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Sunday, September 01, 2019

" जी डी पी और पी पी पी में कितने पी बस गिने " (चर्चा अंक- 3445)

स्नेहिल अभिवादन   
रविवार की चर्चा में आप का हार्दिक स्वागत है|  
देखिये मेरी पसन्द की कुछ रचनाओं के लिंक |  
 - अनीता सैनी 
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दोहे 
 "भारत की ललकार"  
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

 

उच्चारण 

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जी डी पी और पी पी पी में 

कितने पी बस गिने  

कितने हैं मगर  

किसी को ना बतायें 


 

 काव्यांजलि 

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दुल्हन का रूप 

 मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

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तीन अध्याय -   

फूलाँ दत्ता जी की नज़र से  

Sudhinama 

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100 वाँ जन्मदिन मुबारक हो माझा 

साझा संसार 

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लफ़्जों से मोहब्बत का रूहानी दीदार कराया अमृता प्रीतम ने

 अब छोड़ो भी  

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अंकों का मिलन ..... डॉ. कौशल श्रीवास्तव 


मेरी धरोहर  
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मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको -  
अदम गोंडवी   

स्वयं शून्य  
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नज़्म... संध्या शर्मा 
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मैं और मेरी कविताएं 
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भाषा
\\My Photo
 मेरे मन का एक कोना 
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"शमा"

"जब आने वाले पूछते थे - तबीयत खराब है क्या? आप कहते- नहीं। दरख्त अब बीज बन रहा है। एक कविता भी लिखी आपने- कल तक जो एक दरख्त था, महक, फूल और फलों वाला, आज का एक जिक्र है वह, जिंदा जिक्र है, दरख्त जब बीज बन गया है, हवा के साथ उड़ गया है, किस तरफ अब पता नहीं। उसका अहसास है मेरे साथ। आज फिर वो दर 


" सोच का सृजन " 

9 comments:

  1. बढ़िया चर्चा।
    आपका आभार आदरणीया अनीता सैनी जी।

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  2. सुप्रभात चर्चा मंच। साहित्य सेवा को समर्पित आप सभी को हार्दिक बधाई।

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  3. उम्दा प्रस्तुतीकरण के लिए साधुवाद
    सस्नेहाशीष संग हार्दिक आभार मेरे लेखन को मान देने के लिए

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  4. सुन्दर अंक। आभार अनीता जी।

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  5. वाह!सुन्दर प्रस्तुति. सुन्दर लिंक संकलन.

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  6. सुंदर प्रस्तुति..... मेरी रचना को स्थान देने के लिये आभार

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  7. शानदार प्रस्तुति ,आभार प्रगट करते हुए आपका तहे दिल से शुक्रिया अनिता जी ।

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  8. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  9. सार्थक एवं सारगर्भित सूत्रों का बहुत सुन्दर संकलन ! फूलाँ दत्ता जी द्वारा लिखित मेरे नवीन कहानी संग्रह 'तीन अध्याय' की समीक्षा को स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार अनीता जी ! सप्रेम वन्दे !

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