चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, February 27, 2015

"परीक्षा के दिन ... " (चर्चा अंक-1902)

मित्रों।
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
आदरणीय राजेन्द्र कुमार जी 
डेढ़ माह के लिए बाहर हैं।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 
(डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
--
--
--

ये बिंदिया 

मन का पंछी पर शिवनाथ कुमार 
--

शीर्षकहीन 

satywan verma saurabh 
--
--

बचपना 

कभी गिरना, कभी उठना, 
कभी रोना, कभी हँसना । 
कभी सोना, कभी जगना, 
कभी हाथो के बल चलना ॥ 
माँ की एक झलक के लिए, 
कभी रोना, सुबकना । 
शायद यही है, मेरा बचपना... 
हिन्दी कविता मंच पर ऋषभ शुक्ला 
--
--

शहर 

निविया पर Neelima Sharma
--
--

मेरा दिल 

गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 
--
--
--

रोज़ 'मुसाफिर' सा फिरते हैं 

तेरी आस लगाये बैठे; 
गुज़रे जाने दिन कितने है। 
अब तो ये आलम है देखो; 
लोग मुझे पागल कहते हैं... 
पथ का राही पर musafir 
--
--

आपका एक आराधक 

(वही 90 फीसद मूर्खों वाला) 

हे! पक्ष-विपक्ष के देवतागण 
अगर संभव तो आप सभी देवासूर संग्राम के 
इस धर्मयुद्ध को बन्दकर 
इस तुच्छ राष्ट्र के बारे में सोचिए। 
क्योंकि देर हो जाने के बाद 
हाथ मलते रह जाएगें... 
स्वयं शून्य पर Rajeev Upadhyay 
--
--

लोरी ! 

अनुभूतिपरकालीपद "प्रसाद" 
--

तार - तार छाया की चुनरी 

मुरझे सब हरियाली - जैसे , 
बदले गए सूरज के तेवर ; 
गरमी के काफ़िले आ गये , 
आज अतृप्ति धरे कन्धों पर... 
--
खुशियों की सौगात लिए होली आई है।
रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।

रंग-बिरंगी पिचकारी ले,
बच्चे होली खेल रहे हैं।

मम्मी-पापा दोनों मिल कर,
मठरी-गुझिया बेल रहे हैं।

पकवानों को साथ लिए, होली आई है।
रंगों की बरसात लिए, होली आई है... 

6 comments:

  1. सुप्रभात
    उम्दा समसामयिक लिंक्स

    ReplyDelete

  2. बहुत सुन्दर लिंक्स .

    ReplyDelete
  3. सुंदर प्रस्तुति ।

    ReplyDelete
  4. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  5. बच्चों की परीक्षा में बीच बीच में ऑफिस से भी छुट्टी लेनी पड़ी पढ़ाने के लिए..इस बीच ऑफिस-घर के काम काज के साथ ब्लॉग पर आना बहुत मुश्किल हुआ .. ..ब्लॉग भी घर जैसा है इसलिए याद आयी तो थोड़ा लिख छोड़ा .....घर से परीक्षा का भूत कल भाग जाएगा इसलिए मन को थोड़ा सुकून है ....अब परीक्षा का परिणाम का इन्तजार रहेगा ...आज आपने चर्चा मंच में टाइटल के साथ 'परीक्षा के दिन' की चर्चा की तो बहुत अच्छा ... इस हेतु आपका बहुत बहुत आभार!

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin