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Friday, June 03, 2022

"दो जून की रोटी" (चर्चा अंक- 4450)

 मित्रों!

शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

देखिए मेरी पसन्द के कुछ अद्यतन लिंक।

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ग़ज़ल "बगावत भी करे कैसे, यहाँ दो जून की रोटी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

हमारे देश में मजदूर की, किस्मत हुई खोटी
मयस्सर है नहीं ढंग से, उन्हें दो जून की रोटी

दलाली में लगे हैं आज, अपने देश के सेवक
बगावत भी करे कैसे, वहाँ दो जून की रोटी 

उच्चारण 

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“क्षणिकाएँ” 

बारिशों में गुमटी पर

पकती चाय है जिन्दगी

घूँट-घूँट पीने का

आनन्द ही कुछ और है ।

मंथन 

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अपनी बात : दोहों के साथ 

आज इसी लोकप्रिय विधा दोहा में आप सब के साथ कुछ भाव साझा कर रहा हूँ।आशा है भिन्न-भिन्न शब्दों को लेकर कहे गए ये दोहे आपको पसंद आएँगे और आप अपनी प्रतिक्रिया से अवश्य ही अवगत कराएँगे।
सादर🌷🌷🙏🙏
विभिन्न शब्दों को लेकर 
रचे   गए    कुछ   दोहे
*****************
     --- ©️ओंकार सिंह विवेक
शीत
©️
तन  पर  लिपटे  चीथड़े, शीत लहर की मार,
निर्धन   सोचे    सर्दियाँ,  होंगी   कैसे   पार। 

मेरा सृजन 

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तपती गर्मी जेठ मास में 

अनजाने ही मिले अचानक 
एक दोपहरी जेठ मास में 
खड़े रहे हम बरगद नीचे 
तपती गरमी जेठ मास में-

उम्मीद तो हरी है . 

--

लघुकथा- गुलाम कौन? 

 

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कोंपल के रक्षक 

"क्या इस घर के मालिक को बच्चे पसन्द नहीं थे कि इकलौता बेटा हुआ और उस इकलौते बेटे ने औलाद ही नहीं किया?"अभी फँख फैले नहीं थे लाल-लाल गलफड़ वाले दुधमुँहे चूजे ने माँ चिड़ी से पूछा।

"अरे नहीं रे! मालिक को बच्चे बहुत पसन्द थे। मेरी दादी बताया करती थीं कि ये अपनी ही शादी में आए छोटे-छोटे बच्चों को कप-प्लेट, लैंप-लालटेन के शीशे को फोड़ने पर क्रमानुसार चवन्नी-अठन्नी-रुपया-दो रुपया दिया करते थे।  च च चनाक, ट्टुन ट्टुन टनाक बिखरे किरचों के ढ़ेर पर माँ, बुआ, मामी, चाची, मौसी से डाँट खाने से बेहद प्रफ्फुलित होते।" माँ चिड़ी किस्सा सुना रही थी।

"संयुक्त परिवार के सुख को भोगा पिता-पुत्र अपने पुश्तैनी घर को बाल गृह बना रखा है।"

"मालिक के बेटे के अनुशासन में हमें निश्चिंतता की जिन्दगी मिल जाती है। है न माँ!" 

"सोच का सृजन" 

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आप तो बड़े #माहिर हो ! 

इमेज गूगल साभार

आप तो बड़े #माहिर हो ,

#दिल चुराने में ।

बातों ही बातों में ,

अपना बनाने में । 

मेरी अभिVयक्ति 

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मुस्कुराना ज़रूरी है.. 

 मुस्कुराना बेहद ज़रूरी है

भले ही

 आप जी रहे हों गम के साये में 

या फिर घेर रखा हो दिल को 

किसी खौफ के साये ने

बच्चे फाके कर रहे हों, और न मिली हो पगार

पर मुस्कुराना बेहद ज़रूरी है। 

🌈🌹शेफालिका उवाच🌹🌈 

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सफ़र ज़िन्दगी का ... 

ये जिंदगी भी तो गुज़र रही है तेरे बिना
हाँ कुछ यादें साथ चलती हैं ... 
जैसे चलता है तारों का कारवाँ  
लम्हों के अनगिनत जुगनू ... 
जलते बुझते हैं सफ़र में
पर साथ नहीं देते 
जैसे समय भी नहीं देता साथ 

 
स्वप्न मेरे दिगम्बर नासवा

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उलझनों में दिल यूं पड़ा 

 ख्वाबों का सिलसिला 

जब कभी चल पड़ा

मैं ज़मीन पे चलूं

आसमां में उडूं

उलझनों में ये दिल यूं पड़ा... 

आपका ब्लॉग 

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बस केवल एक सिप ! अरे लो न !

केवल एक सिप।
डरो मत ! इतने में कुछ भी नहीं होता ।
लो न ! 
 इतने बड़े शरीर में एक ढक्कन, उस पर आधा गिलास बरफ़ । ये तो ऊँट के मुँह में जीरा के समान है। दीपक ने श्रद्धा को गिलास पकड़ाते हुए फिर वही बात दोहराई । 
ऐसे ही नशा होने लगे तो लोग ये बोतलें क्यों खरीदें ?एक ढक्कन से ही काम चला लें..न 
एक बोतल महीने भर चले 

 
गागर में सागर जिज्ञासा सिंह

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गैरों के हाथों ना सौंप दें ,यारा ! निज जीवन का रिमोट 

Touch me not plant

जीवन है अपना, आओ स्वयं को 

स्वयं ही करना सीखें प्रमोट !

गैरों के हाथों ना सौंप दें,

यारा ! निज जीवन का रिमोट ! 

Nayisoch 

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भास्कर Explainer : अंगदान के नियम महिला व पुरुष के लिए समान, अंगदाता की पहचान जरूरी 

 

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मशहूर हॉरर लेखक आर एल स्टाइन की नई किताब जल्द ही होगी रिलीज आर एल स्टाइन (R L Stine) बाल पाठकों के लिए लिखी गई गूसबम्पस (Goosebumps) शृंखला और किशोरों के लिए लिखे गए फियर स्ट्रीट (Fear Street) शृंखला के उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं। शायद ही ऐसा कोई हो जिन्होंने उनकी रचनाओ या उनकी रचनाओं पर बनी फिल्मों को न देखा होगा। अब तक वो 300 से ऊपर से किताबें लिख चुके हैं और उनकी किताबों की 40 करोड़ से ऊपर प्रतियाँ बिक चुकी हैं। उनकी गूसबम्प स्लैपीवर्ल्ड शृंखला का उपन्यास 'स्लैपी इन ड्रीमलैंड' (Slappy in Dreamland) अप्रैल 2022 में रिलीज हुआ था। वर्ष 2021 में उनकी फियर स्ट्रीट शृंखला के उपन्यासों को आधार बनाकर एक तीन फिल्मों की त्रेयी नेटफ्लिक्स में रिलीज हुई थी जो कि दर्शकों को काफी पसंद आई थी।  

 

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नीति के दोहे मुक्तक 

निः स्पृह

अधिकार पाकर कोई, निः स्पृह कैसे कोय।

जिमि श्रृंगार  प्रेमी नर, अकाम  नाही होय।।1।।

द्वेष

मूरख द्वेष सदा बुध सो, रंक  धनी  से  मान।

परांगना   कुलीना   सो, विधवा सधवा जान।।2।।

रक्षण

धन से रक्षित  धर्म होय, योग से रक्षित ज्ञान।

भली नारि से घर रक्षित, मृदुता   से  श्रीमान।।3।।

--अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। 

काव्य दर्पण 

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भारत माता अभिनन्दन सम्मान-2022 के लिए संस्था का हार्दिक आभार :) 

सभी साथियों को मेरा नमस्कार कई दिनों के बाद आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ एक अच्छी खबर के साथ सम्मान मिलना किसे अच्छा नहीं लगता और जब आपको वो सम्मान अपने गृह राज्य मे मिले सामाजिक संस्था भारत माता अभिनंदन संगठन, हरियाणा द्वारा सामाजिक व साहित्यिक क्षेत्र मे योगदान के लिए 

शब्दों की मुस्कुराहट :) 

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कार्टून :- राजनीति‍ में बेमानी सवाल 

 

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हमारी सोसायटी में कुत्ता घर और ज्ञानवापी “मस्जिद” विवाद 

देश समझना हो तो अपने आसपास का समाज समझ लीजिएअच्छे समझ में आने लगेगा। कई बार राजनीतिक चर्चा होती है किहर बात के लिए नेहरू जी को दोष देकर भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी कब तक काम चलाएँगे। राजनीतिकआर्थिक औरयहाँ तक किधार्मिक सन्दर्भों में भी यह जवाबी तीर राजनीतिक दलों के प्रवक्ता एक दूसरे पर चलाते हैं। एक और बात कही जाती है किजब आप विपक्ष में थे तोयही बात मानते थेलेकिन अब आप सत्ता में हैं तो उसके उलट बात कह रहे हैं या फिर इसे उल्टा कर दीजिए। यू टर्न आपको लेने को नहीं कह रहा हूँसिर्फ सत्ता पक्ष और विपक्ष में राजनीतिक दलों को एक दूसरे के स्थान पर रखकर देखने को कह रहा हूँ।  

बतंगड़ BATANGAD 

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बीसीआई विचार करे 

आश्चर्य है कि व्यापारी वर्ग सरकार से स्वयं के लिए विधान परिषद की सीट मांग सकता है, सांसद, विधायक की तरह वीआईपी का दर्जा मांग सकता है, हर शहर में एक चौक का नाम व्यापार शक्ति चौक करने की मांग कर सकता है और विद्धान कहे जाने वाले और देश की आजादी से लेकर आज तक देश को सर्वोत्कृष्ट विकास की राह पर पहुंचाने वाले अधिवक्ताओं का समुदाय अपने वर्चस्व और सम्मान को लेकर खामोशी अख्तियार कर रहा है.  

कानूनी ज्ञान 
ऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन 

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आज के लिए बस इतना ही...!

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15 comments:

  1. वाह वाह!बहुत ही संयत और सार्थक चर्चा

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  2. सुन्दर सार्थक और श्रमसाध्य चर्चा प्रस्तुति ।बेहतरीन व लाजवाब सूत्रों का संयोजन ।आज की चर्चा में मेरे सृजन को सम्मिलित करने के लिए सादर आभार आदरणीय शास्त्री सर ।

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  3. आदरणीय गण .

    अति सुन्दर एवं सार्थक चयन के लिए दिल से धन्यवाद।

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  4. सभी प्रस्तुतियाँ शानदार.

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  5. बहुत सार्थक सदैव की ही तरह, हार्दिक धन्यवाद 🙏🙏

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  6. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  7. सार्थक चर्चा प्रस्तुतियाँ शानदार....

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  8. वन्दन
    श्रमसाध्य प्रस्तुति हेतु साधुवाद के संग हार्दिक आभार

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  9. विविधता और रोचकता लिए हुए बहुत सराहनीय अंक । आपके श्रमसाध्य कार्य को नमन ।

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  10. उत्कृष्ट लिंकों से सजी लाजवाब चर्चा प्रस्तुति...
    मेरी रचना को भी चर्चा में शामिल करने हेतु तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार ।

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  11. सुंदर सराहनीय चर्चा प्रस्तुति

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  12. आदरणीय मयंक सर , मेरी प्रविष्टि के लिंक की चर्चा मंच "दो जून की रोटी" (चर्चा अंक- 4450) (चर्चा अंक-4395) पर शामिल करने के लिए आपका बहुत धन्यवाद एवं आभार ।
    सुन्दर संकलन , सभी रचनाएं बहुत ही उम्दा । सभी आदरणीय को बहुत बधाइयां एवं शुभकामनाएं ।
    सादर ।

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  13. अति उत्तम चर्चा मंच की पोस्ट आदरणीय शास्त्री जी

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  14. बहुत अच्छी और सार्थक चर्चा
    सुंदर संयोजन
    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मलित करने का आभार

    सादर

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