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Wednesday, August 13, 2014

"देशभक्तों का नमन होना चाहिए" ; चर्चा मंच-1704



घण्टे-घड़ियालताल-खड़ताल लेके अब,
भारत माँ का कीर्तन-भजन होना चाहिए।
देश की सीमाओँ को बचाने के लिए तो आज,
तन-मन प्राण का हवन होना चाहिए...
Smart Indian
 
Dr.J.P.Tiwari 

Virendra Kumar Sharma 

Priyanka... 

महेन्द्र श्रीवास्तव 

Amit Srivastava 

udaya veer singh 


 
kuldeep thakur 

सुशील कुमार जोशी 


Madan kumar 


 
bhuneshwari malot 

बतकुचनी
Bamulahija dot Com 

रविकर की कुण्डलियाँ
गए गोद में बैठ, मंच पर बैठे सटकर--
गाली देते ही रहे, बीस साल तक धूर्त |
अब गलबहियाँ डालते, सत्ता-सुख आमूर्त |
सत्ता-सुख आमूर्त, देखिये प्यार परस्पर |
गए गोद में बैठ, मंच पर बैठे सटकर |
यह कोसी की बाढ़, इकट्ठा हुवे बवाली |
एक नाँद पर ठाढ़, करें दो जीव जुगाली ||

14 comments:

  1. बहुत सुंदर चर्चा सुंदर सूत्र संयोजन रविकर जी । 'उलूक' के सूत्र ' किसलिये कोई लिखने लिखाने की दवा का बाजार चुनता है' को जगह देने के लिये आभार भी ।

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  2. विविधता लिए हुए सूत्र.. आभार !

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  3. बढ़िया संकलन, सटीक नीम-निंबौरी, आभार!

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  4. बढ़िया सूत्र व चर्चा , आ. रविकर सर , शास्त्री जी व मंच को धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  5. बहुत बढ़िया लिंक्स-सह-चर्चा प्रस्तुति ...आभार!

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  6. बढिया चर्चा,
    मुझे स्थान देने के लिए आभार

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  7. सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आदरणीय रविकर जी आपका आभार।
    --
    चौदह और पन्द्रह अगस्त को देहरादून प्रवास पर हूँ।
    सादर!

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  8. बढ़िया सेतु लिए आता है चर्चा मंच रविकर की उजास और बोधि तत्व भी।

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  9. महेंद्र श्रीवास्तव जी जो रेवड़ी बांटने वाले होते हैं उन्हें ये नहीं पता कि भारत रत्न एक मर्तबा में कितनों को दिए जा सकते हैं इसीलिए मनीष तिवारी जैसे लोग दर्जनों में लिस्ट ले आये हैं। जब कांग्रेस अपने घर में भारत रत्न बाँट रही थी तब इन्हें एक भी क्रांतिकारी की याद नहीं आयी इनमें कई तो ऐसे हैं जिन्होनें चन्द्र शेखर आज़ाद जैसे क्रान्ति वीरों को आतंकी कह दिया था। ये तो

    जनता ने अपना फैसला दो टूक सुना दिया वरना इस मर्तबा भारत रत्न श्रीमती सोनिया जी को भी दे दिया जाता ,वाड्रा और राहुल का नाम भी सामने आ जाता इन्हें नहीं मालूम रेवड़ी और भारत रत्न में क्या अंतर होता है आपने बड़े मौज़ू सवाल करीने से उठाये हैं। बधाई दो टूक समीक्षा के लिए।

    कुपात्रों से वापस हो " भारत रत्न "
    महेन्द्र श्रीवास्तव
    आधा सच...



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  10. यह कोसी की बाढ़, इकट्ठा हुवे बवाली |
    एक नाँद पर ठाढ़, करें दो जीव जुगाली ||

    अरे वह क्या मारा है दो सांडों को दो कथित छद्म सेकुलरों को .

    गए गोद में बैठ, मंच पर बैठे सटकर--
    गाली देते ही रहे, बीस साल तक धूर्त |
    अब गलबहियाँ डालते, सत्ता-सुख आमूर्त |
    सत्ता-सुख आमूर्त, देखिये प्यार परस्पर |
    गए गोद में बैठ, मंच पर बैठे सटकर |
    यह कोसी की बाढ़, इकट्ठा हुवे बवाली |
    एक नाँद पर ठाढ़, करें दो जीव जुगाली ||

    ReplyDelete
  11. महेंद्र श्रीवास्तव जी जो रेवड़ी बांटने वाले होते हैं उन्हें ये नहीं पता कि भारत रत्न एक मर्तबा में कितनों को दिए जा सकते हैं इसीलिए मनीष तिवारी जैसे लोग दर्जनों में लिस्ट ले आये हैं। जब कांग्रेस अपने घर में भारत रत्न बाँट रही थी तब इन्हें एक भी क्रांतिकारी की याद नहीं आयी इनमें कई तो ऐसे हैं जिन्होनें चन्द्र शेखर आज़ाद जैसे क्रान्ति वीरों को आतंकी कह दिया था। ये तो जनता ने अपना फैसला दो टूक सुना दिया वरना इस मर्तबा भारत रत्न श्रीमती सोनिया जी को भी दे दिया जाता ,वाड्रा और राहुल का नाम भी सामने आ जाता इन्हें नहीं मालूम रेवड़ी और भारत रत्न में क्या अंतर होता है आपने बड़े मौज़ू सवाल करीने से उठाये हैं। बधाई दो टूक समीक्षा के लिए।


    कुपात्रों से वापस हो " भारत रत्न "
    महेन्द्र श्रीवास्तव
    आधा सच...

    ReplyDelete
  12. सुन्दर संकलन

    ReplyDelete
  13. आदरणीय रविकर जी मै अपनी पोस्ट नहीं ढूढ़ पाया।

    ReplyDelete

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