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Wednesday, June 05, 2019

"बोलता है जीवन" (चर्चा अंक- 3357)

मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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तुम्हारी ही बातें 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा 
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डॉ. वर्षा सिंह की ग़ज़ल  

@ अम्बालिका पत्रिका 

वो शख़्स मुझे छोड़ मेरे हाल पर गया ।
उसको न कभी मुझसे कोई वास्ता रहा।
दरिया-ए-इश्क़ में मैं डूबी न बच सकी,
मझधार में न उसका सहारा मुझे मिला... 
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सावित्री 

Sweta sinha 
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बोझ 

Sudhinama पर 
Sadhana Vaid  
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जंगलों में लगी आग 

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लघुकथा :  

घर का पता 

झरोख़ा पर 
निवेदिता श्रीवास्तव  

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"मैं की बीमारी"   

अरुण कुमार निगम 

मैं मैं मैं की बीमारी है
खुद का विपणन लाचारी है।

मीठी झील बताता जिसको

देखा चख कर वह खारी है...
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सबद भेद :  

समलैंगिक कामुकता की रवायत और ग़ालिब :  

सच्चिदानंद सिंह 

समालोचन पर arun dev  
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चलते-चलते 

कहते-सुनते दुःख-दर्द बिसर जाते हैं  
चलते-चलते हम यहाँ-वहाँ ठहर जाते हैं  
तब मौन बोलता है जीवन  
अपने होने के अर्थ खोलता है! 
अनुशील पर अनुपमा पाठक 
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8 comments:

  1. बहुत सुंदर और सराहनीय रचनाएँ है आज के अंक में सादर आभार सर मेरी रचना को स्थान देने के लिए।

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  2. बहुत सुंदर चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  3. बहुत सुंदर प्रस्तुति शानदार लिंकों का चयन सभी रचनाकारों को बधाई।

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  4. ईद की बधाइयाँ। विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएँ। सुंदर लिंक्स। मेरे ब्लॉग को स्थान देने के लिए आभार।

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  5. सुन्दर प्रस्तुति। ईद मुबारक!!

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  6. ईद की हार्दिक बधाइयाँ सभी साथियों को !सुन्दर सूत्रों का संयोजन आज की चर्चा में ! मेरी प्रस्तुति को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी!सादर वन्दे!

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  7. मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए हार्दिक आभार 🙏

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