साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Friday, August 29, 2014

"सामाजिक परिवर्तन" (चर्चा मंच 1720)

नमस्कार मित्रों, आज के चर्चा मंच पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। 
सामाजिक परिवर्तन समाज के आधारभूत परिवर्तनों पर प्रकाश डालने वाला एक विस्तृत एवं कठिन विषय है। इस प्रक्रिया में समाज की संरचना एवं कार्यप्रणाली का एक नया जन्म होता है। इसके अन्तर्गत मूलतः प्रस्थिति, वर्ग, स्तर तथा व्यवहार के अनेकानेक प्रतिमान बनते एवं बिगड़ते हैं। समाज गतिशील है और समय के साथ परिवर्तन अवश्यंभावी है। जैसा कि महान दार्शनिक अरस्तू ने भी कहा है- परिवर्तन संसार का नियम है। परिवर्तन किसी भी वस्तु, विषय अथवा विचार में समय के अन्तराल से उत्पन्न हुई भिन्नता को कहते हैं। परिवर्तन एक बहुत बड़ी अवधारणा है और यह जैविक, भौतिक तथा सामाजिक तीनों जगत में पाई जाती है किंतु जब परिवर्तन शब्द के पूर्व सामाजिक शब्द जोड़ कर उसे सामाजिक परिवर्तन बना दिया जाता है तो निश्चित हीं उसका अर्थ सीमित हो जाता है। परिवर्तन अवश्यम्भावी है क्योंकि यह प्रकृति का नियम है। संसार में कोई भी पदार्थ नहीं जो स्थिर रहता है। उसमें कुछ न कुछ परिवर्तन सदैव होता रहता है। स्थिर समाज की कल्पना करना आज के युग में संभव नहीं है। समाज में सामंजस्य स्थापित करने के लिए परिवर्तन आवश्यक है।
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अब चलते है आपके कुछ चुनिंदा लिंकों की तरफ .......
राजीव कुमार झा 
मिथ्याभाषी या झूठा कहलाना कोई पसंद नहीं करता,पर वास्तविकता यह है कि हम-सभी दिन में शायद,एक बार नहीं,कई बार झूठ बोलते हैं.एक विशेषज्ञ की राय है,’एक औसत व्यक्ति वर्ष में लगभग एक हजार बार झूठ बोलता है.’एक अन्य विशेषज्ञ की राय इससे कुछ भिन्न है.उनका कहना है कि ‘एक वयस्क व्यक्ति दिन में दो सौ बार और वर्ष में लगभग तिहत्तर हजार बार झूठ बोलता है.’
विजयलक्ष्मी 
एक सच सुनाऊ ..
मनन करना तुम 
बताना क्या गलत हूँ मैं 
मैं जानती हूँ 
समझती हूँ तुम्हे 
और तुम
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घुघूती बासूती
अपेक्षाओं के पेड़ उथले छोटे गमले में उगाना
उन्हें अधिक खाद पानी न खिलाना पिलाना
न अधिक धूप दिखाना व धूप से ही बचाना
उन्हें कमरे की खिड़की के आले पर न रखना.
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तुषार राज रस्तोगी 
सिलसिला-ए-गुफ़्तगू चलता रहा तुमसे
 इत्तफ़ाक नहीं करता था मैं जानबूझकर
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रंजना वर्मा 
बूँद बूँद बारिश के गिरते जितने
तेरे यादों में मेरी आंखों से अश्रु बहते उतने
प्रतिभा वर्मा 
तुम्हारी मासूम सी सूरत देखकर
कुछ ख्याल आते हैं मन में,
शायद कोई दर्द छुपा है
इस दिल में,
या हज़ारों राज़ दबे हैं
इन पलकों में,
तुम्हारी खामोश आँखे
कुछ कहती हैं मुझसे
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सरस 
अक्सर
हादसा होने के बाद....
उसके अंजाम के डर से ....
सन्नाटे गूँजा करते हैं भीतर..... !
और खड़े हो जाते हैं पहाड़ पलों के -
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जयश्री वर्मा 
सूरज की लाली ,पृथ्वी की हरियाली,
सागर का धैर्य,नदिया की लहरें मतवाली,
पंछियों का कलरव,भँवरों का गुनगुन का हौसला,
पुष्पों की रंग और मनभावन ख़ुश्बू बनी रहे,बनी रहे।
कविता रावत
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद इन दिनों भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक दस दिन तक चलने वाले भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव की धूम मची है। एक ओर जहाँ शहर के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय और दूर-दराज से आये अधिकांश मूर्तिकारों द्वारा प्लास्टर आॅफ पेरिस के स्थान पर पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से भगवान श्रीगणेश की मनमोहक प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर गली-मोहल्लों और बाजारों के पांडालों में गणपति स्थापना हेतु बने चबूतरों की साफ-सफाई और विद्युत् साज-सज्जा की तैयारी में श्रद्धालुजन रात-दिन

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आनन्द वर्धन ओझा
सुबह हुई तो चिड़िया-चिरगुन
और परिंदे हैरत में थे,
कहाँ गए वे छप्पर-छाजन और मुंडेर
जिन पर जा बैठा करते थे,
कहाँ गई वह पूरी बस्ती
जो कल रात यहां सोई थी,
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रेवा टिबड़ेवाल 
कभी-कभी घर का काम
करते -करते कुछ गानों के शब्द
ऐसे मन को छू जातें हैं की
बैठ कर उसे पूरा सुनने को 
और उस गीत मे
खो जाने को मन करता है
जाने क्यूँ………
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कमला सिंह 'ज़ीनत'
सिगरेट कहाँ है इमरोज़ ?
सुलगाओ न 
सुनो ,दो सुलगाना 
एक मेरे लिए और दूसरा खुद के लिए 
आओ बैठो मेरे पास 
कुछ अपनी कहें, कुछ तुम्हारी सुनें 
दुनिया का दिल बहुत जल चुका 
अब अपना दिल जलाएं
क्या हुआ … ?
अर्पणा खरे 
सच एक एहसास हो तुम 
जीवन का विश्वास हो तुम
(अनुवादक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
"काव्यानुवाद"
-0-0-
आज तुम्हारे बिना हमारा,
कितना शान्त अकेला घर है।
नये-पुराने मित्रवृन्द के लिए
प्रशंसा के कुछ स्वर हैं।
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विनीत वर्मा 
पार्वती नंदन व रिद्दी सिद्धी के दाता गणेशजी का जन्मोत्सव 'गणेश चतुर्थी' के अवसर पर पूरे देश में धूम मची हुई है। गणपति धाम व गणेश जी के प्रमुख मंदिरों में जहां भव्य सजावट का दौर जारी रहा वहीं उनके दर्शन के लिए भक्तों की लम्बी कतार भी देखी गई| यह त्यौहार महाराष्ट्र और गोवा में कोंकणी लोगों का सबसे ज्यादा लोकप्रिय त्यौहार है, जिसे वह बड़ी धूम-धाम और श्रद्धा के साथ मानते हैं। इसके साथ ही गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के अलावा भारत के सभी राज्यों में इस त्यौहार में बड़ी धूम रहती है।
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अनीता जी 
रात्रि काल में हम जो स्वप्न देखते हैं, वे हमारी इच्छा से नहीं आते, एक तरह से वे हम पर थोपे जाते हैं. जब भीतर की चेतना जगती है, तब सपनों पर हमारा अधिकार हो जाता है. जो स्वयं को सोये हुए देख लेता है वह भय से छूट जाता है
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फ़िरदौस खान 
मेरे महबूब
कितने पहर
मैं ढूंढती रही
तुम्हारे हाथ की लकीरों में
अपना वजूद...
जब कुछ समझ न पाई
तब
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लोकेन्द्र सिंह 
पत्तों की खडख़ड़ाहट
कोयल की कूक सुनी है। 
नीम के आंचल से 
चारों ओर ठण्डी हवा चली है।
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वीणा  सेठी 
हे विध्नहर्ता 
धरती पर आओ 
संकट हरो
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पारुल चन्द्रा
 कितने रंग निखर आये हैं 
तेरे प्यार के मुझपर, 
कभी दिन में सुरमई, 
रातों में अक्सर सियाह सी, 
तेरी यादों में पीली..
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आशा सक्सेना 
सुत गौरी के 
रिद्धि सिद्धि के दाता
प्रथम पूज्य |

बाल गणेश 
सवारी मूषक की 
माँ दिल हारी |
अनुपमा  त्रिपाठी 
दादुर ,मोर ,पपीहा गायें,
रूस रूस राग मल्हार सुनायें ,

बूंदों की लड़ियों में रिमझिम ,
गीत खुशी के झूमें आयें
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कच्ची सड़को को छोड़ 
जब चढ़ता हूँ 
पक्की सड़क पर 
पीछे छूट जाती है 
मेरी पहचान
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धन्यवाद, आपका दिन मंगलमय हो 

21 comments:

  1. सुप्रभात
    सुन्दर चर्चा
    बढ़िया संयोजन |श्री गणेश चतुर्थी पर शुभ कामनाएं |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  2. बहुत खूबसूरत और प्रभावी प्रस्तुति राजेंद्र जी की आज की चर्चा ।

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  3. राजेंद्र जी शुभप्रभात ...!!प्रभावशाली प्रस्तुति के बीच अपनी रचना देखना सुबह सुबह हर्षित कर देता है मन !!एक गुजारिश है ....कृपया नाम अपर्णा की जगह अनुपमा कर दें !!।हृदय से आभार मेरी रचना का चयन किया आपने चर्चा मंच पर !!

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  4. बहुत सुन्दर सूत्र और विविधता के रंग समेटे बहुत सुन्दर चर्चा ! सभी पाठकों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें !

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  5. आदरणीय राजेन्द्र कुमार जी।
    आज की चर्चा में आपने बहुत बढ़िया लिंकों का समावेश किया है।
    --
    आपका आभार।
    --
    श्री गणेश चतुर्थी की सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  6. बढ़िया चर्चा-
    गणेश चतुर्थी की मंगल कामनाएं

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  7. श्री गणेश चतुर्थी पर शुभ कामनाएं !!!
    चर्चामंच के विविध सुन्दर संयोजन के बीच मेरी रचना को स्थान देने के लिए आप को बहुत बहुत धन्यवाद .....

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  8. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट "गणेशोत्सव के रंग में" शामिल करने हेतु आभार!
    सभी को गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें!

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  9. गणेश चतुर्थी पर शुभकामनायें..सामाजिक परिवर्तन को सही दिशा देने वाले घटकों में साहित्य का बहुत बड़ा योगदान है, चर्चा मंच भी एक बहुत बड़ी भूमिका इस क्षेत्र में निभा रहा है, बधाई और आभार ! .

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  10. umda links......meri kavita ko shamil karne kay liye shukriya

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  11. बढ़िया व सुंदर प्रस्तुति , आ. राजेन्द्र भाई , शास्त्री जी व मंच को धन्यवाद गणेशोत्सव की शुभकामनाओं सहित !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  12. गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं ! अच्छी प्रस्तुति !! बहुत ही आकर्षक संयोजन !

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  13. बहुत सुंदर चर्चा ! राजेंद्र जी. आभार.
    गणेश चतुर्थी की मंगल कामनाएं !

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  14. बेहतरीन चर्चा ,गणेश चतुर्थी की मंगल कामनाएं

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  15. हमारी नज़्म शामिल करने के लिए हम आपके तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हैं... सभी लिंक्स बहुत अच्छे हैं...
    गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  16. सभी पाठकों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें !

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  17. भूमिका इतनी शानदार लिखी है आपने श्री राजेंद्र जी कि मन करता है , इन रचनाओं को पढ़ा जाए ! आपके शब्दों और आपके संकलन के लिए साधुवाद

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  18. चर्चा मंच पर मेरी कविता को स्थान देने के लिए धन्यवाद.
    घुघूती बासूती

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  19. सुन्दर समायोजन सभी सेतुओं का आपने किया है।

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  20. राजेन्द्र जी पहाड़ के पैर हो गए ,पक्षी लता वल्लरी के मार्फ़त प्रकृति के रूस जाने से पैदा रोष का बढ़िया चित्रण करती है। बढ़िया सेतु लाये आप तमाम।

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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(चर्चा अंक-2853)

मित्रों! मेरा स्वास्थ्य आजकल खराब है इसलिए अपनी सुविधानुसार ही  यदा कदा लिंक लगाऊँगा। शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  ...