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Wednesday, December 28, 2016

"छोटी सोच वालों का एक बड़ा गिरोह" (चर्चामंच 2570)

बुलबुल गायें मधुर तराने, प्रेम प्रीत का हो संसार।
नया साल मंगलमय होवे, महके -चहके घर परिवार।।

ऋतुओं में सुख की सुगन्ध हो,
काव्यशास्त्र से सजे छन्द हों,
ममता में समानता होवे, मिले सुता को सुत सा प्यार।
नया साल मंगल मय होवे, महके-चहके घर-परिवार... 
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पीटना हो किसी बड़ी सोच को 

आसानी से एक छोटी सोच वालों का 

एक बड़ा गिरोह बनाया जाता है 

सुशील कुमार जोशी 

ग़ज़ल (माँ का एक सा चेहरा) 

Madan Mohan Saxena 

वो लड़की ~2 

सु-मन (Suman Kapoor) 

कोई उम्मीद बर नहीं आती / ग़ालिब 

haresh Kumar 

प्रैक्टिकल नॉलेज 

ऋता शेखर 'मधु' 

आदर्शों को कुचल रहे...  

शपथ आदर्श की लेते हैं 

udaya veer singh 

Mana Village -Last Village of India 

भारत का आखिरी गांव- माणा 

SANDEEP PANWAR 

केसरिया मन हो.... 

निधि सक्सेना 

yashoda Agrawal 

ख़ूबसूरत शै को अक़्सर देखिए 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
रविकर की कुण्डलियाँ
दाढ़ी झक्क सफेद है, लेकिन फर्क महीन।

सैंटा देता नोट तो, मोदी लेता छीन।
मोदी लेता छीन, कमाई उनकी काली।
कितने मिटे कुलीन, आज तक देते गाली।
हुई सुरक्षित किन्तु, कमाई रविकर गाढ़ी।
सुखमय दिया भविष्य, बिना तिनके की दाढ़ी।।

समय करे,नर क्या करे,समय बड़ा बलवान; 

असर ग्रह सब पर करें , 

परिंदा-पशु-इंसान.------  

विजय राजबली माथुर 

विजय राज बली माथुर 

अमर शहीद उधम सिंह जन्म दिन मनाया 

Rajesh Shrivastav 

सबके उर में प्रेम बसा है 

Anita 

दोहे  

"आओ नूतन वर्ष"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

कार्टून:-  

सौ मर्ज़ की एक दवा 

Kajal Kumar 

5 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार रविकर जी।

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  3. नए साल में सुगबुगाहट लिए बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति हेतु धन्यवाद

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  4. विविधरंगी सूत्रों से सजी सुंदर चर्चा ! चिरौंजी से सजी चाशनी पगी शब्दों की मीठी टिकिया के लिए आभार !

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  5. आभार रविकर जी आज की सुन्दर रविकर चर्चा में 'उलूक' के सूत्र 'पीटना हो किसी बड़ी सोच को आसानी से एक छोटी सोच वालों का एक बड़ा गिरोह बनाया जाता है' शीर्षक और स्थान देने के लिये । सुन्दर प्रस्तुति ।

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