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Monday, February 23, 2015

"महकें सदा चाहत के फूल" (चर्चा अंक-1898)

मित्रों।
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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नयी जिन्दगी का अहसास... 

नमस्कार!! 
आप विद्वान मेरी कविता को गहराई से पढ़ें 
और अपना बहुमूल्य मार्गदर्शन देने की कृपा करें-- 
आपका श्रीराम
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नन्हा सूरज दिखता जब;
  पल ख़ास होता है।
हर सुबह नयी जिन्दगी का;
   एहसास होता है।।
Lovely life पर Sriram Roy 
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प्रेम के बाद प्रेम !! 

प्रसिद्द कैरेबियाई कवि और लेखक 
डेरेक वॉल्कोट की कविता 
‘Love After Love‘ 
का अनुवाद... 
तिश्नगी पर आशीष नैथाऩी
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आज प्रियतम जीवनी में आ रहा है 

अकेला उन्मुक्त उड़ना चाहता था,
मेघ सा विस्तृत उमड़ना चाहता था,
स्वतः प्रेरित, दूसरों के अनुभवों को,
स्वयं के अनुरूप गढ़ना चाहता था ।
किन्तु मन किस ओर बढ़ता जा रहा है,
आज प्रियतम जीवनी में आ रहा है ।१।... 
न दैन्यं न पलायनम् पर प्रवीण पाण्डेय 
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और सफर चलता रहा… 

कभी अपना वतन,
कभी श्रीलंका का जीवन, 
और फिर मेरा सूरज पश्चिम में ढलता रहा

कभी हिन्द महासागर,
कभी कैरेबियाई सागर,
मेरा दिल जमना को मचलता रहा... 
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दिन कुम्हलाया 

 धूप ढल रही , दिन कुम्हलाया , 
सूरज का चेहरा अँधराया । 
धुँधलाती आँखों के आगे , 
उजियारे ने मुँह लटकाया... 
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...अच्छा कहना भूल गया 

हाज़िर है एक ग़ज़ल 
सारी वफ़ाएं सारी जफ़ाएं 
जाने क्या-क्या भूल गया 
तुम छेड़ो तो याद आ जाए 
मैं तो किस्सा भूल गया... 
शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' 
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चेहरे की वो बात 

एम के पाण्डेय ‘निल्को’ 

*चेहरे की वो बात* 
*अधूरी रह गई थी रात* 
*किनारे बैठे थे वे साथ* 
*डाले एक दूसरे मे हाथ* 
VMW Team पर VMWTeam Bharat
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ज़रा ज़रा... 

बदलते रहेंगे यूँ ही हालात ज़रा ज़रा
होती रहे गर यूँ बात ज़रा ज़रा

ख्वाबों के चिराग रोशन रहेंगे हमेशा
चाहे ढलती रहे ज़िन्दगी की रात ज़रा ज़रा... 
दिल से .....पर Sneha Gupta 
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चाहत के फूल 

महकें सदा
चाहत के फूल
सदाबहार
तुम्हें ही सोचूँ
तुम्हें ही देखूँ हरसू... 
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"फिर से बालक मुझे बना दो" 


सीधा-सादा. भोला-भाला।
बच्चों का संसार निराला।।

बचपन सबसे होता अच्छा।
बच्चों का मन होता सच्चा।

पल में रूठें, पल में मानें।
बैर-भाव को ये क्या जानें।।...

13 comments:

  1. सभी मित्रों को शुभ प्रभात | बहुत खूब चर्चा मंच सजाया | मेरी कविता शामिल करने के लिए शास्त्री जी को हृदयतल से धन्यवाद | सभी आदरणीय ब्लॉगर मित्रों का दिन शुभ हो | जय हो मंगलमय हो - हर हर महादेव |

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  2. बहुत ही सुंदर लिंक्स का चयन हुआ है .... काव्यसुधा से फाल्गुन के कुछ दोहे को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार ...

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  3. उम्दा प्रस्तुति…मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  4. बहुत ही सुंदर लिंक्स का चयन हुआ है
    Publish free Ebooks, Poem, Story

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  5. बढ़िया लिंक-सह-चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!

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  6. अच्छे लिंक हैं सभी ...
    सुन्दर चर्चा ...

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  7. बहुत बढ़िया चर्चा...

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  8. धन्यवाद ! मयंक जी मेरी रचना ''नवगीत (28) आग को पानी कब तक कहलवाओगे ? '' को शामिल करने का ।

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  9. बहुत बढ़िया चर्चा..

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  10. मेरी रचना को शामिल करने के लिए धन्यवाद मयंक सर! संकलन बेहद खुबसूरत बन पड़ा है.

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  11. Nice Article sir, Keep Going on... I am really impressed by read this. Thanks for sharing with us.. Happy Independence Day 2015, Latest Government Jobs.

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"स्मृति उपवन का अभिमत" (चर्चा अंक-2814)

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