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Wednesday, April 17, 2013

चर्चामंच - बुधवारीय चर्चा ---- ( 1217 साहित्य दर्पण )

चर्चा मंच के सभी पाठक और समस्त परिवार को शशि पुरवार का प्रणाम , साहित्य के खजाने को आगे बढ़ाते हुए हम पुनः साहित्य की घाटियों में सफ़र करेंगे , उम्मीद है आपको यह घाटियाँ पसंद आएँगी , तो चलिए आपके पसंदीदा सफ़र की 
शुरुआत करते है , आप सभी का दिन मंगलमय हो ,  
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अमृता तन्मय
सेदोका जुगलबन्दी
आज पहली बार त्रिवेणी पर हम सेदोका जुगलबन्दी  पेश कर रहे हैं । आशा करते हैं कि आपको हमारा यह प्रयास अच्छा लगेगा ।

"बूढ़ा बरगद जिन्दा है..." (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


अभी गाँव के देवालय में बूढ़ा बरगद जिन्दा है।
करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

सबसे शक्तिशाली मनुष्य की वाणी है ....
मनुष्य को जीवन में हमेशा अपनी वाणी का सदुपयोग करना चाहिए . एक बार एक परिवार में दो भाई इस बात को लेकर आपस में लड़ रहे थे की दुनिया में सबसे शक्तिशाली क्या है ...
इंतज़ार 
चाँद से आज मै पूछती हूँ सवाल ? विरहन को तड़पाते हो तुम जहां , प्रिय मिलन को रिझाते क्यों वहां? चांदनी से मिले जहां ठंडक किसी को , जलाती वही ठंडक क्यों विरहन को ? 
इक ख़्वाब जरुरी है
*खूबसूरती देखने के लिये , वो आँख जरूरी है *
 *दिल तक उतरने के लिये ,इक आब जरुरी है 
वो तुम ही तो थे
*मेरी नींदों मे ख्वाब बन कर रहते थे,* *वो तुम ही तो थे ,* 
*जिसके सपने मेरी आँखों ने सँजोये थे,* *वो तुम ही तो थे
हाय रे बाब्स! तूने ये क्या किया
हाय रे बाब्स! तूने ये क्या किया 
एक अखाडा यहाँ लगा दिया 
और ब्लोगर्स के बीच घमासान मचा दिया 
तू तो कुछ दिन मे चला जायेगा 
मगर ना जाने किन किन को लडवा जायेगा ...
आगे देखिए.."मयंक का कोना"
(1)
तेरी याद, फिर तेरी याद के, बोझ तले दब जाती है .....
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(2)
कौन मजबूत? कौन कमजोर ?

*इम्तिहान एक दौर चलता है जीवन भर ...
(3)
जहाँ गम भी न हों आंसू भी न हों...

अक्सर सुनते हैं.....औरतों का सम्मान करो, औरतों का आदर करो, उनकी रक्षा करो, उनके हित के लिए ये करो , वो करो, उनको ........औरतें बेहद खुश सोच कर कितनी चिंता है सभी को। फिर बैठती है सब्र से हाथ में हाथ रखे, आएगा कभी कोई तारन हार और तब उनके सारे दुःख दूर हो जायेंगे। वैसे ये बात कुछ विशेष वर्गों के लिए है , केवल पुरुषों के लिए ही नहीं है ...
(4)
शोध की खिड़की :ये है बोम्बे मेरी जान
कबीरा खडा़ बाज़ार में पर Virendra Kumar Sharma
(5)
बड़ी हुई बच्ची

43 comments:

  1. अच्छे लिनक्स लिए चर्चा ....आभार

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  2. शशि जी,
    सारे लिंक्स पढ़े -बहुरंगी रचनाएं और सुन्दर-चर्चा ,आपका श्रम हमारा आनन्द बन गया.आभार 'लालित्यम्' की रचना शामिल करने के लिए भी!

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  3. चर्चा की बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    शशि पुरवार जी चर्चामंच - बुधवारीय चर्चा ---- ( 1217 साहित्य दर्पण ) को सजाने में आपने बहुत परिश्रम किया है।
    आभार आपका...!
    नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
    सादर!

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  4. कई सूत्र और आप के परिश्रम की झलक दिखलाता चर्चा मंच|मुझे बहुत पसंनता हो रही है कि आपने मेरी रचना को भी आज शामिल किया है |
    आशा

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  5. बहुत सुन्दर चर्चा मंच मुझ नाचीज को शामिल करने के लिए आपका दिल से शुक्रिया शशि जी |

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  6. Replies
    1. परिश्रम के साथ साथ सुंदर लिंक्स ,
      मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए,आभार शशि जी...!
      नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाऐ ,,,,

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  7. शशि पुरवार जी की सजाई चर्चा में ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ का लिंक देखा,
    अच्छा लगा.
    आभार व शुभकामनाएं।

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  8. बहुत बढ़िया चर्चा.....
    सभी लिंक्स अच्छे लगे.

    आभार
    अनु

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  9. सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

    BHARTIY NARI
    PLEASE VISIT .

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  10. उत्कृष्ट प्रस्तुति
    शुभकामनायें --

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  11. बहुत ही सुन्दर सूत्र..आभार

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  12. बहुत सुंदर लिंक्स ,
    मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए,आभार आपका...!

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  13. बहुत सुन्दर चर्चा सजाई है सखी हार्दिक बधाई अब चलती हूँ लिंक्स पर

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  14. Very Nice Charcha.Masters tach post charcha me shamil karne ka aabhar.

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  15. बहुत सुन्दर चर्चा ...

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  16. शशि जी , बहुत सुन्दर चर्चा ...मुझे शामिल करने का शुक्रिया ..आज जब मेल खोली , कमेंट्स देखे ..तो कुछ पंक्तियाँ मन में घुमड़ने सी लगीं ...
    कुछ लोग बुलाते हुए से लगते हैं
    कुछ इस तरह से पास आते हुए से लगते हैं ..

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  17. शशि जी,आपका शुक्रिया मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए, सुन्दर चर्चा

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  18. अच्छी चर्चा , जारी रखिये ...

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  19. बहुत सुंदर अच्छी चर्चा , मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए,आभार..!

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  20. शशि जी आपकी मेहनत रंग लाई है
    आपने बहुत सुंदर links कि चर्चा सजाई है
    मेरा आपकी कृपा से [विनोद अग्रवाल ]

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  21. शशि पुरुवार जी आपका स्वागत है बहुत सुन्दर और मेहनत से चर्चा लगाई है उम्मीद है आपके सानिध्य मे चर्चा मंच नयी ऊँचाइयाँ छुयेगा।

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  22. बहुत विस्तृत लिंक्स ....
    बहुत मेहनत से संजोयी है आज की चर्चा ... शुक्रिया मुझे भी शामिल करने का ...

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  23. शशि जी बहुत ही सुन्दर चर्चा हार्दिक आभार.

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  24. सुन्दर लिंक्स...बहुत रोचक चर्चा...

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  25. बहुत श्रम से सजाया है चर्चामंच को...सुंदर लिंक्स...पतीली का दर्द समझने के लिए आभारः)

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  26. बहुत सुन्दर लिंक संयोजन | मेरी रचना को सम्मलित करने के लिए आभार और शुक्रिया अदा करना चाहूँगा |

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  27. मनोरम , मनोहर एवं अति मनभावन चर्चा ..शशि जी आपको हार्दिक शुभकामनाएं..

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  28. बाप रे !
    इतने लोग इतना कुछ कह गए अब हम का कहें। अब तो लग रहा है हम कुछ भी कहेंगे कम ही लगेगा :)

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  29. हमारे देश के नेता-मंत्रियों को केवल 'खाना' आता है,
    बनाना कुछ नहीं आता.....

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  30. एक से बढ़कर एक लिंक्स का
    सुंदर संग्रह
    सभी रचनाकारों को बधाई
    शानदार संयोजन की भी बधाई

    मुझे शामिल करने का आभार

    ReplyDelete
  31. बहुत सुन्दर लिंक्स..................

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    Replies
    1. sabhi sadayon aur mitro aap sabhi ka aabhar , aapna itna sneh pradaan kiya , aur aapko links acche lage to hamari mehanat sarthak ho gayi , maafi chahungi doston jaroori karye ke karan der se aayi . ssneh -shashi

      Delete

  32. शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013
    " केहि विधि प्यार जताऊं ..........."


    कबहुँ आप हँसे ,
    कबहुँ नैन हँसे ,
    कबहुँ नैन के बीच ,
    हँसे कजरा ।

    कबहुँ टिकुली सजै ,
    कबहुँ बेनी सजै ,
    कबहुँ बेनी के बीच ,
    सजै गजरा ।

    कबहुँ चहक उठै ,
    कबहुँ महक उठै ,
    लगै खेलत जैसे,
    बिजुरी औ बदरा ।

    कबहुँ कसम धरें ,
    कबहुँ कसम धरावै ,
    कबहूँ रूठें तौ ,
    कहुं लागै न जियरा ।

    उन्है निहार निहार ,
    हम निढाल भएन ,
    अब केहि विधि ,.
    प्यार जताऊं सबरा ।

    प्रस्तुतकर्ता Amit Srivastava पर 6:29:00 pm

    क्या बात है दोस्त भाषिक (आंचलिक )सौन्दर्य सौष्ठव का शिखर है यह रचना .

    ReplyDelete
  33. सुंदर लिंक्स ...

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  34. बढ़िया रचवा श्रृंगार किया है चर्चा मंच का बढ़िय सेतुओं की कालीन बिछाई है .

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  35. अभी गाँव के देवालय में बूढ़ा बरगद जिन्दा है।
    करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।।

    गहरी संवेदनाओं से प्रसूत है यह रचना .



    "बूढ़ा बरगद जिन्दा है..." (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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  36. मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार | सुन्दर मंच सजाया |

    ReplyDelete

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