तक नजर जाती है, फूल ही फूल दिखायी देते हैं। भारतीय त्योहार प्रकृति पर आधारित हैं इसी कारण यह मौसम त्योहारों का भी रहता है। अभी होली गयी, फिर नया साल आ गया और अब गणगौर। त्योहारों के कारण परिवारों में प्रेम भी फल-फूल रहा है।
Aamir Dubai
डियर रीडर्स , आज की पोस्ट अरब अमारात से भारत ,और भारत से अरब अमारात यात्रा करने वालों के लिए है। क्यूँ की अरब अमारात में भी मास्टर्स टैक के पाठक और प्रशंशक हैं ,इसलिए कुछ पोस्ट्स और कुछ जानकारियां उनके लिए भी होनी चाहिए।
Rajendra Kumar
संगत का असर सब कुछ बदल देता है। संगत अर्थात् दोस्ती, मित्रता, साथ है। संगत के कारण चाल-ढाल, पहरावा, खानपान, बात करने का तरीका, चरित्र सब कुछ में बदलाव आ जाता है।इसी बात को हम एक कहानी द्वारा देखते है
Ranjana Verma
मुझे सपनों की दुनिया में ले चल
मुझे ख्वाबों की दुनिया में ले चल
आरजू है यही तेरे हाथ में मेरा हाथ हो
नीले गगन के नीचे सदा साथ हो
कोई ऐसी जगह ले चल ..........
Ashok Kumar Pandey
यह आलेख परिकथा के लोक-कला विशेषांक में छपा है.
मैं एक पोस्टर हूँ
सड़क या दीवार पर
चिपका हुआ इश्तहार
तुम चाहो
सैनिक-ट्रक के नीचे कुचल सकते हो
फाड़कर चिन्दी-चिन्दी कर सकते हो!
पर उससे क्या ?
मैं ज़माने के दर्द को
तोबेनकाब कर चुका हूँ,
कुचल कर समझ लो
मर चुका हूँ!
(पुरुषोत्तम पाण्डेय)
(१)
हवाई जहाज के जमीन पर उतरते समय अन्दर हवा का दबाव बहुत बढ़ जाता है इसलिए बहुत से यात्रियों के कान में जबरदस्त दर्द होने लगता है. इससे बचने के लिए यात्रियों को कुछ टॉफियां/गोलियां दी जाती हैं, ताकि उनको चबाते हुए दबाव का असर कम महसूस हो.
Yashoda Agrawal
वो आ जाए, ख़ुदा से की दुआ अक्सर
वो आया तो, परेशाँ भी रहा अक्सर
ये तनहाई ,ये मायूसी , ये बेचैनी
चलेगा कब तलक, ये सिलसिला अक्सर
न इसका रास्ता कोई ,न मंजिल है
‘महब्बत है यही’ सबने कहा अक्सर
स्वप्न मञ्जूषा
'नारीवाद' एक ऐसा शब्द है जो किसी भी नारी के साथ लग जाए तो 'नर' उससे भय खाने लगते हैं। आज जिसे देखो वही, नारीवाद को जानने, समझने का मुगालता पाले रहता है। जो भी स्त्री, नारी के पक्ष में बोले या लिखे उसे, उससे बिना पूछे ही, नारीवादी का तमगा पहना दिया जाता है। लेकिन सच तो ये है कि नारीवाद को सही अर्थों में परिभाषित किया ही नहीं गया है।
डॉ शिखा कौशिक ''नूतन ''
एक राज्य के मुख्य मंत्री महोदय महिला उद्यमियों के कार्यक्रम में महिला -सशक्तिकरण एवं भ्रूण हत्या मुद्दों पर बोल रहे थे .पूरे कार्यक्रम का प्रसारण राष्ट्रीय चैनल पर घर-घर प्रसारित किया जा रहा था . दो रिक्शावाले भी टी .वी .की एक दुकान के सामने खड़े होकर उनका मनमोहक भाषण सुनने लगे .मुख्यमंत्री जी धाराप्रवाह बोल रहे थे -
हंसराज “सुज्ञ”
उस ज्ञान का कोई अर्थ नहीं, जिसके साथ बुध्दि, विवेक, सजगता और सावधानी न हो।
हंस: श्वेतो बक: श्वेतो को भेदो बकहंसयो: |
नीरक्षीरविवेके तु हंस: हंसो बको बक: ||
रामकृष्ण परमहंस ने अपने शिष्यों से वार्तालाप में एक बार बताया कि ईश्वर द्वारा बनायी गयी इस सृष्टि के कण-कण में परमेश्वर का वास है।
Asha Saxena 
है प्रेरित
नव विचारों से
ना ही बंधा
किसी बंधन से
है उद्बोधक
सरल सहज
नव सोच का
उत्साह से परिपूर्ण
नव गीत
नव विधा में
कृष्णा वर्मा
1.
ईर्ष्या की आग
लग जाए दिल में
भड़कती अखंड
होती प्रचंड
रिश्ते हों खंड-खंड
लुटे चैन आन्नद।
2.
द्वेष भट्टी में
लगे जो दहकने
प्रतिशोध की आग
भस्म विवेक
धारे विष रसना
दानव जाए जाग।
3.
तीर लगे जो
निकल कमान से
हो जाता उपचार
तीर द्वेष का
बेंध जाए यदि, तो
नहीं रोगोपचार।
4.
बोल को बोलो
सोच- समझ कर
बोलना हो दोधार
जाँच-परख
तुले बुद्धि- बाट से
सही नपेगा भार।
Vandana Gupta
दोस्तों नेता जी सुभाष इंस्टीटयूट (NSIT) KE IEEE BRANCH में आयोजित "WOMEN EMPOWERMENT AND WOMEN SECURITY "प्रतियोगिता में मेरी कविता "शतरंज के खेल में शाह और मात देना अब मैंने भी सिख लिया है " को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ और एक टी शर्ट ,२ ० ० रूपये का चैक , एक पैन और सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ ।
आनंद कुमार द्विवेदी
जिस विज्ञान ने हमें मिलाया था
अंततः उसी ने छीन भी लिया
एक फोन
एक मेल
और बस नीला गहरा आसमान
जिसका कहीं कोई ओर छोर नहीं
मैं चाहता हूँ केवल इतना
कि
मेरे मरने की खबर
तुम तक पहुँचे
Anita
कभी-कभी बादल बरसते हैं तो बरसते ही चले जाते हैं, न जाने कितने हजार युगों से बादल बरस रह हैं, पुनः पुनः जल, धरा से गगन में उठता है, गिरता है. पुनः पुनः वृक्ष पनपते हैं, नष्ट होते हैं. हम भी न जाने इस धरा पर कितनी बार आ चुके हैं. एक बार और आए हैं, और स्वयं का परिचय हमें मिला है, पिछले जन्म में भी हो सकता है किसी ने हमें यह मार्ग बताया हो
Virendra Kumar Sharma
(१) तेज़ तर्रार नहाने के साबुन और कपडे धोने में इस्तेमाल होने वाले किस्म किस्म के पाउडरों की परिष्कृत किस्म ही इस्तेमाल में लीजिये .तेज़ किस्में चमड़ी से तेल ले उडती हैं चमड़ी शुष्क और रुक्ष पड़ जाती है . (२)दिन भर में किसी भी समय बस एक केले का सेवन आपको ऊर्जित कर जाता है . (३)BLOOD TEST MAY HELP PREDICT LUNG CANCER RISK
Dilip Soni
एक गीदड़ भूख और प्यास से परेशान भटकते भटकतें जंगल से बाहर एक गाँव में आ गया .गाँव में घुसते ही उसे एक कागज का टुकड़ा दिखाई दिया ,जिस पर थोड़ी बहुत मिठाई लगी हुई थी ,उसको अच्छी तरह से चाटने के बाद भी मीठा होने की वजह से उसने उसको मुंह में दबाये रखा और आगे बढ़ गया .
Mukesh Srivastava
औरत जो सड़क पे पत्थर तोडती है
हथौड़े की हर चोट पे खवाब जोडती है
पसीने मे तरबतर बदन छुप नहीं पाता
सर झुका के आँचल से बेबसी पोछती है
लुच्चे ठेकेदार को क्या पता वह औरत
उसे देख कर हिकारत से मुह मोडती है
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
कहाँ चले ओ बन्दर मामा,
मामी जी को साथ लिए ।
इतने सुन्दर वस्त्र आपको,
किसने हैं उपहार किये ।।
हमको ये आभास हो रहा,
शादी आज बनाओगे ।
मामी जी के साथ, कहीं
उपवन में मौज मनाओगे ।।
डॉ•ज्योत्स्ना शर्मा
सुन सखी ! कहाँ विश्राम लिखा !
मैंने तो आठों याम लिखा ।
पथ पर कंटक, चलना होगा,
अँधियारों में जलना होगा ।
मन- मरुभूमि सरसाने को
हिमखंडों- सा, गलना होगा ।
शुभ, नव संवत्सर हो सदैव ,
संकल्प यही सत्काम लिखा।।
इसी के साथ आप सबको शुभविदा मिलते हैं अगले रविवार को . आप सब चर्चामंच पर गुरुजनों एवं मित्रों के साथ बने रहें. आपका दिन मंगलमय हो
जारी है ..... "मयंक का कोना"
(1)
मैं पुरुष हूँ !

*मैं पुरुष हूँ ,* *मैं एक माँ का बेटा हूँ ,
* *बहन का भाई हूँ और* *बेटी का पिता हूँ 
!* *घर से कदम जब बाहर निकलते हैं* 
*और देखता हूँ किसी महिला को* 
*उम्र के लिहाज से* *मन में भाव जगते हैं !* *
(2)
रात मेरे सपने में .....

रात मेरे सपने में मेरी दीदी आई थी मेरे दर्द का एहसास ...शायद ... उसकी रूह को खींच लाई थी .... देख ग़मगीन मुझे . उसने .सिर्फ इतना हीं कहा ... जिसे छोड़ चुकी हो क्यों,... उसे..? याद करती हो.... ? 
(3)
आई बैसाखी

*आई बैसाखी दिल में कितने उजाले हैं,* 
*सौगात लायी है , हम सौगात वाले है...
(4)
"आँसुओं के मोती"
Pratibha Verma


आँसुओं के मोती हम पिरो न सके, तुम्हारी याद में हम रो न सके। जख्म कुछ इतना गहरा दिया तुमने, कि  कोई दवा  उसे भर न सकी। लोग कहतें हैं अपनों का प्यार भरता है, ऐसे जख्मों को। पर गर अपने ही जख्म दें , तो दवा कौन करे??

37 comments:

  1. आज की चर्चा में तो हमारा रविवार रविवारमय हो गया अरुण जी!
    आपने पाठकों को पढ़ने के लिए बहुत अच्छे लिंक दिये हैं।
    आभार आपका!

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  2. आज का रविवारीय अंक बेहतरीन है
    समय भी है
    लिंक्स भी विविधता से परिपूर्ण हैं
    भाई अरुण जी
    आपने मेरी पसंदीदा ख्याल को यहाँ स्थान दिया
    आभार...
    सादर

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  3. बहुत - बहुत शुक्रिया शास्त्री जी ....मेरी कविता को सराहने के लिए।।

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  4. sundar prastutiyo ka khoobshurat sankaln

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  5. बहुत खूबसूरत है सबकुछ , एक गहरी संतृप्ति लिए हुए !

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  6. बहुत ही सुन्दर चर्चा..

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  7. सुन्दर लिनक्स लिए चर्चा .... आभार

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  8. अरून भाई आपने बहुत सुन्दरता से आज सूत्र पिरोये हैं। रविवार के अवकाश का उपयोग हो जाएगा। आपके श्रम के लिए आपका साधुवाद और आभार!

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  9. अरुणजी जी, मेरी कविता को साहित्य चर्चा मंच में शामिल करने के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया.......यह मेरी पहली कविता है जिसे अपने चुना है. इसके लिए आपको आभार ........आपने आज का चर्चा मंच बहुत सुंदर सजाया है.

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  10. सुंदर रंगबिरंगे सूत्रों से सजी सुंदर चर्चा.

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  11. सुन्दर प्रस्तुतिकरण के साथ बेहतरीन लिंक्स का उत्तम चयन । आभार सहित...

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  12. अरुण बहुत ही बढ़िया सूत्र लिए हैं आपने चर्चा में
    मैंने सभी सूत्र पहले पढ़े उन पर comments किये
    तब आपकी बारी आई है
    बधाई स्वीकारें
    शुभाशीष
    ''माँ वैष्णो देवी ''

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  13. गुरु जी आपके सूत्र भी बहुत रोचक थे
    आपको बधाई
    सादर
    ''माँ वैष्णो देवी ''

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  14. बेहतरीन लिंकों के साथ सुन्दर प्रस्तुतीकरण.माँ आप पर कृपा बनायें रखें.

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  15. कई सूत्र दिये हैं आज |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  16. मेरी रचनाओं को यहाँ स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.........

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  17. Thanks to Mr.Arun.
    masters tach ki post charcha manch par shamil karna mere liye samman hai.

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  18. बहुत सुंदर चर्चा अरुण
    पहली नजर में ही लग रहा है कि कितनी मेहनत हुई है।
    शुभकामनाएं

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  19. सुन्दर प्रस्तुतिकरण सुन्दर चर्चा..

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  20. बहुत सुन्दर लिंक्स संजोये हैं अरुण ………………सुन्दर प्रस्तुतिकरण के साथ बढिया चर्चा

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  21. आदरणीय ..
    मेरी रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद... बहुत ही बढ़िया रचनाओं से सुसज्जित चर्चा के लिए आपको बहुत बहुत बढ़िया एवं बाकि सभी रीडर्स, एवं साथ ब्लोगर्स को भी नमन ...

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  22. बहुत बढ़िया सुंदर लिंक्स,,,,प्रभावी प्रस्तुति के लिए बधाई,,,अरुन जी आभार

    Recent Post : अमन के लिए.

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  23. बहुरंगी चर्चा .....धन्यवाद और आभार .........

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  24. बहुत बहुत धन्यवाद ,मेरे जेसे नए ब्लॉगर को इस मंच पर स्थान देने के लिए .

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  25. रंग बिरंगी चर्चा के लिए हादिक बधाई अरुण बेटा,मेरी रचना शामिल करने पर आभार ,आशीर्वाद

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  26. भक्ति रस से जिसका आगाज हुआ ऐसी सुंदर चर्चा के लिए बधाई..आभार !

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  27. श्रेणीबद्ध चर्चा!! गम्भीर संकलन के साथ शानदार लिँक

    सुज्ञ ब्लॉग की पोस्ट पर चर्चा के लिए आपका आभार!!

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  28. बहुत सुन्दर विस्तृत बेहतरीन चर्चा हेतु हार्दिक बधाई प्रिय अरुन शर्मा जी|

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  29. प्रिय अरुण-
    विस्तृत / सुन्दर चर्चा-
    चार चाँद मयंक के-
    शुभकामनायें-

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  30. This comment has been removed by the author.

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  31. बहुत सुन्दर लिंक संयोजन है अरुण ... मुझे इस सुन्दर चर्चा में शामिल करने के लिए धन्यवाद!

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  32. sundar bhaav saagar mein meree bhaavaabhivyakti ko mile aapke sneh aur sammaan ke liye main hriday se aabhaaree hun ...bahut dhanyawaad ...shubh kaamanaayen .
    saadar ..
    jyotsna sharma

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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