समर्थक

Friday, December 16, 2016

"रहने दो मन को फूल सा... " (चर्चा अंक-2558)

मित्रों 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

--
--
--
--

प्रेम 

प्रेम की उम्र बहुत छोटी होती है । किन्तु यदि इस बात की अभिलाषा हो कि प्रेम अखंड और अक्षुण् रहे तो कभी भी उसे प्राप्त करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। एक बार यदि पा लिया तो उसका खो जाना तयशुदा है... 
ZEAL 
--
--
--

घटती ब्याज दरों की दहशत 

आदमी खुद से अधिक किसी को प्यार नहीं करता। निश्चय ही इसीलिए, नोट बन्दी के तुमुल कोलाहल के बीच अपने कल की चिन्ता मेरी धड़कन बढ़ा रही है। तसल्ली है तो केवल यही कि मेरा भय, मुझ अकेले का नहीं, अधिसंख्य बूढ़ों का है। सरकार का सारा ध्यान और सारी कोशिशें विकास दर बढ़ाने की हैं। उद्योगों को बढ़ावा देने और व्यापार को अधिकाधिक आसान बनाकर ही यह किया जा सकता है... 
विष्णु बैरागी 
--
--

प्रतिघात किया करो... 

अजय कुमार झा 

सुनो !
आरुषी,
प्रियदर्शनी ,
निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ... 
yashoda Agrawal 
--
--
हरी मटर खाने के स्वास्थ्य और सौन्दर्य लाभ 

हरी मटर काफी स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों में से एक है और यह कच्चा खाने में भी काफी स्वादिष्ट लगते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंटस, विटामिन्स, मिनरल्स (anti-oxidants, vitamins, minerals) और अन्य कई स्वास्थ्यवर्धक तत्व भरे हुए हैं जो रोगों का निदान करते हैं और आपके स्वास्थ्य में निखार लाते हैं। आप हमेशा ही स्वाद तथा पोषक मूल्य बढ़ाने के लिए अपने भोजन में हरे मटर डाल सकती हैं, पर इसे कच्चा खाना और भी ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक साबित होता है। जब मटर ताज़े और कच्चे होते हैं, तब ये ज्यादा स्वास्थ्यकर होते हैं। अतः आप इनका कच्चा सेवन करके भी स्वस्थ रह सकते हैं... 
घरेलू पदार्थों से करें रोगों का इलाज. 
--
आंखो मे सुरमा लगाती क्यूँ है 
आईना देख इतराती क्यूँ है 
तुझ पर जाऊ मैं वारि वारि पर 
मुझे तू बार बार आजमाती क्यूँ है ... 
--
इश्‍क़ के तीन पत्‍ते  
जोधपूर कि‍ले की 
रूप-अरूप 
--
देखा जाये तो लेखन में भी 
इष्टतम विलंब का वृहद उपयोग है। 
उपरिलिखित वाक्य सोचना और उसे लिखना, 
वैसे तो बड़ा स्वाभाविक लगता है 
पर यदि उस पर विचार करें तो सोचने... 
--
मटर के दानों सी मुस्कान 
माँ ,जो सारा जीवन,
सात बच्चों के परिवार को ,
सँभालने में रही व्यस्त 
हो गयी काम की इतनी अभ्यस्त 
बुढापे में ,बिमारी के बाद ,
जब डॉक्टर ने कहा करने को विश्राम 
बच्चे ,काम नहीं करने देते ,
और उसका मन नहीं लगता 
बिना किये काम 
हर बार ,हर काम के लिए ,
हमेशा आगे बढ़ती है ... 
काव्य का संसार 
--
 ११ दिसम्बर २०१६ को मोदी जी ने बनासकांठा में एक चीज़ फेक्ट्री के उद्घाटन के अवसर पर कहा- मुझे लोकसभा में बोलने नहीं दिया जाता तो मैंने जनसभा में बोलने का निश्चय किया है |
हमें बहुत बुरा लगा | जैसे ही तोताराम आया हम उसी पर पिल पड़े- देखा तोताराम, मोदी जी का क्या हाल बना दिया है ?  भले ही १०० में से मात्र ३१ वोट मिले हैं लेकिन सीटें तो दो तिहाई मिली हैं |पिछले २५ वर्षों से देश में जोड़-तोड़ के गठबंधन ही सरकार बनाते रहे हैं |ऐसे में यह बहुत  बड़ी उपलब्धि है |लोकतंत्र के उज्जवल भविष्य का संकेत है | लेकिन उसी दल के नेता को लोकसभा में बोलने तक नहीं दिया जाता | यह हाल तो तब है जब सबसे बड़े विरोधी दल तक को विरोधी दल का संवैधानिक दर्ज़ा तक प्राप्त नहीं है... 

--
--
--
--
रोपी गयी नव-खेत में जब धान की बेरन बड़ी। 
लल्ली लगा ले आलता लावा उछाली चल पड़ी।। 
अलमारियों में पुस्तकें सलवार कुरते छोड़ के। 
गुड़िया खिलौने छोड़ के चुनरी खड़ी है ... 

3 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. सुन्दर शुक्रवारीय चर्चा। आभार 'उलूक' के सूत्र 'करने वालों को लात नहीं करने वालों के साथ बात सिद्धांततह ही हो रहा होता है' को जगह देने के लिये ।

    ReplyDelete
  3. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ..आभार !

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin