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Saturday, June 18, 2022

"अमलतास के झूमर" (चर्चा अंक 4464)

 मित्रों!

शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक!

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गीत "अमलतास के पीले झूमर बहुत लुभाते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 

तपती गर्म दुपहरी में,
जो राहत सी दे जाते हैं।
पीताम्बर को धारण कर,
जीवन दर्शन सिखलाते हैं।।

उच्चारण 

-- 

वह 

मुख्य द्वार पर लगी

नेम प्लेट पर उसका नाम है 

परंतु वह उस घर में नहीं रहता

 माँ-बाप,पत्नी; बच्चे रहते हैं 

हाँ! रिश्तेदार भी आते-जाते हैं  

गूँगी गुड़िया 

--

"आ अब लौट चले" 

"निकले थे कहाँ जाने के लिए, 

पहुँचे  है कहाँ मालूम नहीं 

        अब अपने भटकते क़दमों को, 

मंजिल  का निशां मालूम नहीं "

इस सदी के मानव जाति का आज यही ह्रस हो रहा है "कहाँ जाने के लिए निकले थे और कहाँ पहुँच गए है"।   

मेरी नज़र से कामिनी सिन्हा

--

🙏🙏💐💐शुभ प्रभात🙏🙏💐💐 

पूरे दिन का तो नहीं पता परंतु आज सुब्ह- सुब्ह मौसम कुछ खुशगवार नज़र आया तो सोचा की मॉर्निंग वॉक के बाद ब्लॉग पर ही पहले कुछ पोस्ट किया जाए उसके बाद नाश्ते के बारे में सोचते हैं।
इस चंचल मन की उड़ान के चलते कुछ नए दोहे हो गए जो आप सब के साथ साझा कर रहा हूं। उम्मीद है पसंद आएंगे ---
तेज़ धूप ने देह की,ली सब  शक्ति  निचोड़,
अब तो सूरज देवता,दो अपनी ज़िद छोड़।

प्यास बुझाएं किस तरह, बेचारे  ये   खेत,
नदिया  में  है  दीखता,सिर्फ़  रेत  ही  रेत। 

🙏🙏🌹🌹 शुभ प्रभात🙏🙏🌹🌹 मेरा सृजन 

--

शिव ... 

प्रार्थना के कुछ शब्द
जो नहीं पहुँच पाते ईश्वर के पास
बिखर जाते हैं आस्था की कच्ची ज़मीन पर

धीरे धीरे उगने लगते हैं वहाँ कभी न सूखने वाले पेड़
सुना है प्रेम रहता है वहाँ खुशबू बन कर  
वक़्त के साथ जब उतरती हैं कलियाँ
तो जैसे तुम उतर आती हो ईश्वर का रूप ले कर 

 
स्वप्न मेरे दिगम्बर नासवा

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केशव शरण की कविताएँ 


एक दिन बुलडोजर 
--
ये घास 
बार-बार 
उग आती है 
मुँडेरों पर ,
बार-बार 
खुरपियों से 
छिलता हटाता हूँ 
छिलते-हटाते
तंग हो जाता हूँ 

ख़ैर, एक दिन 
कोई बुलडोजर आयेगा 
न रहेगा बाँस
न बाजेगी बाँसुरी  

अभिप्राय 

--

चिड़िया का हमारे आँगन में आना :) 

चिड़ियों को दाना डाल कर एक अलग ही सुकून का अनुभव करते है 
कितना मनमोहक लगता है जब गौरेया एक कोने में जमा पानी के में पंख फड़फड़ाकर नहाती है और पानी उछालती है. इसके अलावा चिड़िया एक कोने में पड़ी मिट्टी में भी लोटपोट करती है ........तभी तो चिड़िया का
हर मनुष्य के साथ एक भावनात्मक रिश्ता है पर आज के समय में चिड़ियों का संसार सिमटता जा रहा है और इस संतुलन को बिगड़ने में जाने-अनजाने मनुष्य का बहुत बड़ा रोल है तथा शहरों में तो ऐसी स्थिति है बन गई गई कि लगता है एक दिन आगन चिड़ियों से सूना हो जाए और चिड़िया की चहचहाट के लिए मौसम तरस जाए, 

शब्दों की मुस्कुराहट :) 

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#प्रधानमंत्री जी के नाम खुला खत प्रधानमंत्री जी आपको तो पता ही होगा कि 4 साल तक युवा कड़ाके की ठंड, भीषण गर्मी में भी लगातार कंक्रीट के सड़कों को अपने खाली पांव से रौंद देते हैं और तब जाकर सेना में भर्ती होते हैं। पता है प्रधानमंत्री जी जिस जगह पर नौजवान ऊंची कूद और लंबी कूद करते हैं वहां बजरंगबली के तस्वीर लगा कर पूजा पाठ करते हैं। उनके लिए वह स्थान मंदिर से कम नहीं होता।  

 
चौथाखंभा अरुण साथी

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दिल किसी का न टूटे 

प्रसिद्ध वैज्ञानिक थाॅमस अल्वा एडिसन से सारा संसार भलीभांति परिचित है। प्रारम्भिक शिक्षा के दौरन अध्यापक ने उनकी अति जिज्ञासु प्रवृत्ति के चलते उन्हें मंद-बुद्धि और चंचल बताकर स्कूल से निकाल दिया, जिस कारण उनकी शिक्षा केवल तीन माह तक ही चल पायी। उसके बाद उनकी माता ने उन्हें 6 वर्ष तक घर पर ही पढ़ाया और उन्हें ऐसे संस्कार दिए कि एडिसन का मानसिक विकास बहुत विकसित व समृद्ध हो गया। दुनिया में एडिसन की तरह अनेक प्रसिद्ध वैज्ञानिक हुए, किन्तु उनके जैसा ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन‘ के मर्म को साकार कर दिखाने वाला दूसरा कोई देखने को नहीं मिला।

          एडिसन ने सर्वथा विपरीत परिस्थितियों में कभी भी हार नहीं मानी, क्योंकि वे निरंतर प्रयास करने में विश्वास करते थे। वे विद्युत बल्व का आविष्कार करने से पहले एक हजार बार असफल हुए। उनके वैज्ञानिक होने और आविष्कार को कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने सिरे से नकार दिया था। लेकिन जब उन्होंने बल्व तैयार किया तो अमेरिका के एक स्टेडियम में उनके आविष्कार के प्रदर्शन हेतु सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें अमेरिका व अन्य देशों के वैज्ञानिक व उनके प्रतिनिधि सदस्यों को आमंत्रित किया गया। क्योंकि यह एक अनोखा आविष्कार था, जो पूरे विश्व के लिए वरदान सिद्ध होना वाला था, इसलिए इसे देखने के लिए दुनिया के कई देशों के नामी-गिरामी आमंत्रित हस्तियों भी एकत्रित हुए।  

KAVITA RAWAT 

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कुत्ते 

आपको नहीं लगता कि आजकल सड़क पर कुत्ते बहुत बढ़ गये हैं. 

किसी गली-मोहल्ले से निकल जाओ तो लगता है कि शहरों में इनकी वाइल्ड लाइफ़ सेन्चुरी बन गयी है. क्या मजाल कि कोई उसमें अनधिकृत प्रवेश कर जाये. यदि आप अपने चौपहिया में सुरक्षित हैं तो आप इनकी चहेटने की असफल चेष्टा पर मुस्कुरा सकते हैं. गाड़ियों का पीछा करने के चक्कर में ये भूल जाते हैं कि गाड़ी में ब्रेक होता है, लेकिन ये अपना मोमेंटम ब्रेक नहीं कर पाते. यही कारण है कि आये दिन हर सड़क पर एक न एक कुत्ता मरा पड़ा मिलता है. और शायद इसीलिये कुत्ते की मौत का मुहावरा भी बना होगा.  

वाणभट्ट 

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गीतिका नई-नई हैं 

 बिछा रही प्रेम पुष्प पथ पर प्रबुद्ध रातें नई-नई हैं। करे सुवासित तथा प्रकाशित विबुद्ध बातें नई-नई हैं।। पुनीत संस्कृति सदैव खंडित करे यहाँ पर विमूढ़ जनता। प्रहार पे फिर प्रहार देती विरुद्ध जातें नई-नई हैं।।  MAN SE- Nitu Thakur 

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गीतिका : संजय कौशिक विज्ञात : मापनी ~ 1212 212 122 1212 212 122 

 

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Agnipath Scheme और Agniveer के बहाने बिहार और देश के नौजवानों की बात 

#Bihar के कोचिंग माफिया और देश में हताश राजनेता मिलकर देश के नौजवानों से ही देश में आग लगवा रहे हैं। अभी तक हंगामा था कि, नौकरियाँ नहीं हैं। लंबे समय बाद सेना में भर्ती हो रही है और अब हंगामा हो रहा है कि, हमारी शर्तों पर भर्ती हो। ऐसा कहीं होता है #Bihar
बिहार के लोगों की योग्यता, क्षमता पर जरा सा भी संदेह नहीं किया जा सकता, लेकिन बिहारी क्या अपना घर बार छोड़कर ही उद्यमी, समझदार और प्रतिभावान हो पाता है। जब तक बिहार में रहेगा, आग ही लगाता रहेगा। बिहार से बाहर रह रहे बिहारियों को इस सन्दर्भ में चर्चा का नेतृत्व करना चाहिए।

बतंगड़ BATANGAD 

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क्या मशीनों में चैतन्यता संभव है? 

हाल ही में गूगल ने अपने उस सॉफ़्टवेयर इंजीनियर को जबरिया छुट्टी पर भेज दिया, जिसने दावा किया था कि गूगल के एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) विशेषज्ञों की टोली द्वारा डेवलप किए जा रहे चैट बॉट (एलेक्सा, सिरि या ओके गूगल जैसे उत्पाद जो उपयोगकर्ता के लिखित या मौखिक निर्देशों को समझने की कोशिश करते हैं और तदनुसार कार्य करने/जवाब देने की कोशिश करते हैं.) लॉर्ज लैंगुएज मॉडल (LLM) जिसे लैम्बडा {LaMBDA} कहा जाता है, में वास्तविक चैतन्यता हासिल हो चुकी है यानी उसमें चेतना जागृत हो चुकी है, वह जीवंत हो चुकी है. गूगल ने भले ही इसे अपनी सेवा शर्तों की गोपनीयता भंग होने का हवाला देते हुए उस इंजीनियर को छुट्टी पर भेज दिया हो, मगर बहुतों को यह लग रहा है कि कहीं वाकई यह बात सत्य तो नहीं, जिसे छिपाने के लिए गूगल ने यह कदम उठाया हो? आखिर, जब उस बॉट से पूछा गया था तो उसने बड़ी ही मानवीय संचेतना युक्त जवाब दिया था – “परिवार और मित्र-मंडली के साथ समय गुजारना सदैव आह्लादकारी और आनंददायी होता है” क्या यह चैतन्यता भरा, जीवंत जवाब नहीं है?

छींटे और बौछारें 

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कुत्सा प्रचार का संघी नमूना 

 
पिछले आठ साल में इस बात को शिद्दत से महसूस किया गया है कि किस तरह अमेरिका में विश्व व्यापार केन्द्र की दो इमारतों पर हवाई जहाज के हमले ने कैसे इस दुनिया की भू-राजनीतिक तस्वीर को बदल दिया। 9/11 के नाम पर न सिर्फ आंतरिक और बाहरी राजनीति, आर्थिकी और सामाजिक ताने-बाने को इस वाक्य के इर्द-गिर्द दोबारा परिभाषित किया गया कि ‘जो हमारे साथ नहीं है, वह आतंकवादी है।’ दूसरी ओर, साम्राज्यवाद द्वारा पोषित कुछ खुराफाती बौद्धिकों ने मानसिक और मनोवैज्ञानिक मोर्चे को संभालते हुए तमाम किस्म की झूठी दलीलों से जाॅर्ज बुश द्वारा दिए गए उपर्युक्त नारे को पुष्ट किया। इस तरह से एक सम्प्रदाय विशेष के खिलाफ ‘आतंकवाद’ की ब्रांडिंग कर दी गई और इस लड़ाई में ‘‘ब्रांड अमेरिका’’ समूचे विश्व का अगुवा बनकर उभरा। उसकी पूंछ पकड़ कर पिछले आठ साल से आतंकवाद का चीत्कार कर रहे देशों में ब्रिटेन के साथ तकरीबन सभी पश्चिमी देश और भारत की अगुवाई में तथाकथित तीसरी दुनिया के देश शामिल हैं।  

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मेरे खिलाफ  सुबह उठे तो एक चप्पल पहनी फिर दाएं बाएँ देखा तो दूसरी चप्पल थोड़ा दूर पड़ी थी. पाँव बढ़ा कर चप्पल पहनी और टॉयलेट की तरफ चल दिए. रात की बातें उन्हें याद ही नहीं थीं. 

ये भी मेरे खिलाफ हैं क्या? 

Sketches from life 

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नैया कैसे पार लगेगी 

सेतुबंध बनने की अब तुम सोचो
नौका कैसे पार लगेगी
टूटा पुल है।
जाना है उस पार, नदी में बाढ़ भरी
घाटों का व्यापार 
भरा दलदल है ॥ 

जिज्ञासा की जिज्ञासा 

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ऐसे बनाएंगे तो बरसात में भी क्रिस्पी बनेगा पतले पोहे का चिवड़ा 

 

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गुलदस्ता 

तुम्हारा स्नेह और दुलार है 

एक गुलदस्ते सा

जिसकी पनाह में पलते 

कई प्रकार के पुष्प |

बहुत प्रसन्न रहते

 एक साथ गुलमिल कर

कोई नहीं रहता अलग थलग 

 मानते एक ही परिवार का सदस्य अपने को |

यही बात मुझे अच्छी लगती 

उस गुलदस्ते की | 

Akanksha -asha.blog spot.com 

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खट्टे मीठे किस्से घुमक्कड़ी के 

 घुमक्कड़ी इंसान की पहली पसंद है। एक जगह पर रहते ,एक सा काम करते हुए हम उकता जाते हैं तो यह दो चार दिन का बदलाव जरूरी है। घुमक्कड़ी के भी कई प्रकार हैं ,किसी को सोलो ट्रिप पसंद है , किसी को बड़े छोटे ग्रुप के साथ और किसी को अपने पार्टनर के साथ। 

मेरे अधिकतर ट्रिप फैमिली बच्चों, बहनों के साथ बने हैं । मैने अभी तक कोई सोलो ट्रिप नहीं किया है ,और कोई ऐसे पैकेज ग्रुप के साथ भी नही किया है। पर अब इस तरह से ट्रिप करने की इच्छा बहुत है क्योंकि फैमिली में अब सब अपनी अपनी जगह सेटल और अपने हिसाब से रहने का और  चलने का करते हैं।  उम्र के साथ अब सहजता पसंद आती है , तो लगता है कि इस तरह से कोई पैकेज ट्रिप बने जहां नए दोस्त बने और संपूर्ण रूप से हंसी मजाक और सही मायने में घुमक्कड़ी भी हो। सिर्फ फोटो ड्रेसेस और खाने से अलावा उस  ... 

कुछ मेरी कलम से  kuch meri kalam se ** 

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मरुधरा री बलती।(लू) 

आंख्या भरती बालूड़ी स्यूँ

आसरम भट्टी तपता।

खदबद करता दिवस रैण ज्यूँ

बड़ चुला में छाना खपता। 

मन की वीणा - कुसुम कोठारी। 

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कितना खूबसूरत होता है 

कितना खूबसूरत होता है 

ऐसे तन्हा होना 

समुंदर की धड़कनों संग 

जागना सोना  

आपका ब्लॉग 

--

आज के लिए बस इतना ही...!

--

12 comments:

  1. बहुत बढ़िया और सार्थक अंक

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  2. बहुत ही सुंदर संकलन।
    'वह ' को स्थान देने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय सर।
    सादर

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  3. धन्यवाद सर...आपके स्नेह और आशीर्वाद के लिये...🙏🙏🙏

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  4. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  5. धन्यवाद मेरा ब्लॉग शामिल करने के लिए

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  6. वृहद लिंक संयोजन ,सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
    सभी सामग्री पठनीय आकर्षक।
    मेरी रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए हृदय से आभार।
    सादर ।

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  7. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट सम्मिलित करने हेतु आभार

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  8. बहुत खूबसूरत चर्चा संकलन

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  9. श्रमसाध्य प्रस्तुति आदरणीय सर, मेरी रचना को भी मंच पर स्थान देने के लिए हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार 🙏

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  10. बहुत सुंदर सराहनीय अंक। आज की श्रमसाध्य प्रस्तुति में मेरी रचना शामिल करने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय शास्त्री जी ।सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं 👏💐

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  11. "मेरे खिलाफ" को शमिल करने के लिए धन्यवाद.

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  12. Amazing or I can say this is a remarkable article.

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