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Wednesday, November 11, 2015

"दीपावली विशेषांक" (चर्चा अंक 2157)

आज की चर्चा में आप सभी का स्वागत है।  
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें। 
दीपावली ‘अंधरे’ से ‘प्रकाश’ की ओर जाने का पर्व है: इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह उपनिषदोंकी आज्ञा है। दीपावली भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्यौहार है जिसका बेसब्री से इंतज़ार किया जाता है। दीपावली पर्व के पीछे मान्यता है कि रावण-वध के बीस दिन पश्चात भगवान राम अनुज लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ चौदह वर्षों के वनवास पश्चात अयोध्या वापस लौटे थे। जिस दिन श्री राम अयोध्या लौटे, उस रात्रि कार्तिक मास की अमावस्या थी अर्थात आकाश में चाँद बिल्कुल नहीं दिखाई देता था। ऐसे माहौल में नगरवासियों ने भगवान राम के स्वागत में पूरी अयोध्या को दीपों के प्रकाश से जगमग करके मानो धरती पर ही सितारों को उतार दिया। तभी से दीपावली का त्यौहार मनाने की परम्परा चली आ रही है।
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") 
आलोकित हो वतन हमारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
कंचन जैसा तन चमका हो,
उल्लासों से मन दमका हो,
खुशियों से महके चौबारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
शालिनी कौशिक 
वसुंधरा के हर कोने को जगमग आज बनायेंगे ,
जाति-धर्म का भेद-भूलकर मिलकर दीप जलाएंगे .
.......................................................................
पूजन मात्र आराधन से मात विराजें कभी नहीं ,
होत कृपा जब गृहलक्ष्मी को हम सम्मान दिलायेंगें .

आशा सक्सेना  
हो मुदित दीपक जलाओ
प्यार से उपहार लाओ
प्यार बांटो प्यार पाओ
इस क्षण भंगुर जीवन में
यही पल मधुर लगते हैं
इन्हें जियो जितना चाहो
बाती कपास की स्नेह से भरपूर
अपना स्वत्व भूल स्वयं जलती है
सुशील कुमार जोशी 
अब चोर होना 
अलग बात है 
ईमानदार होना 
अलग बात है 
चोर का 
ईमानदार होना 
अलग बात है 
चोरी करने के 
देशवाली 
यह जो भारत है ना जब किसी को बिठाता है तो पलकों पर भी बिठा लेता है लेकिन जब पलकों पर बेठने वाला ही आँखों से छेड़खानी करे तो फिर पटकना भी बहुत अच्छी तरह जनता है। 
यही आज बिहार मैं हुआ यह पहली बार हुआ है जब किसी के जीतने के ख़ुशी मनाने के बजाये किसी के हारने पर ज्यादा ख़ुशी मनाई जा रही है ...
ओंकार 
आनेवाली है दिवाली,
जलेंगे दिए,
बनेंगे पकवान,
सजेगी रंगोली.
आशा जोगळेकर 
बचपन में दीवाली की खुशी कुछ और ही होती थी। पांच या छह दिन मनाया जाता था ये त्यौहार। गोवत्स द्वादशी या वसुबारस के दिन से दीवाली शुरु, फिर धन तेरस, नरक चौदस या छोटी दीवाली, लक्ष्मी पूजन या बडी दीवाली, पडवा या अन्नकूट (गोवर्धन पूजा) और भाई दूज।
फ़िरदौस ख़ान 


मेरे महबूब
मेरी रूह में रौशन हैं
तुम्हारी मुहब्बत के दिये
जैसे
घर में के आंगन में
दमकते हैं
अक़ीदत के दिये...
कंचनलता चतुर्वेदी 
दीदी मेरी जल्दी आओ |
आओ मिलकर दीप जलाओ |
तम से मुझको डर लगता है,
इसको जल्दी दूर भगाओ |
दीदी मेरी जल्दी आओ |
वीरेन्द्र कुमार शर्मा 
हमारे शाश्त्रों में सीख दी गई है किसी ईमानदार व्यक्ति के साथ देर तक मखौल करना उसका मज़ाक उड़ाना ,ऐसा करने वाले की गंभीर क्षति का कारण बनता है।
भागवदपुराण के ग्यारहवें स्कंध में कथा है कैसे यदुवंश का विनाश हुआ। नारद के नेतृत्व में जब भगवान के वैकुण्ठ लौटने से पहले विश्वामित्र ,अत्रि ,आंगिरस,वशिष्ठ ,दुर्वासा ,भृगु वर्तमान गुजरात के क्षेत्र पिण्डारका में सर्वजन हिताय यज्ञ कर रहे थे।
राजीव कुमार झा 


मत खोलो 
पृष्ठ अतीत की
अब भी बची है
गंध व्यतीत की
कालीपद प्रसाद 
जिन्दगी मिली है तो, अंतिम श्वांस तक जीना है
रास्ता चाहे जैसा हो, उस पर चलते रहना है |
चाहे हिमालय की गगनभेदी, तीखी चोटियाँ हों 
प्रसन्न वदन चतुर्वेदी 
आप सभी को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनायें......
यशवंत यश 
न जाने किस नशे में
 कभी कभी
 लड़खड़ा जाते हैं कदम
 न जाने किन उम्मीदों में
 कभी कभी
प्रवीण चोपड़ा 
मैं अकसर आप का तारुफ़ कुछ ऐसे सेहतमंद लोगों से करवाता रहता हूं जिन की जीवनशैली से हम सब को ..विशेषकर मुझे .. बहुत कुछ सीखने को मिलता है.
तो आज आप की मुलाकात करवाते हैं श्री पी पी सिंह जी से ...इन की आयु ६३-६४ वर्ष है...रिटायर हुए चार साल हो चुके हैं। मेरा ध्यान इन के

राकेश गुप्ता 
कब तक हिन्दू को मुस्लिम से, हर रोज लड़ाया जायेगा,
कब तक गोधरा होगा और अख़लाक़ जलाया जायेगा,
कब तक वोटों की खेती को मंडल और कमंडल होंगे,
अगड़ों पिछड़ों को आखिर कब तक भड़काया जायेगा


ज्योतिपर्व दीपावली पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनायें ।
आगामी वर्ष आपके जीवन में इसी तरह आलोक और आनन्द की निरन्तरता बनाए रखें।

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