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Saturday, June 04, 2022

'आइस पाइस'(चर्चा अंक- 4451)

सादर अभिवादन। 

शनिवारीय प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। 

शीर्षक व काव्यांश आदरणीय विश्व मोहन जी की रचना 'आइस पाइस' से 

खिलना चाहूँ जब फूलों में,

काँटों ने नजर गड़ाई।

झूमूँ  तनिक तरु लता संग,

मौसम  की कड़ी कड़ाई।

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-

--

भूमिका, "कृष्णायन संजीवनी" 

"रखो कर्म अधिकार तुमकरो न फल का ध्यान।
कर्मों के फल हेतु काकरना मत गुणगान।।
कर्महीन रहना नहींकरो न ऐसा भान।
अर्जुन ऐसे कर्म मेंतेरा है कल्यान।।" 
घोलूँ  मलय सुगंध पवन में,
हो गई, हवा हवाई।
मिले मिलिंद मकरंद चमन में,
हमको मिली तन्हाई।
 मैं भाव हूँ
उमड़ता हूँ तो छा जाता हूँ
काले बादलों सा,
बरसता हूँ तो भी छा जाता हूँ
कागजों पर स्याही के संग
कलम पर सवार होकर 
देखा होगा आपने?
कुछ हों गरज पर अंधे , कुछ होते कामांध।
कुछ मद में अंधे दिखें, कुछ होते जन्मांध।।1।।
अभी-अभी डाकिया रख गया है एक पत्र
देहरी पर
जिसके भीतर लहरा रहा है
आशाओं का संसार
जिसे छूते घबरा रही है लड़की
मुस्कुरा रही है दूर से देखकर ही
मन प्रश्नों तक ही सीमित है
उसका ऐसा होना नियमित है
क्षण भर वो उल्लास मनाता
क्षण भर में वो चिंतित है
गौरी शंकर का गुणगान करें....
भक्ति के व्यापक अर्थ जो जाने
सत्य ही शिव है वो पहचाने
मूढमति उलझन में भटके
प्रभु नागेश्वर का ध्यान करें....

हमारी चाहतों में नहीं था प्यार 

कभी लाघें नहीं मंदिरों के द्वार 

दूर से ही देखते रहे 

लोगों का आना-जाना 

अभी तो हमें था अपनी प्रतिमा को सजाना 

जो भी किया खुद के लिए 

--

समधी के बारे लला (लोकगीत)

जयपुर कढ़ैया के चदरा मंगायों
झारि झारि तकिया सजाय बिछायों
लेटो तो लेटो नाहीं, बहिना बोलाई
तनी एसी चलावें बारे लला ।
भोजन करौ समधी के बारे लला ॥
-- 
”मर गई तू हमारे लिए आज से …ये ले…। "
और मुँह पर कफ़न दे मारा ईर्ष्या ने।
स्त्री समझ न पाई मनोभावों को, वह सकपका जाती है। "हुआ क्या ? "
 समाज की पीड़ित हवा के साथ, पीड़ा से लहूँ लहूलुहान कफ़न में लिपटी स्त्री जब दहलीज़ के बाहर पैर रखती है तभी उलाहना से सामना होता है।
” पुरुषों के समाज में नारी हो, तूने नारीत्व छोड़ पुरुषत्व धारण किया ? उसी का दंड है यह ! "
--
आज का सफ़र यहीं तक 
@अनीता सैनी 'दीप्ति'

8 comments:

  1. रोचक लिंक्स से सुसज्जित चर्चा...

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  2. बहुत सुंदर सराहनीय और विविध रंगों से सजी प्रस्तुति।
    मेरे लोकगीत को शामिल करने के लिए आपका आभार और अभिनंदन प्रिय अनीता जी ।
    सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।

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  3. आपके ' आइस पाइस ' का आभार! विविधताओं से सजी आज की सुंदर प्रस्तुति!!!!

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  4. बहुत बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति।
    आपका बहुत-बहुत धन्यवाद @अनीता सैनी 'दीप्ति' जी!

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  5. सभी प्रस्तुतियां शानदार ।

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  6. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  7. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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  8. देर से आने के लिए खेद है, सुंदर प्रस्तुति, आभार अनीता जी मुझे भी इसका भाग बनाने के लिए!

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