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Tuesday, June 05, 2018

"हो जाता मजबूर" (चर्चा अंक-2992)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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तालमेल  

(राधातिवारी "राधेगोपाल") 

मेरे मन में भावों के भंडार आ रहे।
अल्फाजों के अंदर से उद्गार आ रहे।।

 परिवार मैं तो आज कुछ कमी सी रह गई।
 मिलकर रहो सब साथ में विचार आ रहे... 
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इक उमर का उनिंदा हूँ मैं....  

विकास शर्मा 'दक्ष' 

उम्मीद-ए-वफ़ा की फितरत से शर्मिंदा हूँ मैं,  
ग़ज़ब कि दगा के हादसों के बाद ज़िंदा हूँ मैं,... 
yashoda Agrawal  
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सुबह की चाय में बिस्कुट डुबा कर ... 

नहीं जाता है ये इक बार आ कर
बुढ़ापा जाएगा साँसें छुड़ा कर

फकत इस बात पे सोई नहीं वो
अभी सो जायेगी मुझको सुला कर... 
Digamber Naswa  
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बैर भाव 

आपस में बैरभाव 
तिल तिल बढ़ रहा है
गहरे हुए घावों को
मन में हुई दरारों को
अब सहन न कर पाएंगे... 
Akanksha पर Asha Saxena  
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मुमकिन है तुरपाई 

बादल फटते, दूध भी फटता, मुश्किल है भरपाई।  
फटते जब कपड़े या रिश्ते, मुमकिन है तुरपाई... 
मनोरमा पर श्यामल सुमन  
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चित्र-विचित्र 

शुभ अवसर देता सदा, सूर्योदय रक्ताभ।हो प्रसन्न सूर्यास्त यदि, उठा सके तुम लाभ।।
रविकर उफनाती नदी, उफनाता सद्-प्यार।कच्चा घट लेकर करे, वो वैतरणी पार... 

"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर  
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किताबों की दुनिया - 180 


नीरज पर नीरज गोस्वामी 
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जैसा देव वैसा पुजारी 

कहावत है – जैसा देव वैसा पुजारी। काली माता का विभत्स रूप, तो पुजारी भी शराब का चढ़ावा चढ़ाते हैं, बकरा काटते हैं। डाकू गिरोह में डाकू ही शामिल होते हैं और साधु-संन्यासियों के झुण्ड में साधु-संन्यासी। डाकुओं का सरगना मन्दिर में जाकर भजन नहीं गाता और साधु कभी डाका नहीं डालता। जिस दिन डाकू सरदार ने भजन गाना शुरू कर दिया समझो उसके साथी डाकू उसका साथ छोड़ देंगे। 
जितने डाके उतना ही सम्मान... 
smt. Ajit Gupta 
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6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. सुप्रभात | आज पढ़ने के लिए पर्याप्त लिंक्स |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |

    ReplyDelete
  3. सुन्दर मंगलवारीय अंक प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  4. विस्तृत लिंक चर्चा ...
    आभार मेरी ग़ज़ल को जगह देने के लिए ...

    ReplyDelete
  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete

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