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Thursday, June 27, 2019

चर्चा - 3379

7 comments:

  1. सुन्दर और पठनीय चर्चा।
    आभार आदरणीय दिलबाग विर्क जी।

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  2. सुप्रभात ! सार्थक चर्चा, आभार !

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  3. सलामत पाँव हैं जिनके ----में कुछ typo mistake रह गया है पाठकगण कृपया सुधार कर पढ़ें

    शेर २-
    जो भीतर झाँक कर देखा बहुत नीचे गिरे हैं

    शेर--
    कहीं नफरत कहीं दंगे कहीं अंधड़ हवादिस

    हवादिस = हादिसे -हादिसा का बहु वचन

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  4. सार्थक, सुन्दर,संक्षिप्त चर्चा ! सभी सूत्र पठनीय ! मेरी रचना को आज की चर्चा में स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार दिलबाग़ जी ! सादर वन्दे !

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  5. बेहतरीन प्रस्तुति

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