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Friday, June 28, 2019

"बाँट रहे ताबीज" (चर्चा अंक- 3380)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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पहली बारिश 


Sudhinama पर Sadhana Vaid  
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स्वागत वर्षा का 

बूँदें बारिश की  
टपटप टपकतीं
  झरझर झरतीं
धरती तरवतर होती
गिले शिकवे भूल जाती |
हरा लिवास  पहन ललनाएं
कई रंग जीवन में भरतीं 
हाथों में मेंहदी रचातीं
मायके को याद करतीं... 
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इमरजेंसी 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जब मैं मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास में एम. ए. (1971-73) कर रहा था और तब जब कि मैं वहां शोध छात्र था, लखनऊ विश्वविद्यालय और उसके तथाकथित नंबर एक बॉयज़ हॉस्टल, हमारे लाल बहादुर शास्त्री हॉस्टल का बहुत बुरा हाल था. हर जगह गुंडा-राज था.... 
गोपेश मोहन जैसवाल  
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6 comments:

  1. सुप्रभात
    मेरी रचना स्वगत वर्षा का के लिए धन्यवाद सर |

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  2. सुप्रभात, ढेर सारे लिंक पढने को मिले...सभी रचनाकारों को बधाई..आभार !

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  3. सुंदर प्रस्तुति

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  4. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  6. सुन्दर सार्थक सूत्रों का संकलन आज की चर्चा में ! मेरी प्रस्तुति को स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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