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Sunday, November 21, 2010

रविवासरीय चर्चा

नमस्कार मित्रों!

मैं मनोज कुमार एक बार फिर हाज़िर हूं रविवासरीय चर्चा और एक लाइना के साथ। देरी के लिए क्षमा प्रार्थी हूं।

  1. शस्वरं पर रजेन्द्र स्वर्णकार कह रहे हैं तू करुणा रस बरसाता चल! :: पर-पीड़ा-उन्मूलन-हित निज सुख की बलि तू चढाता चल।
  2. विनोद कुमार पांडेय दिखा रहे हैं चमचों का जलवा---(विनोद कुमार पांडेय) :: शहद घुली सी मीठी बोली लगते हैं मनुहारी चमचे!! आम आदमी बंदर जैसा डमरू लिए मदारी चमचे!!!
  3. कहानी ऐसे बनी-१३ :: लंक जरे तब कूप खुनाबा :: जरूरत एकदम सिर पर सवार हो गया और चले उसके समाधान का खोजने।
  4. डा.राजेंद्र तेला जी कह रहे हैं तोहमत लगाने से पहले,अपने अन्दर भी झाँक लो :: नहीं तो जो हथियार तुमने चलाए खुद उनसे चोट खाओगे!!
  5. अशोक बजाज लेकर आए हैं त्योहारों का अनोखा संगम कार्तिक पूर्णिमा व प्रकाश उत्सव :: कार्तिक पूर्णिमा एवं प्रकाश उत्सव की आपको बहुत बहुत बधाई!!!
  6. सुनिए प्रवीण शाह की भी पशुबलि-कुरबानी , शाकाहार-मांसाहार , वैचारिक बहस- फ्री फॉर ऑल धर्मयुद्ध... बीचों-बीच फंसे हम और जेहन से उठते ११ सवाल... क्या उत्तर देंगे आप ? :: आज और कुछ नहीं...बस सवाल ही सवाल...११
  7. डॉo कुमारेन्द्र सिंह सेंगर सुना रहे हैं जोगेन्द्र सिंह की कविता -- बूढ़ा हूँ , पर अकेला नहीं ":: अब सांझ के आँचल तले सीमाओं के विस्तार में लगे हैं ...!!!
  8. त्रिपुरारि कुमार शर्मा लेकर आए हैं "पाश" की एक कविता ! :: एक लक्ष्यहीन दुहराव के उलटफेर में …!!!!
  9. beena कहती हैं मुझसे तो नहीं छूट पाता ये बचपना | :: अरे तो क्या ये जरूरी है कि ४० पार् कर लिया तो हमेशा चेहरे पर बुजर्गियत ही ओढ़े रहे !!!
  10. 'अदा' ने कहा हमारी कुप्रथाएं ... :: .आगे आने वाली पीढ़ी इनको नहीं ही अपनाएगी...!!!
  11. कलाबाजियाँ ख़ूब दिखाती : रावेंद्रकुमार रवि की बालकविता :: मेरे कमरे में वो दिन-भर इधर-उधर है फुदका करती!
  12. alok dixit का प्रश्न है -- आखिर मै ही क्यूँ परिंदा हूँ :: जिस गली में तेरे चर्चे है अफ़सोस वहीँ का मै बाशिंदा हूँ!!!!
  13. Poorviya का कहना है कुरबानी तो बडे पुण्य का काम :: कुर्सी की क़ुरबानी कोइ नहीं देता है!!!
  14. Bhushan जी का मानना है धार्मिक घृणा - वास्तविक अधर्म :: सब अपने-अपने विश्वास के अनुसार प्रकट हुए रूप को सच मानते हैं. अन्य का रूप या छवि अलग लगती है.
  15. नरेन्द्र व्यास लेकर आए हैं सुमन 'मीत' की रचना- याद आता है.. :: वो यौवन का अल्हड़पन, सावन की फुहारें, वो महका बसंत, समेट लेना आँचल में, कई रुमानी ख़ाब!!!!!
  16. रश्मि प्रभा... की है आपसे गुजारिश ... (एक काव्यात्मक समीक्षा ) :: अलग अलग हिस्सों में ... लीक से अलग एक सच!!!
  17. यहां दिमागदार है सभी यकीनन , मगर पढो यूं कि , कभी दिल को भी चशमा चढाया करो यारों ....आज झाजी यूं ही बोल गए . :: अब अजय झा क्या कहूं अब तुमसे ज्यादा, रोने की यूं ही कम नहीं हैं वजहें , इस पर तुम भी न रुलाया करो यारों ॥
  18. Rachana दिखा रही हैं भविष्य! :: धुंधला-धुंधला सा … आड़ा-तिरछा … गूंगा-बहरा!!!
  19. वाईन है तो फ़ाईन है....आंय.. आप सच कहते हैं कि मो सम कौन ? :: इन्हें जेहन में बसाकर उम्र भर के लिये बरबाद कर दिया हमें।
  20. अनुपमा पाठक लेकर आई हैं जीवन!:: ये भ्रम की ही कहानी है … मृगतृष्णा का ही मिला जुला .. सार है!!
  21. दिपाली "आब" .. तुम्हारे बिन मैं प्यासा :: ज़रा छलका दो सांसें … ये दम घुटता ही जाए!!!
  22. Gagan Sharma हमेशा Kuchh Alag sa ही लातए हैं, इस बार .. केले के पेड़ से अब कपडे भी बनेंगे. :: तब तक के लिए इंतजार।
  23. Ratan Singh Shekhawat की इस सप्ताह की टेक वार्ता :: इस पोस्ट को लिखते ही राजस्थान की यात्रा पर रवाना होना है!!!
  24. आइए अरुण चन्द्र रॉय की चौखट पर :: हिलते बांस के पत्तों के साथ!!
  25. Vivek Rastogi की मानें तो किसी भी कार्य को शुरु करने के पहले अपने अवयवों की ऊर्जा को एकत्रित करना होता है। :: पर सबसे जरुरी चीज है अपने अवयवों की संपूर्ण ऊर्जा एकत्रित करके कार्य की शुरुआत अच्छे से की जाये!
  26. डॉ. हरदीप संधु मना रहीं हैं श्री गुरू नानक देव जी का प्रकाश पर्व :: धन गुरु नानक प्रगटिया .. मिटी धुंध जग चानण होआ !!
  27. My Media पर वादियों में रंग बिखेरता पतझड़ :: ये चेतावनी होती है आने वाले उस सर्द मौसम की जिसकी जबर्दस्त ठंडक हर चीज को कपा कर रख देती है!!!
  28. Amit Kumar का मानना है हिंदी ब्लागिंग से लोगों का मोहभंग :: कितना भी धारदार लिखो, कोई पढता ही नहीं!!!
  29. और अब Anamika Srivastava की सज़ा :: बेजुबान हो गए हैं लफ्ज मेरे!!
  30. कुमार राधारमण की सलाह मानें और खाने में बचें इन गलतियों से :: इससे आपको फिट बॉडी के साथ प्रॉपर एनर्जी भी मिलेगी!!!
  31. Meenu Khare कहती हैं वो जो नदी है :: उसमे रहती हैं ढेर सारी मछलियां!! .. डुबकियाँ नाक बंद करके लगाई थी!!
  32. दिगम्बर नासवा जी देखिए वो दराजों में पड़ी कुछ पर्चियाँ :: मुफलिसों के दर्द आंसू सिसकियाँ, पी गयीं तालाब सारी मछलियाँ, चाँद को आने न देंगी बदलियाँ!!
  33. और अंत में इस नाचीज़ का एक नया ब्लॉग है, इस लिंक पर जाकर अपने विचार से अवगत कराएं। http://testmanojiofs.blogspot.com/

आज बस इतना ही। अगले हफ़्ते फिर मिलेंगे। हैप्पी ब्लॉगिंग!

आपकी चर्चा में विलम्ब होने के कारण

मैंने भी यह एकल चर्चा लगा दी थी!

आज की एकल चर्चा में प्रस्तुत कर रहा हूँ
हिन्दी और अंग्रेजी में समान अधिकार रखने वाली

श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना 'किरण'

श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना \

और

श्री बृजभूषण लाल जी सक्सेना की सुपुत्री

श्री बृजभूषण लाल जी सक्सेना-मेरे बाबूजी

श्रीमती आशा जी की

मेरा फोटो
ये अपने बारे में लिखती हैं-
  • व्यवसाय: lecturer,in plus two
  • स्थान: Ujjain : M.P. : भारत
  • I am M.A. in Economics& English.

    Though I was a science student and wanted to become a doctor,

    I could not. I joined education department as a lecturer in English.

    I have a little literary taste .

    इनका ब्लॉग है
इनकी पहली रचना 6 नवम्बर, 2009 को प्रकाशित हुई थी

Don't worry about failure

Don't worry about failure
Don't show your vigor to others.
Be brave as your grand parents were.
Show your ability to others,
And face the world with eyes open.
Asha

20 NOVEMBER, 2010 को प्रकाशित हुई

इनकी अद्यतन पोस्ट को भी देख लीजिए-

ना जाना ऐसे ऑफिस में
ना जाना ऐसे ऑफिस में ,
जिसमे बिना 'मनी',
कुछ काम ना हो ,
चक्कर लगाते रह जाओगे ,
था काम क्या ?
यह भी भूल जाओगे |
वहां हर मेज पर ,
बड़े २ झमेले हें ,
सब आस लगाए बैठे हें ,
हें ऐसे गिद्ध भी ,
जो ताक लगाए बैठे हें |
नोटों की एक झलक भी ,
यदि जेबों में दिखाई दी
आख़िरी पैसा,
तक छुडा लेंगे,
तभी चैन की सांस लेंगे |
आदर्श अगर बघारा तुमने ,
और ना ढीली अंटी की ,
लगाते रहोगे,
चक्कर पर चक्कर ,
फिर भी काम ,
ना करवा पाओगे |
वहां कोई भी सगा नहींहै ,
दो मेजों में दूरी नहीं है ,
जब मेजों के नीचे से ,
मोटी रकम पहुंचती है ,
सिलसिला काम का ,
तभी शुरू होता है |
यदि है इतनी जानकारी ,
और दिलेरी दिल दिमाग में ,
तभी वहाँ का रुख करना ,,
बरना भूले से भी कभी ,
उधर की ओर मुंह नहीं करना |
लगे मुखौटे चेहरे पर ,
असलियत कोई नहीं जानता ,
कथनी और करनी की दूरी ,
भी ना पहचान पाता ,
भूले से यदि फंस जाओ,
नोट साथ लेते जाना ,
तभी होगा कुछ हासिल ,
नहीं तो दीमक के बमीटे से,
कुछ भी हाथ न आएगा |
है महिमा रिश्वत की अनोखी ,
जो भी इसे जान पाया ,
बहती गंगा में हाथ धो ,
मजा जिंदगी का लूट पाया ,
अंत चाहे जो भी हो ,
वह वर्तमान में जीता है ,
घूस खोरी को भी ,
अपनी आय समझ लेता है |
आशा

19 comments:

  1. पिछले कुछ दिनों से कई ब्लॉगों पर नहीं जा पाया था। आभार आपका कि आपने इस दरम्यान हुए महत्वपूर्ण कार्यों से अवगत कराया। क्रम जारी रहे।

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  2. बहुरंगी चर्चा। बहु-उपयोगी चर्चा। लिंकों पर जाना ही होगा।

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  3. बहुत अच्छे और बहुत सारे लिंक्स मिले ....आभार

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  4. bahut achhe gyanvardhak links ke liye aabhar.
    bahut sundar saarthak charcha...

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  5. बहुत सार्थक चर्चा के लिए बधाई |एकल चर्चा में
    मुझे स्थान दिया मेरा सौभाग्य है |इस के लिए बहुत बहुत आभार |
    आशा

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  6. मेरे लिए यह नया परिचय रहा . धन्यवाद.

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  7. सुन्दर और सार्थक चर्चा ... मुझे भी स्थान देने का शुक्रिया मनोज जी ...

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  8. बहुत बढ़िया चर्चा हमेशा की तरह .... आभार

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  9. सुंदर परिचर्चा मनोज जी| बधाई|

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  10. bahut sundar charchaa hai... aaj to Manoj ji aur Dr Roop chandr ji ki combined charcha ka lutf kuch jyada hee hai hai..vaah.. aur link me jana ho raha hai aik aik kar...Dhanyvaad aap dono ko.. sundar charcha ke liye..

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  11. बहुत बढ़िया चर्चा -- आभार

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  12. मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिये आपका और इस साईट का आभार।

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  13. काफी अच्छे लिंक्स मिले आभार.

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  14. बेहतरीन चर्चा............

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  15. बहुत अच्छे लिंक्स से सुसज्जित अच्छी चर्चा.

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  16. बहुत अच्छे लिंक्स मिले ....बहु-उपयोगी चर्चा
    आभार

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  17. यह एक लाइना की चर्चा बहुत बढ़िया रही!
    इसीलिए तो इससे मेल खाती हुई एकल चर्चा भी इसमें मैंने जोड़ दी थी!
    --
    डॉ नूतन गैरोला जी शुक्रवार को बाहर जी रही हैं! इसलिए शुक्रवार की चर्चा बहन संगीत स्वरूप जी के नाम है! बस एक शुक्रवार की ही तो बात है!

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