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Wednesday, April 01, 2020

"कोरोना से खुद बचो, और बचाओ देश" (चर्चाअंक - 3658)

सादर अभिवादन 
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पूरी दुनिया में कोरोना का कहर जारी है। 

कोरोना महामारी से जहां पूरी दुनिया डरी हुई है और करोड़ों लोग घर के अंदर कैद होने को मजबूर हैं, वहीं साल 2013 में रसायन शास्त्र का नोबल पुरस्कार जीतने वाले माइकल लेविट ने उम्मीद जगाई है। उनका कहना है कि जल्द कोरोना का खतरा कम हो जाएगा।
भारत में 1300 से अधिक कोरोना वायरस के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। भारत में कोरोना से संक्रमित 102 लोगों को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक भारत में कोरोना से 32 लोगों की मौत हुई है।
कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) ने भारत के प्रयासों की तारीफ की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना के प्रसार पर रोक लगाने के लिए भारत को अपनी कार्यवाही जारी रखनी चाहिए।
भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखकर सरकार की तरफ से भी लोगों को सावधान किया जा रहा है। लोगों से साफ-सफाई का ध्यान रखने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में न जाने को कहा जा रहा है। 
कोरोना वायरस के लक्षण आम सर्दी-जुकाम की तरह ही हैं- जैसे गले में खराश होना, सूखी खाँसी और बुखार आना। मिलते-जुलते लक्षणों की वजह से ही लोगों को कोरोना वायरस और आम सर्दी-जुकाम में फर्क करना मुश्किल हो रहा है।
WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुखार, सूखी खाँसी, थकान, थूक बनना, सांस की तकलीफ, गले में खराश, सिर दर्द, लकवा या गठिया, ठण्ड लगना, मिचली या उल्टी, बन्द नाक, दस्त, खाँसी में खून आना कोरोना वायरस के अन्य लक्षण हैं।
यदि आपको अपने भीतर ऐसे लक्षण लिखाई दें तो बिल्कुल भी लापरवाही न करें। तुरन्त नजदीकी स्वास्थ्य केन्द में अपनी जाँच कराये।
चर्चा मंच के माध्यम से सभी देशवासियों से निवेदन है कि आप लोग सरकार के निर्देशों का पालन करें और दूसरों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित करें।
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उल्लू का रंग-रूप निराला।
लगता कितना भोला-भाला।।
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अन्धकार इसके मन भाता।
सूरज इसको नही सुहाता।।
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यह लक्ष्मी जी का वाहक है।
धन-दौलत का संग्राहक है।।
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इसकी पूजा जो है करता।
ये उसकी मति को है हरता।।
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धन का रोग लगा देता यह।
सुख की नींद भगा देता यह।।
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सबको इसके बोल अखरते।
बड़े-बड़े इससे हैं डरते।।
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विद्या का वैरी कहलाता।
ये बुद्धू का है जामाता।।
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पढ़-लिख कर ज्ञानी बन जाना।
कभी न उल्लू तुम कहलाना।। 
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अब देखिए बुधवार की चर्चा में  
मेरी पसन्द के कुछ लिंक... 
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एक ग़ज़ल  कोरोना संकट पर...  

कोरोना घातक है, समझो !  

दे सकता है हमें सुरक्षा, दरवाज़े का इक ताला।
घर पर रहने पर टूटेगी, कोरोना की ये माला।

चाइनीज़ हो या हो स्पेनिश, फ़र्क भला क्या पड़ता है,
कोरोना घातक है, समझो! ये छोड़ो किसने पाला... 

-डॉ. वर्षा सिंह 

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ये दौर भी गुजर जायेगा. फिर एक बार हर इंसान 

कुछ सिखाकर ये दौर भी गुजर जायेगा.. 
फिर एक बार हर इंसान मुस्कुराएगा... 
AAJ KA AGRA पर 
Sawai Singh Rajpurohit  
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लॉकडाउन की मज़बूरी -- 

शोर मचाते छोटे छोटे बच्चे  
'बेघर' नर नारी 'घर' जाने को आतुर  
जा रहे थे एक ओर अपने अपने 'घरों' से निकल... 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
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इंडिया लॉक डाउन डायरी ~ Day 6 

बेजान घरों में बसने लगी हैं साँसे 
गली चौराहे सुस्ता रहे एक अरसे बाद 
जिंदगी की रौनक फिर हर छत पर लौट आई है !! 
सु-मन (Suman Kapoor)  
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लघुकथा : अदृश्य जीत |  

लेखन व वाचन  

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी 


...जंगल के अंदर उस खुले स्थान पर जानवरों की भारी भीड़ जमा थी। जंगल के राजा शेर ने कई वर्षों बाद आज फिर खरगोश और कछुए की दौड़ का आयोजन किया था।

पिछली बार से कुछ अलग यह दौड़, जानवरों के झुण्ड के बीच में सौ मीटर की पगडंडी में ही संपन्न होनी थी। दोनों प्रतिभागी पगडंडी के एक सिरे पर खड़े हुए थे। दौड़ प्रारंभ होने से पहले कछुए ने खरगोश की तरफ देखा, खरगोश उसे देख कर ऐसे मुस्कुरा दिया, मानों कह रहा हो, "सौ मीटर की दौड़ में मैं सो जाऊँगा क्या?"
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यहां सपत्नीक पूजे जाते हैं हनुमान 

पाराशर संहिता में हनुमान जी के विवाह का जिक्र मिलता है ! जिसके अनुसार हनुमान जी ने नौ अति दिव्य विद्याओं की प्राप्ति के लिए सूर्य देव को अपना गुरु बनाया था। ये नौ विद्याएं आने वाले समय में राम-रावण युद्ध के समय निर्णायक भूमिका निभाने वालीं थीं।सूर्य देव ने भविष्य को देखते हुए अपने इस बेहद प्रतिभाशाली शिष्य को उन दिव्य नौ विद्याओं का ज्ञान देने का संकल्प कर लिया था... 
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
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मत छोड़ो घर-द्वार 

अपने घर में रह रहे, संयम से जो लोग |  
उनको लग नहीं पायेगा, कोरोना का रोग... 
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मुआवज़ा ... 

आज Lock Down के 7वें दिन अगर आपके पास समय हो तो ... आप थोड़ा समय दीजिए और  ... 1989 में हुए भागलपुर दंगे के बाद उस घटना के आधार पर काल्पनिक स्वरचित लिपि के आधार पर 2018 में स्वएकलअभिनित Youtube Film - "मुआवज़ा" को ... इस के पागल चरित्र का रूप सज्जा भी खुद का ही किया हुआ है ...
अब मत कह दीजिएगा कि ... अपने मुँह मियां मिट्ठू ...☺ 
Subodh Sinha 
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मानव मन अवसाद न कर 

...पतझर पात विटप से झड़ते, 
बसँत नवाँकुर खिल आएगा, 
खुशहाली भारत में होगी  
गुलमोहर-सा खिल जाएगा, 
बीतेगा ये पल भी भारी,  
संयम और  संतोष  तू  वर... 
गूँगी गुड़िया पर Anita saini 
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कर्त्तव्य पथ पर न विश्राम कर 

बैठना तो है घर पर मगर, 
कर्तव्य पथ पर न विश्राम कर
समय जो आज तुमको मिला, 
उसका यथोचित मान कर... 
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पराया हमें वो बताने लगे हैं 

इशारे से सब कुछ जताने लगे हैं

मुझे अपना अब वो बनाने लगे हैं।

उठाया है मैने जिन्हें ज़िन्दगी भर,

वही आज मुझको गिराने लगे हैं... 
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हाइकू 

(कोरोना) 

१-कोरोना भय
जान सांसत में है
बक्त ना कटे


२-लौक डाउन

से हुआ बड़ा फर्क

जीवन बचा... 
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स्त्री मन 

मैं कभी लिख कर कभी बोल कर  
कह लेती हूँ दिल का हाल  
पर तुम्हारे पास तो ये ज़रिया भी नहीं 
काश! तुम समझ पाते ये ज़िन्दगी... 
प्यार पर Rewa Tibrewal 
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बडा सवाल, लक्ष्य क्या है ? 

पी.सी.गोदियाल "परचेत" - 
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ममतामयी प्रकृति 


...मौसम रूठा रूठी तितली ,

रूठी दरियादिली  यहाँ,

जाने किसकी नज़र लग गई, 

आज हमारी धरती पर ।
शाश्वत शिल्प पर महेन्‍द्र वर्मा 
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हिसाब चाहत का 

कहाँ खिलते हैं फूल रेगिस्तान में ...  
हालांकि पेड़ हैं जो जीते हैं  
बरसों बरसों नमी की इंतज़ार में ...  
स्वप्न मेरे पर दिगंबर नासवा 
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संस्मरण  

"भूख"  

...प्रीतम ने मुझसे कहा कि डॉ. साहब कल से भूखे हैं। हमें 2-2 रोटी तो खिला ही दो।
    मैंने कहा- ‘‘जरूर।’’
     श्रीमती ने पराँठे बनाने शुरू किये तो मैंने कहा कि इनके लिए रास्ते के लिए भी पराँठे रख देना।
     अब प्रीतम और उसके परिवार ने पराँठे खाने शुरू किये। वो सब इतने भूखे थे कि पेट जल्दी भरने के चक्कर में दो पराँठे एक साथ हाथ में लेकर डबल-टुकड़े तोड़-तोड़ कर खाने लगे।
     उस दिन मैंने देखा कि भूख और निर्धनता क्या होती है।
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ग़म बोकर
सींचा आँसुओं से
कहकहों से सींची
ख़ुशियों की क्यारी
पकी जब खेती
शब्द उगे
नज्म, ग़ज़ल, गीत बनकर
बीज थे जुदा-जुदा पर
फसल की ख़ुशबू एक-सी थी
ये करिश्मा शायद

काग़ज़ के खेत का है 
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अत्यन्त दुःख के साथ
सूचित किया जाता है कि
चर्चा मंच के सबसे पुराने चर्चाकार
आदरणीय दिलबाग सिंह विर्क के चाचा जी
का देहान्त हो गया है।
चर्चा मंच परिवार की ओर से
दिवंगत आत्मा को
विनम्र श्रद्धांजलि।
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आज के लिए बस इतना ही...
हर शुक्रवार और बुधवार को आपसे फिर मिलूँगा।
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19 comments:


  1. *इस लॉकडाउन में इंसान मदद के लिए अपनों को तौल रहा है। स्वाभिमानी निम्न मध्यवर्गीय लोगों का हाल बुरा है। वे किसी के समक्ष हाथ भी तो नहीं फैला सकते हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि उन तक भी सम्मानपूर्वक प्रशासनिक सहयोग पहुँचे। शास्त्रों में कहा गया है कीर्ति की लालसा से परोपकार नहीं करें, किन्तु ऐसे भी तमाम लोग हैं जो सोशल मीडिया पर दानवीर कर्ण के रूप में स्वयं को प्रदर्शित कर रहे हैं।कहा गया है कि नेकी यदि दिल में रहे तो नेकी, बाहर निकल आये तो बदी है। संकटकाल में किसी का काम चला देने का अर्थ यह नहीं कि हम प्रतिदिन की आस लें, सेवा वहीं है जिसमें निस्वार्थता है।* -व्याकुल पथिक

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  2. दिलबाग सिंह के चाचाजी के निधन पर दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि। परमात्मा मृतक की आत्मा को शांति प्रदान करें ।

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  3. आज की प्रस्तुति और भूमिका अत्यंत सराहनीय है गुरुजी।

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  4. नमन आपको और आभार भी मेरी यूट्यूब फ़िल्म वाले प्रयोग को साझा करने के लिए ... अनचाहे वैश्विक वायरस युद्ध के दौरान 21 दिन के लॉक डाउन के तहत ज्ञानवर्द्धक और मनोरंजक प्रस्तुति ...

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. दिलबाग जी के चाचा जी के निधन पर दिवंगत आत्मा को श्रधांजलि|सारे परिवार को दुःख सहन करने की हिम्मत दे |
    मेरी रचना को आज के अंक में शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद |

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  7. सर्वप्रथम दिलबाग चाचा जी को सादर श्रद्धांजलि भगवान आपकी आत्मा को शांति दे और परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति सुगना फाउंडेशन परिवार की तरफ से सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं

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  8. बहुत ही शानदार आज की चर्चा मंच की यह पोस्ट और इस शानदार पोस्ट में मुझे भी स्थान देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद और साधुवाद आदरणीय शास्त्री जी

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  9. अगर शाख रही तो,
    पते और फुल भी आयेंगे। आज दिन बुरे हैं तो,
    कल अच्छे भी आयेंगे ।
    बस आप घर मे रहे, कोरोना से बचे।
    और
    ओरो को भी बचाए।
    पुलिस और प्रशासन का सहयोग करे ।
    🇮🇳🙏आपका दिन मंगलमय हो
    सुगना फाउण्डेशन परिवार और राजपुरोहित समाज इंडिया टीम

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  10. बेहतरीन। सभी लोगों के सुरक्षित रहने की कामना।

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  11. उम्दा चर्चा। दिलबाग सिंह जी के चाचाजी के निधन पर दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि।
    मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  12. सुन्दर प्रस्तुति

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  13. जहां एक ओर त्राहि-त्राहि करती दुनिया सहमी पड़ी है वहीं कुछ कुटिल लोग पता नहीं अपने किस मतलब के लिए जाहिलों को लोगों की मौत का वॉयस बनाने पर तुले हुए हैं

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  14. विर्क जी को प्रभु इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें ji ko

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  15. अच्छी चर्चा है आज कि ... ये लोक दाउन सफल होने वाल है ...
    आभार आपका मुझे शामिल कारने के लिए ...

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  16. बेहतरीन चर्चा अंक सर ,दिलबाग सर के चाचा जी को विनम्र श्रद्धांजलि ,परमात्मा उनके आत्मा को शांति प्रदान करे

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  17. शानदार प्रस्तुति।
    शानदार लिंक।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

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