साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

Followers

Thursday, June 09, 2016

नमन शहादत को ( चर्चा - 2368 )

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है
यूँ तो सिख धर्म शहादतों से भरा पड़ा है, लेकिन इसकी शुरूआत हुई गुरू अर्जुन देव जी से | उन्होंने अन्याय के आगे झुकने से प्राण देना ज्यादा उचित समझा और इस दिन के बाद सिख धर्म का रूप बदला | भक्ति के साथ शक्ति को अपनाया गया | गुरू अर्जुन देव तक सभी पाँचों गुरू सिर्फ़ भक्त कवि थे | गुरू अर्जुन देव जी की सबसे बड़ी विशेषता है कि वे उच्चकोटि के संपादक थे, उन्होंने आदि ग्रन्थ जैसे महान ग्रन्थ का संपादन किया, जिससे न सिर्फ़ सिख धर्म अपितु पूरी मानव जाति लाभान्वित हुई | आज उनके शहादत दिवस पर उनको नमन |  
चलते हैं चर्चा की ओर
ऋता शेखर 'मधु'
My Photo
My Photo
मेरा फोटो
धन्यवाद 

1 comment:

  1. "यक्ष युधिष्ठिर संवाद महाभारत के वन पर्व का एक बहुत ही रोचक प्रसंग है। यक्ष प्रश्न इतना जटिल था की आज भी किसी जटिल प्रश्न को लोग उसे यक्ष प्रश्न संज्ञा दे देते हैं
    "

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"सारे भोंपू बेंच दे, यदि यह हिंदुस्तान" (चर्चामंच 2850)

बालकविता   "मुझे मिली है सुन्दर काया"   (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   उच्चारण     अलाव ...