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Friday, November 12, 2010

" एक कविता अनेक पहलू " (चर्चा मंच-336)

चर्चाकार- डॉ. नूतन गैरोला
सभी ब्लॉग मित्रों के सम्मुख " एक कविता के संग अनेक पहलू"
ले कर आई हूँ|
एक कविता अनेक पहलू
कब वो सुनता है मेरी कहानी
फिर भी आज जो
किसी ने कभी लिखा ही नहीं
सुनाता हूँ वो
कहानी , या कहो
गजल |
उसकी हथेली और हमारी बात है |
कुछ फ़र्ज़ भी निभाना था
जो था
जरुरी और मजबूरी भी उसको क्या खिलाना पहनाना था |
सो छोड़ उसकी हथेली
खोना पड़ा खुद को
चैन की दो रोटी की खातिर,
गुजर गया था उस सड़क से

जिंदगी के मेले में,
भेडियों की बस्ती वाले शहर में |
प्यार की तावीज उसे सौंप आया था,
उसने पूछा था

क्यों मुझे यूं छोड़ जाते हो तुम्हारी नौकरी ?
हाय रे ये जी का जंजाल क्यूं बनी
तुम ना रहते हो जब
तो दुनिया और
शेष दुनिया के लोगों में
मुझे सबकुछ
खाली सा लगता है |
हर
समीकरण
गडबड सा लगता है |
मैंने कहा-कुछ नया कर के आऊंगा
तुम्हारे लिए झोली भर के लाऊंगा |
उसने कहा-
एक दिल मेरे पास रख जाओ
और आज
पल महीनो सालो साल बाद,
कठिन परिश्रम से पैसों की खनकार
के संग लौट आया हूँ|
बरसों बाद
दर पे उसके के आया मगर देर से
उदास हुवा देखा जब
तालों से जड़ा, पुराना पड़ा
बंद दरवाजा
जंग लगे
इन तालों को चाभी से तुम खोल सकते नहीं
मानो
पटवों की हवेली हो |
मकड जालों से घिरी

ज्यूं ताऊ की पहेली हो
पुकारूं तुम्हे
क्या कह कर पुकारूँ |कैसे दुखों के मौसम आये कैसी आग लगी यारों
मेरी
तरसती निगाहें थीं
और
एक लम्हें का मौन था |
कमजोर थी इतनी क्यूं
जो
विश्वास की ईंट हिल गयी थी|
रोता रहा ,चिल्लाता रहा
चीखता रहा पुकारता रहा |
समझाया बहुतेरों ने
कैसे समझूँ
क्या मेरी
अंतिम अभिलाषा
का यही पड़ाव है|
मैंने पूछा दोस्तों से
अगर इसे अंत कहते है तो
क्या अंत टल नहीं सकता |
वो बोलें-
आशाओं पर ही चलती जिंदगी की धूप है
तुम मन में एक उजास भर के तो देखो
तुम दीप जला के तो देखो
और यारों जीत होगी मेरी
यकीन है अब मुझे
इस लिए तो
बरसो से दबी
राख में
दहकता अंगारा ढूंढता हूँ
.
सूने पड़े मन आँगन में इक संसार ढूंढता हूँ |


इस कविता के प्रारूप में मैंने ब्लोग्स से लिंक लिए हैं
और उनके शीर्षक बदस्तूर मैंने उसी रूप में पंक्तियों में प्रत्यारोपित किये हैं |
आप सभी को, जिनके मैंने लिंक्स लिए हैं, उनका धन्यवाद करती हूँ |
उनकी, रचना और शीर्षक के लिए, जिसका मैंने उपयोग किया है
और सभी पाठकों को सादर अभिनन्दन और धन्यवाद करती हूँ ,
जिनका उत्साह और स्नेह हमें कुछ नया करने की प्रेरणा देता है|
मैं यह नहीं कहूँगी कि ये कविता आपको भाएगी
किन्तु आप इसमें निहित लिंक्स का आनंद लेंगे ऐसी उम्मीद करती हूँ |
धन्यवाद!!
चलते चलते
कुछ और लिंक भी देख लीजिए!

गर्भावस्था - एक सामान्य जानकारी

कुछ मस्ती कुछ तफरी

जन्म से पहले मौत क्यूँ ?

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कमाकुरा के दाइ-बुत्सू...कुछ तस्वीरें रावण मंडी की भी

आज के लिए बस इतना ही!

जय भारत!
जय उत्तराखण्ड!!

28 comments:

  1. कविता में लिंक्स और कविता अर्थपूर्ण भी.
    कमाल है डॉ.नूतन जी.
    आपकी साहित्यिक रूचि और प्रगति को सलाम करना पड़ेगा

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  2. Agree with Suman & Kusumesh. An artistial creatin with poety ang originations. A difficult job flowing easily.......

    Thanks and many many thanks.

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  3. परम्परा से अलग हटकर एक शानदार चर्चा!

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  4. अच्छे लिंक्स को समेटने में कविता की कारीगरी भी ...
    बहुत खूब ..
    चर्चा में शामिल किये जाने का बहुत आभार !

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  5. aashaon par hi chalti jindgi ki dhoop hai' manmohak prastuti.

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  6. नूतन जी ,

    कविता के साथ चर्चा का अंदाज़ बहुत अच्छी लगा ....बहुत अच्छी रही यह रचनात्मक चर्चा ....आपकी मेहनत और लगन को नमन ....सुन्दर प्रारूप तैयार किया है चर्चा का ...और चलते चलते भी अच्छे लिंक्स समेट लिए ...मेरे ब्लॉग को शामिल करने के लिए आभार ..

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  7. kavita ek charcha anek........bahot hi achhi charcha

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  8. kavita kee gagar me links ka sagar ;aap udit hui hai ''nutan bihari' bankar.shubhkamnaye.

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  9. नूतन जी,

    सबसे पहले तो मैं आपका आभारी हूँ की आपने मिर्ज़ा ग़ालिब ब्लॉग का लिंक यहाँ दिया .....और कितनी सुन्दरता से आपने लिंक्स को एक कविता का रूप दिया.....आपके इस सराहनीय कार्य के लिए आपको मेरा सलाम|

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  10. अच्छे लिंक्स.....शानदार चर्चा

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  11. बहुत ही सुन्‍दरता से आपने इन्‍हें एक नई दिशा दी है ...बधाई ।

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  12. शानदार लिंक्स के साथ बेहद खूबसूरत चर्चा मंच सजाया है……………काफ़ी मेहनत की है ………………ये अन्दाज़ भी पसन्द आया।

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  13. सबसे अलग अनोखा अंदाज वो भी अर्थपूर्ण या यों कहें कि थोडा लिखा बहुत समझना.आगे भी ऐसा ही कुछ नया देखने और पढ़ने को मिलेगा ऐसी अभिलाषा के साथ....
    रचना दिक्षित
    मेरी कविता को अपनी चर्चा में सजाने के लिए आभार

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  14. नूतन जी बहुत बहुत शुक्रिया ब्लॉग के इतने सारे मित्रों से रु-ब-रु होने का अवसर देने के लिए| मैं समझ सकता हूँ आप के अथक प्रयासों को, जिन की वजह से हम लोगों को इतनी सारी विशिश्टताओं से परिचित होने का मौका मिला| एक बार फिर से बहुत बहुत आभार|
    कविता के माध्यम से लिंक वाला आइडिया जबरदस्त रहा|

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  15. बहन संगीता स्वरूप जी की माँगपर
    चर्चा मंच का टेम्प्लेट बदल दिया गया है!
    --
    विण्डो लाइव राइटर से पोस्ट लगाने वाले सदस्य ध्यान रखें की इसमें टेबिल की चौड़ाई 620 पिक्सेल ही रखनी है!
    --
    सूचनार्थ निवेदन है!

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  16. अन्दाज़े-बयां एक लिहाज़ से ख़ूबसूरत है लेकिन चर्चाकारा या चर्चाकार की टिप्पणी के बिना नये ब्लाग में जाने से मन का कमरा खाली खाली लगता है।

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  17. बहुत मेहनत की है आपने .और मेहनत का रंग साफ़ झलकता है जब लोग चर्चा सिर्फ लिंक के नहीं पढते बल्कि रूचि से पढते हैं .
    बहुत अच्छी चर्चा.

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  18. rachnatmakta ke saath links ko sanjokar arthpoorna kavita rachi hai aapne!!!
    sundar charcha!

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  19. kal kaa din aur aaj kaa din bhi chikitsiy seva ke lihaaj se behad bussy hai... mai jaroor charcha mei shakriya bhaag leti laikin puri raat aur abhi bhi main kuch complicated cases ko manage karne me bita hai...aur abhi bhi 10 min chura ke aayi hoon..

    aap ko yah prayaas pasand aaya..mai is vishay par charcha thora samay miltey he karungi..

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  20. बहुत अच्छी चर्चा सजाई है..नया अंदाज़ बहुत मन को भाया. समझ सकती हूँ आपको कितनी मेहनत मशक्कत करनी पड़ती होगी इस शानदार प्रस्तुति के लिए.

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  21. सुन्दर लिंक्स देने के लिए आभार.

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  22. सभी ब्लॉग मित्रों को नमन और धन्यवाद.. उम्मीद है आपने उपरोक्त लिंक पे जा कर पढ़ा होगा... और अपने विचार भी दिए होंगे... आप सभी का यहाँ आ कर टिपण्णी कर ऐसा लगा जैसे आपने मुझे आशीर्वाद दिया हो ... आप सभी के स्नेह से भाववहल हूँ | तहे दिल शुक्रिया..

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  23. .

    डॉ नूतन निति ,

    आपने कविता के रूप में बेहद सुन्दर अंदाज में चर्चा की है । आपका ये अंदाज़ बहुत भाया मन को। अच्छे लिनक्स उपलब्ध कराने के लिए तथा, मेरे लेख को शामिल करने लिए आपका आभार।

    .

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  24. डॉ. नूतन गैरोला जी▬
    ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι जी कह रहे हैं कि आप उनके ब्लॉग पर भी जाकर अपनी उपस्थिति अंकित कराये!

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  25. नया प्रयोग, नया अन्दाज़, बहुत सुन्दर!

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