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Monday, November 09, 2015

आतिशबाजी का नहीं, दीपों का त्यौहार--चर्चा अंक 2155

जय माँ हाटेश्वरी...
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हुआ मौसम गुलाबी अब,
चलो दीपक जलाएँ हम।
घरों में धान आये हैं,
दिवाली को मनाएँ हम।

बढ़ी है हाट में रौनक,
सजी फिर से दुकानें हैं,
मधुर मिष्ठान को खाकर,
मधुर वाणी बनाएँ हम... 
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खुशिया देने के लिए, चलता रहता खेल।१।
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तम हरने के वास्ते, खुद को रहा जलाय।
दीपक काली रात को,  आलोकित कर जाय।२।
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झिलमिल-झिलमिल जब जलें, दीपक एक कतार।
तब बिजली की झालरें, लगती हैं बेकार।३।
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मेधावी मेधा करे, उन्नत करे चरित्र।
मातु शारदे को नहीं, बिसरा देना मित्र।४।
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लक्ष्मी और गणेश के, साथ शारदे होय।
उनका दुनिया में कभी, बाल न बाँका होय।५।
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दीवाली का पर्व है, सबको दो उपहार।
आतिशबाजी का नहीं, दीपों का त्यौहार।६।
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दौलत के मद में नहीं, बनना कभी उलूक।
शिक्षा लेकर पेड़ से, करना सही सुलूक।७।
रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 
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नहीं किसी से कुछ भी कहता,
शान्त खड़ा शापित सा सहता,
सम्बन्धों को मधुर बनाये, दुविधा में जीता रहता हूँ ।
अश्रु नहीं बन पाती पीड़ा, मन ही मन पीता रहता हूँ ।। ३ ।।
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तुम्हारे साथ भी
वही करता है जो
सभी के साथ
उसने हमेशा से किया है
सभी को राम से प्रेम है
 सभी को जय श्री राम
कहना अच्छा लगता है
कोई खेद नहीं होता है
राम राम होता है लक्ष्मण
प्रश्न करना हमेशा
दर्दमय होता है
उत्तर देना उस से भी
ज्यादा दर्द देता है 
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पुकारे ज़िंदगी जी लो यहाँ हर पल
अभी तो ज़िंदगी भी मुस्कुराती है
....
खिले है फूल पल दो पल चमन में अब
बहारें आज साजन खिलखिलाती है
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मुल्क से अपने सभी घर, लौट कर आने लगे है 
फासले होने लगे कम, दिल मिलाती है दिवाली
मग्न है सब खेलने में, ताश, बूढ़े और बच्चे
मिल ठहाकों के पटाखे, खिलखिलाती है दिवाली
झोपडी में एक दीपक रोज जलता हौसलों का
पेट भर भोजन मिला जो, मुस्कुराती है दिवाली
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दराज के कोने में चि‍पकी
तस्‍वीरों की तरह
मन में छि‍पा बचपन खींच लाएंं
छत के जंगले पर कंदील टांग
ताली बजा खुश हो जाएं
घी के दि‍ये सी पवि‍त्र मुस्‍कान चेहरे पर सजाएं

आओ, इस दीपावली
हम अपने मन को भी धो-पोंछ कर चमका लें
वि‍गत के हर दर्द को
अपने मन से बुहार लें
हो जाएं उज्‍जवल, वि‍कारवि‍हीन
कि‍सी के लि‍ए मन में
कोई द्वेष न पालें
जगमग-जगमग दीप जला लें।
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पायल पाडिया (तेल्हारा) द्वारा बनाई गई रांगोली
संगिता पाडिया (आकोला) द्वारा  बनाई गई रांगोली
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तुम तो  चने क्या दोगे गरीबों का गुण भी  बैसाखी के साथ लगाकर  खा गए और डकार भी नहीं ली अल्वी राशिद। बकौल तुम्हारे मोदी काश्मीर में  चने तो बाँट रहे हैं।
तुमने तो बाढ़ के दिनों में उनके कपडे  तक उतार लिए थे।विकलांगों के हिस्से को हड़प लिया था वो तुम्हारी  पार्टी के लोग थे। ये तुम्हारी पार्टी की करतूत है जिसे
शायर ने व्यंजना से इस प्रकार कहा है :
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उन्होंने क्या लिखा है अपने शुभकामना सन्देश में ज़रा आप भी जान लें , ‘’ गुरूजी , खूब खाओ,खूब पचाव , दिवाली में मौज मनाओ | बस इतना रखना हमारा ध्यान जब पधारें
शाला में आपकी , भूल न जाना कराना कमीशन का जलपान | दिवाली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ आपका खटपट लाल , पंचायत चुनाव का भावी सरपंच प्रत्याशी |’’
उनके सन्देश में दो बातें दोमुहें सांप की तरह स्पष्ट थी | अत: सरकारी नौकर होने के नाते सरकारी क्षेत्र में इन दो बातों का महत्त्व हम अच्छी तरह समझते हैं
| अत: गलती न होने की संभावना पर शक न करें |
पांचवा और अंतिम सन्देश उस व्यापारी से मिला था, जो ‘’ अलाटमेंट ‘ की प्रतीक्षा के वक्त दफ्तर की कई – कई योजनाओं की ऐसी-तैसी करने के लिए उधारी में स्टेशनरी
, दाल , नमक, तेल, 5 परसेंट अधिक कीमत पर व फर्जी बिल उपलब्ध कराकर ‘’ गुरु सेवा ‘ कर बाकायदा सहयोग प्रदान करता रहा है | बेचारे ने शब्द तो नहीं गधे पर एक
चित्रमय कार्ड के साथ उधारी के बिल अवश्य ही चिपका रखे थे , जो मैं आपको विस्तार से तो नहीं बता सकता | इज्जत का सवाल है भई | इज्जत बची रहे , इसलिए दीप पर्व
की हार्दिक शुभकामनाएं |
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अब अंत में...
धनत्रयोदशी पर यमदीपदान धनत्रयोदशी पर करणीय कृत्यों में से एक महत्त्वपूर्ण कृत्य है, यम के निमित्त दीपदान । निर्णयसिन्धु में निर्णयामृत और स्कन्द-पुराण
के कथन से कहा गया है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को घर से बाहर प्रदोष के समय यम के निमित्त दीपदान करने से अकालमृत्यु का भय दूर होता है ।
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आज से ठीक पन्द्रह वर्ष पूर्व भारत के 27वें राज्य के रूप में 
9 नवम्बर, सन् 2000 को उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना हुई थी! 
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9 नवम्बर सन 2000 में उत्तर प्रदेश पर्वतीय जिलों को अलग कर के उत्तराखण्ड राज्य बनाया गया था.... 
उच्चारण पर रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

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कार्टून:- गऊ माता तो बाप हो गई. 

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आज की चर्चा को यहीं विराम देता हूं...
 ईश्वर से ये कामना है कि...
इस बार की दिवाली...
सभी घरों में खुशियां लाए...
विश्व में अमन हो...
धन्यवाद...

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