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Tuesday, June 21, 2022

"पिताजी के जूते"'(चर्चा अंक 4467)

सादर अभिवादन आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है (शीर्षक आदरणीय बलबीर राणा "अडिग"जी की रचना से)

वैसे तो आज अंतराष्ट्रीय  योग दिवस है 
आप सभी को योग दिवस की हार्दिक शुभकामनायें 
योग करें,स्वस्थ रहें, मस्त रहें 

लेकिन अभी पितृदिवस की खुमारी गई नहीं है और जाएगी भी नहीं क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में पिता एक दिन के लिए नहीं होते ना ही उनसे मिलने के लिए "appointment"लेने की आवश्यकता होती है (वैसे सभ्य कहें जाने वाले समाज में पश्चिमी देखा-देखी में ये होने लगा है)लेकिन आम लोगो के घरों में आज भी "पिता" का दिल और द्वार हमेशा अपने बच्चों के लिए खुला ही रहता है अपने जन्मदाता के चरणों को नमन करते हुएचलते हैं, आज की कुछ खास रचनाओं की ओर....-----------------------------------------

संस्मरण "स्मृतिशेष बाबा नागार्जुन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

---------------------------पिताजी के जूते


आज नजर पड़ी 

बिना पांव के 

उन प्रिय जूतों पर 

जो पिताजी के प्रिय थे 

लोकलाज 

शान सम्मान के द्योतक थे, 

लेकिन आज

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फ़ादर्स डे पर ..

मैंने सोचा है कई बार

पर हर कोशिश के बाद जाना है यही

कि मैं नहीं लिख सकती 

आप पर कोई कविता

उठती ही नहीं क़लम

मिलते ही नहीं शब्द

मिलते भी हैं तो फीके और अधूरे

अभिव्यक्ति सिमटी और सिकुड़ी सी लगती है


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 “पाती”


घूमे निशि दिन यूंही अकारण 

गंतव्य का नहीं निशान 

अंतहीन राहों पर चलना

एक बटोही की पहचान 


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उधेड़ बुन


श्वास उखड़ती रात ढली है

सोई जाकर कक्ष।

सोन तार से कंबल ओढ़े

खड़ा अभी तक यक्ष।

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स्वस्तिक पर खून के छींटे


 "कल बिहार बन्द था।"

"कल भारत बन्द है और हमारी वापसी है, न जाने कैसे हालात होंगे..।"

"हालात जो होने चाहिए उसके पसङ्गा भर नहीं हो पा रहा।"

"क्या आपके द्वारा, तोड़-फोड़, आगजनी और देश के सम्पत्ति नष्ट करने को समर्थन देते हुए उचित ठहराया जाना समझ लूँ?"


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आत्म साक्षात्कार



कोई स्थापित नाम, जिस क्षेत्र में, जिस भी वजह से, सही - गलत, सार्थक या गौण है, - उसका साक्षात्कार होता है । पूछे जाते हैं कुछ खास प्रश्न, जिनके उत्तर मायने रखते हैं ... कभी कभी नहीं भी रखते हैं । 

जिनका साक्षात्कार हुआ,वे ही सिर्फ विशेष मुकाम पर हैं और जिनका साक्षात्कार नहीं हुआ,उनके आगे कोई मुकाम नहीं है, ...ऐसा बिल्कुल नहीं होता है । रही पहचान की बात तो हिरण्यकश्यप की,महिषासुर की भी एक पहचान थी, रावण की तो बात ही अलग है ... आज वे होते तो कई पत्र-पत्रिकाओं में होते, लाइव टेलीकास्ट पर होते । ख़ैर !!!

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आस्था की परखशेल्डन सिर्फ नौ साल में ही हाई स्कूल में पढ़ने वाला  तेज बुद्धि का  विशेष बच्चा हैं |  विज्ञानं पढ़ने वाला शेल्डन ईश्वर में विश्वास नहीं रखता लेकिन उसकी माँ एक बहुत ही धार्मिक महिला हैं | जब  उनके करीबी की सोलह साल की बेटी की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती हैं तो उनका विश्वास ईश्वर से कुछ हिल जाता हैं | ---------------------------------------

दिनचर्या दिवाकर की


दिन भर तप कर सूरज जब
सांझ को ढल जाता है,
तारों भरा आकाश का आंचल

थपकी देकर सुलाता है ।
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  • यादें पापा की


  • उस वक़्त मेरे लिए ये कल्पना से परे होता था कि -एक लड़की जो अपने बाबुल के आँगन में पली- बढ़ी....भाई -बहनों के साथ खेली -कूदी... उसे उसी आँगन में लौट के आने के लिए बाबुल से ही गुहार लगानी पड़ रही हैं......अपने घर -आँगन , माँ -बाबुल और सखियों के विरह में वो इस कदर तड़प रही हैं । इस गीत के एक- एक बोल मुझे तड़पा जाती  थी  ....और मैं माँ से पूछ बैठती थी - " आपकी शादी भी तो 13 वर्ष के उम्र में ही हो गई थी न और आप बताती हैं कि- दादाजी आपको एक साल तक मयेके नहीं जाने दिए थे ...फिर कैसे रही होगी आप नाना -नानी के बगैर। " मेरी बाते सुन माँ की आँखें भर जाती .....भीगें से स्वर में  बोलती - " उस जमाने में हम सब मजबूर होते थे बेटा   " ....लेकिन मैं नहीं जाऊँगी... अपने पापा को छोड़कर ...कभी नहीं जाऊँगी ..
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  • अब तो विज्ञान ने कह दिया अब तो लोगों को समझ आ जाना चाहिए 
  • क्योंकि संस्कारों की माने ना माने विज्ञान का बहुत महत्व है....

विज्ञान भी मानता है कि बच्चे के बेहतर विकास के लिए दादा-दादी जरूरी है!! जानिए इसके 7 कारण...


आजकल शहरों की बिजी लाइफ़ और महंगे मकानों के कारण चाह कर भी बच्चे माता-पिता को साथ में रखने में खुद को असमर्थ पाते है। दूसरे आजकल के कुछ युवा आजादी चाहते है इसलिए माता-पिता को साथ में नहीं रखना चाहते। ऐसे युवा कितना भी दंभ भर ले कि वे खुद के बच्चों को पाल लेंगे लेकिन विज्ञान भी मानता है कि दादा-दादी की छत्र-छाया में ही बच्चों का सर्वांगीण विकास अच्छे से होता है।
----------------------------------------आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दे आपका दिन मंगलमय हो कामिनी सिन्हा 

11 comments:


  1. बेहतरीन सूत्रों से सजी सुन्दर और श्रमसाध्य प्रस्तुति । चर्चा में “पाती” को सम्मिलित करने के लिए हार्दिक आभार कामिनी जी !

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  2. बहुत सुन्दर और सार्थक चर्चा।
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

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  3. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

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  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  5. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति।

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  6. मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए धन्यवाद ।

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  7. मंच पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने हेतु आप सभी को हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार 🙏

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  8. बहुत बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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  9. सुंदर चर्चा, दिली आभार आदरणीया कामिनी सिन्हा जी मेरी रचना शीर्षक हेतु चयन के लिए।
    समय पर उपस्थित नहीं हो पाया क्षमा प्रार्थी हूं

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  10. प्रशंसनीय प्रस्तुति।

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  11. This comment has been removed by the author.

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