चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Saturday, December 17, 2016

"जीने का नजरिया" (चर्चा अंक-2559)

मित्रों 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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निशानें 

युवाम पर 
gurpreet singh Butter 
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कपोत 

Akanksha पर 
Asha Saxena 
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टाइम रिटायरमेंट का ज्यों पास आता जा रहा - 

टाइम रिटायरमेंट का ज्यों पास आता जा रहा । 
उत्साह बढ़ता जा रहा, आकाश नीचे आ रहा । 
खाया कमाया जिंदगी भर पितृ-ऋण उतरे सभी । 
संतान को इन्सां बनाया अब नहीं भटके कभी । 
ख्वाहिश तमन्ना शौक सारे आज हम पूरी करें। 
चाहे रहे जिन्दा युगों तक आज ही या हम मरें । 
कविमन हुआ मदमस्त रविकर गीत रच रच गा रहा... 
रविकर 
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करेंगे याद तुमको हम उमर भर 

हमारी ज़िंदगी हमसे खफा है 
ज़माना ज़िन्दगी पीछे पड़ा है ,,  
नही चाहा कभी हम दूर जायें 
करें क्या प्यार लेता इम्तिहाँ है... 
Ocean of Bliss पर 
Rekha Joshi 
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नये
जमाने
के साथ
बदलना
सीखें

कुछ
उद्योग
धन्धे नये
धन्धों से
अलग
खींच कर

धन्धों के
खेत में
खींच
तान कर
अकलमंदी के
डंडे से सींचें ... 
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नोटबंदी के दौर में श्री कृष्ण उवाच -- 

गीतानुसार दुनिया में 
तीन तरह की प्रवृति के लोग होते हैं 
-- सात्विक , राजसी और तामसी। 
यदि नोटबंदी के दौर में 
पैसे की दृष्टि से देखा जाये तो 
पैसे वाले अमीरों को 
इस तरह से परिभाषित किया जा सकता है... 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
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काहे को टेन्शन मौल लेना? 

कमाने से ज्यादा खर्च करने का संकट हैं। कभी सोचा है कि - आपने बहुत ज्ञान प्राप्त कर लिया, आप इसका उपयोग करना चाहते हैं लेकिन कैसे उपयोग करें, मार्ग सूझता नहीं। सारा दिन बस इसी उधेड़-बुन में लगे रहते हैं कि कैसे अपना ज्ञान लोगों तक पहुंचे? यहाँ सोशल मीडिया पर भी यही मारकाट मची रहती है कि मेरी बात अधिकतम लोगों तक कैसे पहुंचे... 
smt. Ajit Gupta 
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मोहब्बत का दीवाना। 

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अरुणा सब्बरवाल जी का नया कहानी संग्रह  
shikha varshney 
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जो किया है वादा तुम संग__ 

Nibha choudhary  
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नारी की व्यथा 
Roshi  
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मौत का जारी कोई फरमान कर 

मौत का जारी कोई फरमान कर । 
हो सके तो ऐ ख़ुदा एहसान कर ।। 
जिंदगी तो काट दी मुश्किल में अब। 
रास्ता जन्नत का तो आसान कर... 
Naveen Mani Tripathi 
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खेती पर नोटबंदी का कितना असर 

बता रहे हैं राजकुमार यादव 

HARSHVARDHAN TRIPATHI 

4 comments:

  1. सुन्दर चर्चा। आभारी है 'उलूक' सूत्र 'आओ धमकायें नया उद्योग लगायें' को आज की प्रस्तुति में स्थान देने के लिये।

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  2. बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...आभार!

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  3. हर व्यक्ति का जीने का अंदाज अलग होता है आज की चर्चा लिंक्स बढ़िया हैं |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  4. नमस्कार
    मेरी रचना को अपने ब्लाॅग पर स्थान देने के लिए धन्यवाद।

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