Tuesday, November 20, 2018

."एक फुट के मजनूमियाँ” (चर्चा अंक-3161)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।   
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')  --
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मन न भए दस बीस 


रश्मि प्रभा... 
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सुरभि 


purushottam kumar sinha  
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परची 

सलिल और अनीता की शादी को करीब आठ साल हो चुके थे किन्तु आंगन आज तक सूना था, कोई ऐसा डॉक्टर नही बचा था जिन्हे दिखाया न गया हो, कोई ऐसा मन्दिर नही था जहाँ मन्नत न मांगी गयी हो। जब सभी आशाओं ने दम तोड दिया तब दम्पति ने एक बच्चा गोद देने का निश्चय किया। आज इसी उद्देश्य से दोनो "अपना घर" अनाथाश्रम में आये थे... 
डॉ. अपर्णा त्रिपाठी  
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टहकार! 

भींगी रात यादों की। 
सूखा रही अब धूप, विरह की ।  
निगोड़ी रात अलमस्त! 
सुखी! न सूखी।  
उल्टे, भींगती रही धूप। 
खुद ! रात भर। 
ढूंढता रहा आशियाना सूरज।
 धुंध में चांदनी की । 
और अकड़ गया है चांद, एहसासों का। 
आसमान मे, होकर और टहकार । 
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किताबों की दुनिया -  

204 


नीरज पर 
नीरज गोस्वामी 
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पागल दिल रुक जाओ, धक धक बंद करो ... 

धूप न आए जेब में तब तक बंद करो  
शाम को रोको दिन का फाटक बंद करो  
बरसेंगे काले बादल जो ठहर गए   
हवा से कह दो अपने नाटक बंद करो... 
Digamber Naswa  

5 comments:

  1. विस्तार से चर्चा रचनाओं की ...
    आभार मुझे शामिल करने का ...

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  2. सुन्दर मंगलवारीय चर्चा में गधे 'उलूक' के गधे को भी शामिल करने के लिये आभार आदरणीय।

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  3. बेहतरीन चर्चा मंच की प्रस्तुति 👌
    मुझे शामिल करने के सह्रदय आभार आदरणीय
    सादर

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  4. बहुरंगी रचनाओं का बहुत खूबसूरत संकलन। आपके द्वारा प्रस्तुत मेरी कविता के शब्दों की सजावट बहुत ही भायी। मैंने भी वैसा ही कर लिया। आभार।

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  5. 'अभी उम्र कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी.' रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवम्बर, 1835 को हुआ था, न कि 19 नवम्बर 1828 को. उनकी शहादत 23 वर्ष से भी कम आयु में हुई थी.

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