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Monday, December 12, 2016

अहा, मेरा वाला नोट.; चर्चा मंच 2554


"लिंक-लिक्खाड़"

जय गणेशा

जय जय गजानन जय गणेशा विघ्नहर्ता आइये।
शुभ सूंढ़ क्यूं टेढ़ी हुई हर भक्त को बतलाइये।
कैसे विराजे दीर्घकाया मूस पर समझाइये।
जय जय गजानन जय गणेशा विघ्नहर्ता आइये।।





5 comments:

  1. शुभ प्रभात..
    वाह..
    आनन्द आ गया
    सादर

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  2. वही सुन्दर रविकर अन्दाज की बढ़िया चर्चा। आभारी है 'उलूक' 'बेवकूफ' का जिक्र फिर से करने के लिये।

    ReplyDelete
  3. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...आभार

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति

    ReplyDelete

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