Followers


Search This Blog

Wednesday, April 03, 2013

“शून्य में संसार है” (चर्चा मंच-1203)

मित्रों!
बुधवार के लिए कथाचर्चा का शुभारम्भ करता हूँ! देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक…!
 
          लिवर फिट तो बॉडी हिट...मगर कैसे हो लीवर हिट? बाहर की दुनिया में तलाशता हुआ उन बिखरे टुकड़ों को उनकी तीखी नोंकों की चुभन अब महसूस कर सकता हूँ मैं खुद के ही भीतर। अब प्रश्न उठता है कि...बोल तेरे साथ क्या सुलूक किया ?...क्योंकि हृदय के स्पन्दन में उगतीं हैं कवितायें...! तभी तो खारे आँसू के बारे में रचनाधर्मी कल्पनाएँ लगाते हैं कि आंसू भी कभी खारा ना होता ! अब प्रश्न उठता है कि वैल्यू ऑफ लाइफ कहाँ है...देश में या विदेश में ? जहाँ पर  कुछ सुकून हो और कुछ आराम हो...! लेकिन हम भारतीय चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहें होली की हुडदंग तो होगा ही...! तभी तो समय-सयम पर विदेशियों द्वारा लूटा गया वतन है ,ये अफवाह नहीं है...! लेकिन हमकोकोई परवाह न पहले थी और न अब है कुछ टूटने से पहले ....ही हमको उपाय करना होगा। नदी की खुशियाँ बहते रहने में हैं और रुकने में उसका अन्त है। अन्यथा चमन की सोनचिरैया कहती रहेगी एक जंगल में मैं थी, एक जंगल मुझमें था...! अब प्रश्न उठता है कि कैसे मीमांसा करे कोई...? राही अनजान राहों का !
        "खुली आँखों से ख्वाब" देखने से कुछ हासिल होने वाला नहीं है! सभी को है चाह लेकिन आड़े आता है... प्रेम/तलाश/अँधेरा...! ऐसे में त्रयंबकेश्वर- गजानन महाराज संस्थान व राम तीर्थ...भी कोई मदद करनेवाले नहीं हैं। सम्वेदना निःशब्द हैं सब जगह तो पार्टीबाजी का आलम है। ख़बर आयी है कि समीर लाल ने पार्टी बनाई खुद ही बने आम ब्लागर पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष...! आप भी चाहो तो पराई प्यास....को अपनी बना लो और गठन कर लो दल-दल का क्योंकि दलदल में फँसना ही है। जीना है तो मेरे साथ चलना सीखो! अभी तो नहीं लेकिन एक दिन तो जागोगे तुम? देखने में आया है कि **~अक्सर....~** सब लोग नज़रिया अपना अपना ही अपनाते हैं।
          कंप्यूटर माउस का कमाल । तो देखिए ज़नाब...अपना कंप्यूटर चुटकियों में बंद करें..मत कीजिए हिंदू धर्म को पुनर्परिभाषित करने का प्रयास...! यह तो समय-समय पर लोग करते ही रहे हैं...चले आओ न हमसफ़र  और समझाते रहे हैं..गॉव और शहर में अंतर क्या होता है लेकिन खुद शहरों का व्यामोह नहीं छोड़ पाते हैं। सब के सब बन गये हैं महात्मा यानि सोचने वाला गधा...! क्या करें..सतरंगी संसार है यह तो...! यूजीन ओ नील का आशियाना – डो हाउस ( Tao House ) के माध्यम से हमें यूजीन ओ नील के अति संवेदनशील हृदय तथा उनकी सदाशयता का परिचय तो मिलता ही है हम यह भी जान पाते हैं कि मन की अथाह गहराइयों तक उतर जाने की भी उनमें अद्भुत क्षमता थी ! यहाँ तक कि अपने प्रिय कुत्ते के मन की भावनाओं का भी उन्होंने इस वसीयत में जिस कुशलता से चित्रण किया है वह अद्भुत एवँ विलक्षण है ! तभी तो प्यास प्यासे को फिर नदी के पास लेकर आ गयी... और उस जब "वार्तालाप" का समय मिला तो कुछ उलझने सुलझती प्रतीत हुईं! लोगो ने कहा…………. अगर जिंदगी को जीना है; तो काँटो से सीखो, कलियो से सीखो, बादल से सीखो, मै सीखता रहा हर एक बंदे की नुमाईश पर “कुदरत की इकाईयाँ”

25 comments:

  1. आज की संक्षिप्त किन्तु सारपूर्ण चर्चा में आपने मेरे आलेख को भी सम्मिलित किया आभारी हूँ ! पठनीय लिंक्स उपलब्ध कराने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

    ReplyDelete
  2. आभार
    अन्सार भाई जान की रचना ::प्यास::
    फिर नदी के पास लेकर आ गयी...
    जो मैंने अपनी धरोहर में गलत नाम से पोस्ट करदी थी
    होली बीती तो होश आया
    सुधार कर रि-पोस्ट की हूँ कल

    ReplyDelete
  3. सार्थक पठनीय लिंकों की बेहतरीन चर्चा एक नए अन्दाज में,आभार आदरणीय.

    ReplyDelete
  4. नये अंदाज में सुंदर चर्चा,,,
    मेरी पोस्ट को मंच में शामिल करने के लिए आभार,,शास्त्री जी,,,

    ReplyDelete
  5. सारपूर्ण सार्थक चर्चा

    ReplyDelete
  6. बढिया लिंक्स
    अच्छी चर्चा

    ReplyDelete
  7. bahut hi manoranjak prastuti ....Carcham manch ka ya naya look mnbhavan laga .....meri rachana ko sammilit kiya eske liye aabhar .

    ReplyDelete
  8. बहुत रोचक वार्तामयी चर्चा

    ReplyDelete
  9. सुन्दर चर्चा
    शास्त्री जी को बधाई और आभार्

    ReplyDelete
  10. सार्थक चर्चा.

    aabhaar.

    ReplyDelete
  11. आज की चर्चा का यह अंदाज़ अच्छा लगा सर!
    हमारी पोस्ट शामिल करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद!


    सादर

    ReplyDelete
  12. कार्टून को भी सम्‍मि‍लि‍त करने के लि‍ए आपका वि‍नम्र आभार

    ReplyDelete
  13. सुंदर प्रस्तुति .NaapTaul.com ko maine koi order nahi diya... sachet karne ke liye aabhar..

    ReplyDelete
  14. सभी लिंक्स बहुत ही संजोए हैं सर!
    मेरी रचना को स्थान देने का आभार!
    ~सादर!!!

    ReplyDelete
  15. बहुत बढ़िया चर्चा...
    हमारी पोस्ट शामिल करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद...

    सादर
    अनु

    ReplyDelete
  16. गुरूदेव आपका हर प्रयोग अनूठा होता है। चर्चा का यह नया अंदाज ही आज का सबसे बड़ा आकर्षण है। इतने सुन्दर लिंक्स उपलब्ध कराने के लिए आपका आभार!
    इस अंक में मुझे स्थान देने और वह भी दोबार स्थान देने के लिए आपका विशेष आभार!

    ReplyDelete
  17. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति....

    ReplyDelete
  18. aapka bahut aabhaar mayank daa ,acchi charchaa ke liye bahut badhaai

    ReplyDelete
  19. बेहतरीन प्रस्तुति
    मन को छूती अनुभूति सुंदर अहसास

    ReplyDelete
  20. बहुत बढ़िया चर्चा...
    हमारी पोस्ट शामिल करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद...

    सादर
    प्रतीक

    ReplyDelete
  21. मेरी प्रस्तुति को यहाँ शामिल करने और प्रोत्साहित करने के लिए कोटि-कोटि धन्यावद "शास्त्री" सर

    http://vkashyaps.blogspot.in/

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।