Followers

Tuesday, February 10, 2015

'चाकलेट-डे' चोंच में, लेकर आया बाज; चर्चा मंच 1885


रविकर 

खोटे सिक्के चल रहे, गजब तेज रफ़्तार |
गया जमाना यूँ बदल, इक्के भी बेकार || 

जाति ना पूछो साधु की, कहते राजा रंक |
मजहब भी पूछो नहीं, बढ़ने दो आतंक ||  

Misra Raahul 




चला बिहारी ब्लॉगर बनने 
SM 


5 comments:

  1. दिल्ली में आई सुनामी के दिन की सुंदर मंगलवारीय चर्चा । आभार रविकर जी 'उलूक' का सूत्र 'कह दे कुछ भी कभी भी कहीं भी कुछ नहीं होता है" को आज की चर्चा में स्थान देने के लिये ।

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया चर्चा...

    ReplyDelete
  3. अच्छे लिंक्स... मुझे स्थान देकर आपने जो मान बढाया उसके लिये आभारी हूँ!!

    ReplyDelete
  4. उपयोगी लिंकों के साथ बढ़िया चर्चा।
    आपका आभार रविकर जी।
    --
    कल तक देहरादून में हूँ। परसों खटीमा पहुँच जाऊँगा।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...